Friday, April 24, 2015

अजंता - गीत गाया पत्थरों ने



 अजंता में  आपको पत्थरों में सुनाई देता है संगीत। एक अनवरत संगीत। प्राणों को झंकृत कर देने वाला संगीत। जो अन्यत्र दुर्लभ है। सैकड़ो साल हजारों कलाकारों की अनवरत तपस्या की परिणति है अजंता की गुफाएं।   अजंता की गुफाओं में बनी कलाकृतियों में हजारों शिल्पियों के श्रम और साधना को महसूस किया जा सकता है। यहां पत्थरों से निकलने वाले संगीत को तो यहां पहुंचकर ही महसूस किया जा सकता है। तभी तो अजंता की गुफाएं विश्व के सर्वश्रेष्ठ दर्शनीय स्थलों में एक हैं। 


  
काफी लोग ताजमहल को देखकर अद्भुत कहते हैं, पर अजंता की गुफाओं को देखने के बाद ये लगता है कि देश का दुनिया में ऐसी नायाब कृति कहीं नहीं हो सकती। वर्गुना नदी के तीन तरफ पहाड़ों की 20 मीटर गहराई तक काट कर गुफाएं बनाई गई हैं जिसमें गौतम बुद्ध का जीवन दर्शन कलाकृतियों और मूर्ति शिल्प में उतारा गया है।

अजंता में विचरण करते हुए लगता है मानो पत्थरों से लगातार  संगीत  प्रतिध्वनित हो रहा हो। सारी गुफाएं देखते देखते आप आनंदित होते हैं
, रोमांचित होते हैं, अचरज करते हैं, कब शाम ढलने लगती है पता भी नहीं चलता। अजंता की इन 32 गुफाओं का निर्माण पहली शताब्दी से सातवीं शताब्दी के बीच हुआ है। ये पूरी तरह बुद्ध  के जीवन को समर्पित हैं। 


सैकड़ो साल लोगों की नजरों से ओझल रहीं -
सह्याद्रि की पहाडि़यों पर स्थित अजंता की इन
   32    गुफाओं में कुल    5   प्रार्थना भवन और   25   बौद्ध मठ हैं। पर साल 1819 से पहले ये गुफाएं सैकड़ो साल तक लोगों की नजरों से ओझल रही हैं। अभी भी आप सिर्फ 28 गुफाओं को ही देखने जा सकते हैं। चार के लिए रास्ता नहीं है। 

अजंता - गुफा नंबर 21 के इन स्तंभों पर थपकी देने से निकलता है संगीत। 

इन गुफाओं की खोज आर्मी ऑफिसर जॉन स्मिथ व उनके दल द्वारा सन्   1819   में की गई थी। वे यहाँ शिकार करने आए थे,   तभी उन्हें कतारबद्ध   29   गुफाओं की एक शृंखला नजर आई। इस खोज के बाद दुनिया भर में ये गुफाएं प्रसिद्ध हो गई। घोड़े की नाल के आकार में निर्मित ये गुफाएं अत्यन्त ही प्राचीन व ऐतिहासिक महत्त्व की है।

गीत गाया पत्थरों ने     अजंता की गुफाओं  को देखते हुए बस यही ख्याल मन में आता है - गीत गाया पत्थरों ने...
इन गुफाओं का इस्तेमाल भगवान बुद्ध की शिक्षाओं का अध्‍ययन करने के लिए किया जाता था। एक गुफा ऐसी है जिसके स्तंभ को थपकाने पर संगीत की धुन निकलती है। गुफाओं की दीवारों तथा छतों पर बनाई गई ये तस्‍वीरें भगवान बुद्ध के जीवन की विभिन्‍न घटनाओं और विभिन्‍न बौद्ध देवत्‍व की घटनाओं का चित्रण करती हैं। इसमें से सर्वाधिक महत्‍वपूर्ण चित्रों में जातक कथाएं   हैं, जो   बोधिसत्व के रूप में बुद्ध के पिछले जन्‍म से संबंधित विविध कहानियों का चित्रण करते हैं। यूनेस्‍को   द्वारा   1983   में अजंता को विश्‍व विरासत स्‍थल   घोषित किया गया। यह देश का पहला विश्व विरासत स्थल है।
अजंता में बुद्ध। 

कैसे पहुंचे    औरंगाबाद से अजंता की दूरी 110 किलोमीटर है। औरंगाबाद सेंट्रल बस स्टैंड से नियमित तौर पर जलगांव की तरफ जाने वाली बसें अजंता में रूकती हैं। पर अगर आपको सिर्फ अजंता जाना हो तो जलगांव में रूक कर भी जा सकते हैं। जलगांव से अजंता की दूरी महज 65 किलोमीटर है। अजंता की गुफाओं से पहले अजंता नामक एक गांव आता है। यहां पर एक दो गेस्ट हाउस बने हैं। इस गांव में भी एक किला नजर आता है।
अजंता में एमटीडीसी का रेस्टोरेंट 

अजंता के प्रवेश द्वार के पास सड़क पर तो कोई मार्क बना हुआ नहीं दिखाई देता। पर जलगांव औरंगाबाद के बीच चलने वाली बसें यहां रूक जाती हैं। गुफा का स्वागत कक्ष शानदार बना है। यहां पर सुविधाओं के इस्तेमाल के लिए 15 रुपये का शुल्क देना पड़ता है। यहां एक छोटा सा सुंदर सा बाजार है। जहां खाने पीने और  प्रतीकात्मक उपहार आदि खरीदने की सुविधा है। 


इस बाजार को पार करने के बाद एक बस स्टैंड आता है। यहां से अजंता के दूसरे प्रवेश द्वार के लिए बसें चलती हैं। कुल 4 किलोमीटर की दूरी का किराया 15 रुपये है। एसी बस का किराया 20 रुपये है। मुख्य द्वार पर दुबारा प्रवेश का टिकट खरीदना पड़ता है। भारतीय लोगों का टिकट 10 रुपये का है। समूह में 5 रुपये का लाइटिंग का टिकट अलग से लेना पड़ता है। गुफाओं के बीच में जगह जगह पेयजल का इंतजाम किया गया है। 
- विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyutp@gmail.com

   ( AJANTA, AURANGABAD, BUDDHA, CAVES, WORLD HERITAGE SITE)  

     
और चलते चलते कुछ खरीददारी हो जाए....

 आगे पढ़िए - अजंता - 26 गुफाओं में गौतम बुद्ध के दर्शन 

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