Thursday, April 2, 2015

मनमाड जंक्शन से नांदेड़ - श्री हुजुर साहिब की ओर

मनमाड जंक्शन से रेल का मार्ग बदल जाता है। ट्रेन आगे की ओर चल पड़ती है। मनमाड से औरंगाबाद की  दूरी 112 किलमीटर है। हमें औरंगाबाद भी  रुकना है पर पहले हम नांदेड़ जाएंगे उसके बाद वापस लौटते हुए औरंगाबाद रुकेंगे। औरंगाबाद, जलाना, सेलू, परभणी होते हुए हम आगे बढ़ रहे हैं। मराठवाड़ा क्षेत्र के खेत ट्रेन की खिड़की से नजर आते हैं। खेतों में हरियाली नजर नहीं आ रही है। कहीं कहीं वर्षा जल संचय के लिए तालाब बने हैं। सहयात्री बताते हैं कि पिछले कई सालों से मराठवाड़ा से इंद्र देवता मानो रूठ गए हैं। बारिश काफी कम हो रही है। पूरी खेती बारिश के भरोसे है। खेतों में उपज 10 फीसदी भी नहीं हो रही है। जमीन के भाव पूरे महाराष्ट्र की तुलना में सबसे कम हैं। 
नांदेड़ - गुरुग्रंथ साहिब भवन के लॉन में

परभणी जिले में बसंतराव नाइक कृषि विश्वविद्यालय का विशाल प्रवेश द्वार नजर आता है। इसी जिले में परली लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र है जहां से स्व गोपीनाथ मुंडे लोकसभा का चुनाव जीते थे। अब उप चुनाव में उनकी बेटी प्रीतम मुंडे जीत कर पहुंची हैं। पूर्णा जंक्शन से आगे बढ़ने के बाद हमारी   
ट्रेन समय पर हुजुर साहिब नांदेड पहुंच जाती है। शाम के चार बज चुके हैं। तो 27 घंटे के सफर के बाद हम    श्री हुजुर साहिब नांदेड़ पहुंच चुके हैं। सचखंड एक्सप्रेस का ये आखिरी रेलवे स्टेशन है।   मतलब  टर्मिनेटिंग रेलवे  स्टेशन।   नांदेड़ महाराष्ट्र  प्रांत का आखिरी जिला है। इसके आगे रेल मार्ग तेलंगाना में प्रवेश कर जाता है।   रेलवे स्टेशन के बाहर कई बसें लगी हैं जो श्रद्धालुओं के निःशुल्क गुरुद्वारा सचखंड साहिब और लंगर साहिब ले जा रही हैं।


और हमें कहीं नहीं मिली जगह रेलवे  स्टेशन से बाहर निकलने पर हमलोग भी एक बस में  बैठ जाते हैं। रास्ते में एनआरआई निवास ( वातानुकूलित), पंजाब भवन ( वातानुकूलित), गुरु रामदास सराय, गुरु नानक देव जी यात्री निवास, रंजीत सिंह यात्री निवास आता है।   हम सबसे पहले सचखंड साहिब के स्वागत कक्ष पर पहुंचकर आवास सुविधा के लिए आग्रह करते हैं। वे हमे वापस रंजीत सिंह यात्री निवास जाने को कहते हैं। पर हमें रंजीत सिंह निवास में काफी आग्रह के बाद भी कमरा नहीं मिलता है। इसके बाद हम एक एक कर सभी यात्री निवास में हम जाते हैं, पर हमें कहीं जगह नहीं मिल पाती है।

सुंदर गुरुग्रंथ साहिब भवन में बना ठिकाना -  अंत में हमलोग पहुंचते हैं गुरुग्रंथ साहिब भवन। यहां स्वागत कक्ष में मौजूद सरदार जी ने हमसे मिलते ही काफी अच्छा व्यवहार किया। हालांकि यहां के कमरे काफी बड़े बड़े हैं। हर कमरे में 10 लोगों के रहने का इंतजाम है। कमरे में 10 गद्दे लगे हुए हैं। हर कमरा अटैच टायलेट वाला है। यह भवन आम तौर पर बड़े समूहों के लिए बना हुआ है। पर हम तो ढाई लोग ही हैं। फिर भी सरदार जी हमें कमरा देने को तैयार हो जाते हैं। उन्हें हम बता चुके हैं कि तीन भवनों में  हमें कमरा नहीं मिल सका है।


 दो सौ रुपये का कमरा - तो यहां  पर  हमें गुरु ग्रंथ साहिब भवन में शानदार कमरा महज 200 रुपये प्रतिदिन पर मिल जाता है। 10 लोगों के कमरे में हम सिर्फ ढाई लोग। अगर दस लोगों के हिसाब से देखा जाए तो ये काफी सस्ता है। इस वृताकार भवन में ए से लेकर एच तक आठ ब्लाक बने हैं। बीच में संग्रहालय बना है चारों तरफ श्रद्धालुओं के लिए निवास। लॉन में अप्रतिम हरितिमा का वास है। क्यारियों में शानदार फूल खिले हैं। मन खुश हो जाता है हरियाली के बीच।


गुरुग्रंथ साहिब भवन सचखंड  साहिब गुरुद्वारा के  काफी नजदीक भी है। सफर की थकान मिटाने के बाद हम शाम को सचखंड साहिब पहुंचते है मत्था टेकने के लिए।    अगली सुबह गुरुग्रंथ साहिब भवन का हरा भरा लॉन देखकर मन खुश हो गया।  अनादि तो इसकी हरी भरी घास पर जाकर लेट गए।  सब गुरु साहिब की कृपा है कि थोड़े संघर्ष  के बाद हमें अच्छा आवास मिल गया।   
- विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyutp@gmail.com

( SACHKHAND EXPRESS, NANDED, MAHARASTRA, SIKH TEMPLE, GURU GRANTH SAHIB BHAWAN ) 
नांदेड़ में सुबह का नास्ता - पंजाबी पराठे और क्या....

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