Friday, May 1, 2015

माथेरन - सनसेट प्वाइंट की सुहानी शाम

महाराष्ट्र के छोटे से हिल स्टेशन माथेरन में घूमने लिए बहुत सारे प्वाइंट हैं। यहां सबसे अच्छा तरीका पैदल घूमना है। पर आप समर्थ नहीं हैं तो हाथ रिक्शा और घोड़े से भी घूम सकते हैं। पर जो आनंद साफ सुथरी हवा में पैदल घूमने का है वह किसी और तरीके से कहां। हमें स्थानीय लोगों ने बताया कि घोड़े पर सवार हो माथेरन घूम रही एक विदेशी लड़की खंडाला प्वाइंट पर पिछले दिनों गिर कर मर गई। घोड़ा अचानक भड़क गया था। 

क्या क्या देखें -  माथेरन बाजार में राम मंदिर और माधवजी पार्क है। इसके अलावा एलेक्जेंडर प्वाइंट, खंडाला प्वाइंट, पिसरनाथ मंदिर, शॉरलेट लेक, लार्ड प्वाइंट, इको प्वाइंट, मंकी प्वाइंट, सनसेट प्वाइंट जा सकते हैं।

अगले दिन की सुबह से ही हमने माथेरन में घूमना शुरू कर दिया। हां, पैदल ही। सबसे पहले हमलोग माधव जी पार्क पहुंचे। पार्क में हमें  फोटोग्राफर मुकीम शेख मिले जिन्होने अपने निकॉन कैमरे से हमारी तस्वीरें उतारी। ( फोन – 9423806509) मुकीम लखनऊ के हैं पर अब माथेरन को अपना ठिकाना बना लिया है। अब सालों से यहीं फोटोग्राफी करते हैं। आप जाएंगे तो आपकी भी मुलाकात हो जाएगी। इस पार्क में ढेर से झूले हैं सो अनादि तो यहीं जमे रहना चाहते थे। पर हमलोग आगे चले। अगला पड़ाव है खंडाला प्वाइंट भला खंडाला प्वाइंट क्यों...क्योंकि यहां से खंडाला शहर नजर आता है।

इसके बाद एलेक्जेंडर होटल के पास एलेक्जेंडर प्वाइंट पहुंच गए हैं हमलोग। बंदरों का डर है तो अनादि ने जंगल से लकड़ी उठाकर एक छड़ी बना ली है। इसके बाद जंगलों के बीच से पदयात्रा करते हुए करीब एक किलोमीटर चलने के बाद हमलोग पहुंच गए प्राचीन पिसरनाथ मंदिर। शिव का सुंदर सा मंदिर है एक झील के किनारे। मंदिर के बगल में शॉरलेट लेक है। बताते हैं लोग कि बारिश में ये झील और सुंदर हो जाती है। पर अभी इस झील में थोड़ा पानी कम है।
माथेरन में शॉरलेट लेक के सामने। 

शॉरलेट लेक के बगल में हैं लार्ड प्वाइंट। इस झील से थोड़ा आगे चलने पर आ जाता है इको प्वाइंट। यहां पर क्रॉस द वैली के लिए रोपवे लगा है। क्रॉस द वैली का किराया 300 रुपये प्रति फेरी। हमें इस तरीके से वैसी क्रॉस करने में कोई रूचि नहीं है। हालांकि ये है बड़ा रोमांचकारी। तो हमलोग आगे बढ़ चले। भूख लगी थी सो जंगल में कच्ची कैरी और बड़ा पाव खाया। कुछ मराठी महिलाएं जंगल के रास्ते में कच्ची कैरी (आम) बेच रही थीं। इसके बाद आइसक्रीम भी खाया। और दोपहर में अपने होटल के लिए वापस।

अब शाम को सनसेट प्वाइंट जाने का कार्यक्रम बना। हां तो सनसेट तो शाम को ही देखेंगे न.. जाने के लिए तीन किलोमीटर जंगलों से पैदल रास्ता। रेलवे स्टेशन के बगल में दिवादकर होटल से सनसेट प्वाइंट के लिए रास्ता जाता है।

सनसेट प्वाइंट के रास्ते में स्टेट बैंक होलीडे होम और अशोक होटल आते हैं। यहां भी खूब बंदर दिखाई देते हैं। इसलिए पास में एक मंकी प्वाइंट भी है। तीन किलोमीटर जंगल से होकर जाते हुए हम रास्ते में अकेले थे। ऐसा लगा जैसे हम ही उधर जाने वाले अकेले बेवकूफ हैं। पर सनसेट प्वाइंट पर शाम को सैकड़ों सैलानी जुटते हैं। डूबते हुए सूर्य के सौंदर्य को निहारने। और ये बन जाती है माथेरन की सबसे यादगार शाम। यहां मौजूद होते हैं मुंबई के कारोबारी घराने के लोग, जो छुट्टियां मनाने पहुंचे हैं।
अनादि को उनकी ही उम्र के गोविंद जैसे दोस्त मिल गए। वही जो सुबह पार्क में मिले थे। तो हमलोगों ने यहां घंटे पर मस्ती की। कुछ खाया पीया। लौटते हुए रात हो गई है, पर जंगल के रास्ते में रोशनी का इंतजाम है। हमें लगा कि माथेरन में प्रवेश के लिए दिए गए 50 रुपये टैक्स का सदुपयोग हो रहा है।
- vidyutp@gmail.com

( MATHERAN, SUNSET POINT , MONKEY POINT)