Monday, June 22, 2015

भिखना ठोरी – यहां जार्ज पंचम ने मारे थे 39 बाघ

भितिहरवा के मार्ग पर मुझे  वन विभाग का साइन बोर्ड दिखाई देता है। इस पर लिखा है - ठोरी वन क्षेत्र में आपका स्वागत है। बिहार के पश्चिम चंपारण जिले का भिखना ठोरी आखिरी रेलवे स्टेशन है। गवनहा ब्लाक में स्थित भिखना ठोरी के जंगलों में बिखरे हैं इतिहास के कई पन्ने। यह इलाका ब्रिटेन के राजा जार्ज पंचम के शिकारगाह के तौर पर भी प्रसिद्ध है। वे नेपाल के राजा के आमंत्रण पर इधर शिकार करने के लिए पहुंचे थे। दिसंबर 1911 में ग्रेट ब्रिटेन और भारत के सम्राट किंग जार्ज पंचम ने 21 दिन चंपारण के भिखना ठोरी में गुजारे थे। जार्ज पंचम जब सम्राट बनने के बाद भारत आए थे  तो उनका   शानदार स्वागत हुआ था। दिल्ली दरबार के बाद वे चंपारण पहुंचे थे।

शिकार के लिए विशाल शिविर लगाया -   भिखना ठोरी में   जॉर्ज  पंचम  के शिकार के  लिए  एक विशाल   शिविर लगाया था। अपने तीन हफ्ते के प्रवास में उन्होंने कुल   39 बाघों का शिकार किया। जार्ज पंचम का जत्था हाथियों पर सवार होकर नेपाल की तराई के जंगल-जंगल में घूमता था।

बेतिया और रामनगर के राजा ने की खातिरदारी - जार्ज पंचम की खातिरदारी इस दौरान बेतिया और रामनगर के राजा ने की थी। इसके लिए पूरा लाव लश्कर सजाया गया था। उनकी सहायता के लिए उनके साथ नेपाली सिपाहियों और शिकारियों की टीम भी थी। भिखना ठोरी के जंगलों   में   18 दिसंबर 1911 को किंग जार्ज ने यहां पहले बाघ का शिकार किया।  

जार्ज पंचम 12 दिसंबर 1911 के दिल्ली दरबार के बाद चंपारण पहुंचे थे। जार्ज पंचम को शिकार का शौक था। वे इससे पूर्व 1905-06 में प्रिंस ऑफ वेल्स के तौर पर भारत आ चुके थे।  तीन जून 1865 को जन्मे  जार्ज पंचम का पूरा नाम  जॉर्ज फ्रेडरिक अर्नेस्ट अलबर्ट था।  साल   1911 में जार्ज पंचम ट्रेन से यात्रा करके भिखना ठोरी तक पहुंचे थे।
 



और ऐसे की गई शिकार की तैयारी - जॉर्ज पंचम के बाघों के शिकार की कहानी अदभुत है।    यहां से आगे का सफर उन्होंने मोटर और हाथी से किया। शिकार के लिए 600 हाथियों की मदद ली गई जो एक रिंग बनाकर बाघों को घेरने का काम करते थे। जार्ज पंचम ने नेपाल के चितवन नेशनल पार्क में जाकर इन बाघों का शिकार किया। शिकार से पहले पूरी तैयारी की गई थी। थल सेना के दल ने 40 ठिकानों की पहचान की थी जहां राजा शिकार कर सकें।

ठोरी में जार्ज पंचम के लिए बना अस्थायी निवास। 



बाघों को ललचाने के लिए बकरियां -   शिकार करने के नेपाली तरीके में बाघों को आकर्षित करने के लिए बकरियां बांध दी जाती थीं। पर जार्ज पंचम की टीम ने शिकार के लिए रिंग तकनीक अपनाई और सफलतापूर्वक कई बाघों का शिकार किया। 


 भिखना ठोरी में जार्ज पंचम के अस्थायी निवास के लिए एक बंगला बनाया गया था जिसके अवशेष आज भी मौजूद हैं। जार्ज पंचम के प्रवास के दौरान इस बंगले के बाहर चौकीदार तैनात रहते थे। भिखना ठोरी इलाके से हिमालय की सुंदर चोटियां दिखाई देती हैं। ये इलाका बिल्कुल नेपाल की सीमा पर स्थित है।   सीमा के उस पार नेपाल का   वन क्षेत्र पड़ता है।
- विद्युत प्रकाश मौर्य  vidyutp@gmail.com
( NARKATIA GANJ BHIKHNA THORI,  TIGER 1911,  GEORGE-V  )  

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