Monday, April 27, 2015

माथेरन - इस शहर में कोई डीजल वाहन नहीं आ सकता

औरंगाबाद मुंबई जनशताब्दी एक्सप्रेस में 
औरंगाबाद-अजंता-एलोरा में कुछ दिन गुजारने के बाद हमारा अब अगला पड़ाव था माथेरन। महाराष्ट्र का एक खूबसूरत हिल स्टेशन। सफर शुरू हुआ औरंगाबाद से मुंबई मार्ग पर कल्याण होकर। कल्याण से नेरल फिर नेरल से खिलौना ट्रेन का सफर करके हम पहुंचे माथेरन। माथेरन के प्रदूषण मुक्त हिल स्टेशन है। 
12072 औरंगाबाद मुंबई जन शताब्दी एक्सप्रेस  सुबह 6 बजे औरंगाबाद के प्लेटफार्म नंबर एक से खुलती है। हमलोग होटल से टहलते हुए रेलवे स्टेशन पहुंच गए। जनशताब्दी के वातानुकूलित कोच का सफर अच्छा रहा। अनादि सहयात्री के साथ वीडियो गेम खेलने में व्यस्त हो गए।


थोड़ी देर बाद ट्रेन मनमाड जंक्शन पर रुकी। यहां पर हमने बड़ा पाव खाया।  क्योंकि नास्ते का समय हो गया था।  अनादि को बड़ा पाव खूब पसंद आने लगा है।  यह हल्का नास्ता भी है। इसलिए ठीक है।  तो चलती  ट्रेन में ही हमारा नास्ता हो गया है।  जनशताब्दी का   अगला स्टेशन आया है नासिक रोड।


हमलोग पिछली यात्राओं में नासिक और आसपास के इलाके  घूम चुके हैं।  जनशताब्दी  को औरंगाबाद, मनमाड, नासिक रोड,  कल्याण  जंक्शन, थाने और दादर  यही ठहराव हैं।  इसलिए सुबह-सुबह औरंगाबाद से मुंबई जाने के लिए ये बहुत अच्छी ट्रेन है। यह ट्रेन हमें दोपहर से पहले 11.30 बजे कल्याण स्टेशन पर पहुंचा देती है। हमलोगों ने कल्याण रेलवे स्टेशन पर ही उतरना तय किया है। 


दरअसल हमें पुणे मार्ग पर नेरल रेलवे स्टेशन जाना है, इसलिए छत्रपति शिवाजी टर्मिनस तक जाने की कोई जरूरत नहीं है। तो हमलोग कल्याण में ही उतर गए हैं। यह भी काफी बड़ा और भीड़ भाड़ वाला रेलवे स्टेशन है। यहां से नेरल के लिए लोकल ट्रेन हर वक्त मिलती है। इसलिए हमलोग  दोपहर के लंच के लिए अपने बैगेज के साथ कल्याण रेलवे स्टेशन से बाहर निकल आए।


एक होटल में खाने के लिए बैठ गए। इस दौरान अनादि अचानक बोले कि हमें टायलेट जाना है। तो होटल वाले ने बताया पड़ोस के बार में चले जाएं। जब हम बार घुसे तो देखा कि यहां दिन दहाड़े लोग पेग लगा रहे थे। मैं भी किसी मुंबई के बार में पहली बार दाखिल हुआ था। खैर हम टायलेट का इस्तेमाल कर बाहर आ गए। दोपहर का भोजन कल्याण में लेने के बाद हमने यहां से नेरल के लिए लोकल ट्रेन ले ली। करजत पुणे की तरफ जाने वाली हर लोकल ट्रेन नेरल में रूकती है।



पर नेरल से हमारी माथेरन की ट्रेन शाम को है। इसलिए हमें नेरल में कुछ घंटे इंतजार करना पड़ेगा। इस दौरान  रेलवे स्टेशन पर ही माधवी की तबीयत थोड़ी खराब हो गई। हमलोगों ने उन्हें प्लेटफार्म की बेंच पर ही सुला दिया और हवा करने लगे। इस दौरान नन्हें अनादि ने मां का खूब ख्याल रखा। फिर थोड़ी देर में उनकी तबीयत ठीक हुईं तो हमने आसपास में नेरल के बाजार का थोड़ा मुआयना किया।    रेलवे स्टेशन के बाहर से माथेरन के लिए टैक्सियां भी मिल रही हैं। शेयरिंग भी जाती हैं। अगर रेल का टिकट न मिल पाए तो टैक्सी से जा सकते हैं।

इस शहर में कोई डीजल वाहन नहीं जा सकता 

शून्य प्रदूषण वाला हिल स्टेशन है माथेरन   - नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने 8 अप्रैल 2015 को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में 10 साल से ज्यादा पुराने डीजल वाहनों पर प्रतिबंध लगाने का आदेश दिया है । ऐसा आदेश शहर के पर्यावरण को बचाने को ध्यान में रखते हुए दिया गया है। वाहनों की लॉबी हाय तौबा मचा रही है। पर देश में एक ऐसा पर्वतीय शहर है जहां डीजल या पेट्रोल चलित किसी भी वाहन का प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित है। महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले में है हिल स्टेशन माथेरन जहां किसी तरह का वाहन शहर के अंदर नहीं जाता। शहर की प्राकृतिक आबोहवा को बचाए रखने के लिए इस तरह का फैसला बहुत साल पहले लिया गया था।

