Saturday, May 2, 2015

मराठी गुजराती शाकाहारी स्वाद का मजा लें माथेरन में


अब बात कर लें हिल स्टेशन माथेरन  के स्वाद की।  कुछ खाने पीने की।  तो जनाब माथेरन में खाने-पीने की बहार है।  आप गोलगप्पा, मिसल पाव, पराठे से लेकर सब कुछ यहां खा  सकते हैं। खास तौर पर शाकाहारी में गुजराती और मराठी खाने  के ढेर  सारे विकल्प यहां मौजूद हैं।



मालपुआ और मिसल पाव -   माथेरन में   पहले दिन शाम हो चुकी थी। स्थानीय लोगों से  जानकारी हमलोग   शाम को खाने के लिए   रामकृष्ण भोजनालय    पहुंचे। गुजराती प्रोपराइटर के इस भोजनालय का खाना सुस्वादु है। हमने यहां पर आर्डर किया पसंदीदा पनीर बटर मसाला और चपाती। यह सबको पसंद आया।


केतकर का मालपुआ -  पर सुबह के नास्ते के लिए हमने   केतकर भोजनालय   को चुना। यह भी गुजराती भोजनालय है। यहां का मालपुआ बेटे के इतना पसंद आया कि हम हर रोज खाते रहे। चलते समय मालपुआ पैक कराकर भी ले चले।   संयोग रहा कि हमारे माथेरन प्रवास के दौरान दो अप्रैल   की तारीख भी आई जो माधवी का जन्मदिन है। तो यहीं पर सेलेब्रेट किया गया जन्मदिन।
नहीं भाया मिसल पाव -  पर माथेरन का मिसल पाव मुझे नुकसान कर गया। इसमें मिर्च मसाला ज्यादा होता है। इससे पेट खराब हो गयाजो अगले कई दिन तक परेशान करता रहा। माथेरन शहर का पानी हमने पहाड़ो का पानी अच्छा होगा समझ कर पी लिया। पर शायद पानी ने भी अपना कमाल दिखाया। बाद में एक जगह पढ़ने को मिला कि बापू को भी माथेरन में आकर मुश्किल हुई थी। 

पर कई लोगों को माथेरन इतना पसंद आता है कि साल में कई बार आते हैं। खास कर मुंबई वाले। ऐसे ही एक परिवार से हमारी यहां पार्क में मुलाकात हुई। यहां लोगों ने बताया कि एक आर्किटेक्ट महोदय तो माथेरन के एक भवन में सालों भर रहते हैं और अपने विदेशी क्लाएंट को यहीं से नक्शे बनाकर भेजते हैं। वे माथेरन से बाहर कम ही निकलते हैं। 

शापिंग में खरीदें चप्पलें -   आप माथेरन शहर से कुछ शापिंग करना चाहें तो यहां से चप्पले खरीद कर ले जा सकते हैं। खास तौर पर महिलाओं की चप्पलें यहां स्थानीय तौर पर बनती हैं। ये चप्पले कई डिजाइन में उपलब्ध हैं जिन्हें यहां फुटपाथ पर और कुछ सजी हुई दुकानों से खरीदा जा सकता है। 


होम स्टे भी ठहरने का विकल्प -  माथेरन के होटल रहने के लिए महंगे हैं। पर यहां जाने पर हमें पता चला कि पैकेज होटलों के अलावा बड़ी संख्या में होम स्टे भी उपलब्ध हैं। काफी लोग अपने घरों में सैलानियों को ठहराते हैं। हालांकि इनका किराया तय नहीं होता। इसमें सीजन के हिसाब से उतार चढ़ाव आता रहता है। पर ये होटलों से सस्ते पड़ते हैं।

आ अब लौट चलें -  खाने-पीने, मौज-मस्ती के बाद    तीसरे दिन दोपहर में हमारी माथेरन से वापसी थी। हमने तय किया था कि फिर खिलौना रेल से वापस लौटना है। पर टॉय ट्रेन में वापसी टिकट पाने के लिए लंबी लाइन लगी थी। मैं लाइन में लग तो गया, पर  ऐसा प्रतीत हो रहा था कि  हमें तीन टिकटें नहीं मिल पाएंगी। टॉय ट्रेन में जितनी सीटें हो उतनी ही टिकटें बिकती हैं। आखिर हुआ भी वही, हमें दो टिकट अपने प्रयास से मिल सकी।  पर हम लौटने वाले तो तीन हैं।

इसी बीच एक रेलवे कर्मचारी हमारे मददगार बनकर आए। उनके प्रयास से हमें एक और टिकट मिल गया। उनका बहुत बहुत धन्यवाद। कई बार सफर में अनजान लोग अचानक आपके मददगार बन  उभरते हैं। ट्रेन धीरे धीरे नेरल की ओर उतर रही थी। एक बार फिर वही अनुभव जो चढा़ई करते समय हुए थे। पर इस बार हमारे जेहन में माथेरन की भी ढेर सारी मीठी मीठी यादें थीं।

-        विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyutp@gmail.com

(MATHERAN,  MAHARASTRA, NERAL, MALPUA, KETKAR, GUJRATI FOOD ) 

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