पार्किंग से पैदल सफर  - माथेरन शहर की सीमा से बाहर अमन लाज के पास पार्किंग में वाहनों को पार्क करके आगे का सफर पैदल करना पड़ता है। माथेरन एशिया का एकमात्र हिल स्टेशन है जहां पर सिर्फ पदयात्रा करके ही चल सकते हैं। इसलिए इसे सैलानी जीरो पल्यूशन हिल स्टेशन कहते हैं। यहां तक की साइकिल भी यहां नहीं चलती। सामान ढुलाई के लिए घोड़े हैं ना। मुंबई से इस हिल स्टेशन की दूरी 100 किलोमीटर है। यहां स्थानीय लोग भी किसी तरह का डीजल पेट्रोल चलित वाहन नहीं रख सकते। इमरजेंसी के लिए सिर्फ शहर में दो एंबुलेंस हैं। अगर कोई नेता या वीआईपी भी शहर में आता है तो वह भी पदयात्रा ही करता है। बूढे और बीमारों के लिए हाथ रिक्शा का विकल्प मौजूद है। सामान ढोने के लिए लोग महिला और पुरुष कुलियों की सेवाएं लेते हैं।



हालांकि शहर के बीचों बीच बाजार तक खिलौना ट्रेन आती है। उसमें डीजल इंजन लगा है। पर्यावरणविद काफी समय से तर्क दे रहे हैं कि इस ट्रेन को बिजली या फिर सीएनजी इंजन से चलाया जाए, जिससे माथेरन में कोई डीजल लोको भी प्रवेश नहीं कर सके। अगर रेलवे ये सुझाव मान लेता है तो आने वाले दिनों में यहां डीजल लोको का आना भी बंद हो सकता है।    वास्तव में हमें इस नन्हें से शहर से सीख लेने की जरूरत है ताकि हम अपने शहर की आबोहवा बचा सकें। वरना हम आने वाली पीढ़ी को क्या जवाब देंगे।

डीजल   ईंजन या जनरेटर से जो धुआं निकलता है उसमें बारीक से बारीक ऐसे ऐसे तत्व होते हैं जो आपकी सांस की नली से होते हुए फेफड़े को ख़राब कर देते हैं।  दिल के आस पास दौड़ने वाली धमनियों को कमज़ोर कर देते हैंदिमाग की कोशिकाओं को बेकार कर देते हैं। कैंसर,   पार्किंसन,   अलझाईमर,   हार्ट अटैक,   सांस की   तकलीफ,   बिना बात की खांसी,   आंखों में जलन जैसी बीमारियां डीजल प्रदूषण से हो सकती है।

बढ़ता जा रहा है खतरा 

80 हजार   से भी ज्यादा डीज़ल वाले ट्रक दिल्ली में रोज रात को प्रवेश करते हैं और इसकी हवा खराब कर जाते हैं। 
16   गुना   ज़्यादा हो गई है दिल्ली में डीज़ल की खपत बढ़ने से  RSPM   यानी रेस्पिरेपल सस्पेंडेट पर्टिकुलेट मैटर की मात्रा तय मानकों से।

2020   तक    सभी डीज़ल कारों को बैन कर दिया जाएगा फ्रांस की राजधानी   पेरिस में

2019  तक   हटा देने की कवायद हो रही है हांगकांग में यूरो फोर डीजल गाड़ियों को। 

- विद्युत प्रकाश मौर्य 
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 PS -  मनाली के आगे डीजल वाहन नहीं
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटीके आदेश के मुताबिक पहली मई 2015 से मनाली से रोहतांग जाने वाले डीजल इंजन पर्यटक वाहनों पर प्रतिबंध लगा दिया है। अब पहली मई के बाद केवल पेट्रोल इंजन वाहनों में ही पर्यटक रोहतांग जा सकेंगे। एनजीटी ने यह आदेश रोहतांग दर्रे के आसपास बढ़ते हुए प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए जारी किए हैं।

हिमाचल प्रदेश का पर्यटक सीजन भी मई और जून में यौवन पर रहता है। उस समय मैदानी इलाकों की भीषण गर्मी से राहत पाने के लिए पर्यटक पहाड़ों का रुख करते हैं। एनजीटी के आदेशों से कुल्लू-मनाली के पर्यटन कारोबारियों में हड़कंप मच गया है। कुल्लू में 80 फीसद पर्यटक वाहन डीजल इंजन हैं और 20 फीसद पेट्रोल इंजन हैं। अकेले मनाली में ही पर्यटक वाहनों की संख्या आठ सौ के करीब है। मई व जून में रोजाना रोहतांग के लिए मनाली से ढाई से तीन हजार पर्यटक वाहन आते-जाते हैं। इन आदेशों के बाद डीजल इंजन वाहन संचालकों की चिंता बढ़ गई है।
 ( 21 अप्रैल 2015 को प्रकाशित एक खबर) 

( MATHERAN -1)

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