Tuesday, April 21, 2015

खुल्ताबाद में औरंगजेब की कच्ची मजार पर


मुगल बादशाह औरंगजेब ऐसा शासक रहा है जिसका इतिहास में ज्यादातर नकारात्मक मूल्यांकन हुआ है। दिल्ली के इस सुल्तान की मजार है औरंगाबाद शहर से 30 किलोमीटर दूर खुल्ताबाद में। उसकी दिली तमन्ना थी कि उसे अपने गुरु के बगल में दफनाया जाए। इसलिए अहमदनगर में 23 मार्च 1707 को मौत होने के बाद उसे यहां लाकर दफनाया गया। ( कुछ जगह मौत की तारीखें अलग भी मिलती हैं) औरंगंजेब की कब्र कच्ची है। कब्र के पास मौजूद सेवादार बताते हैं कि उसकी इच्छा थी कि कब्र को भव्य रूप नहीं दिया जाए।


अबुल मुजफ्फर मुहिउद्दीन मुहम्मद औरंगजेब आलमगीर का जन्म 4 नवम्बर 1618 को गुजरात के दाहोद शहर में हुआ था। वह शाहजहां और मुमताज की छठी संतान और तीसरा बेटा था। उसका शासन  1658   से लेकर    1707   तक रहा। इस प्रकार उसने 50 साल यानी मुगल शासकों में सबसे ज्यादा साल तक शासन किया। उसकी पहचान हिन्दुस्तान के इतिहास के सबसे जालिम राजा के तौर पर है। जिसने  अपने पिता को कैद किया,   अपने सगे भाइयों और भतीजों की बेरहमी से ह्त्या की। गुरु तेग बहादुर का सिर कटवाया। गुरु गोबिंद सिंह के बच्चों को जिंदा दीवार में चुनवाया। पर उसकी सादगी के किस्से भी मशहूर हैं। 




औरंगजेब के अन्तिम समय में दक्षिण में मराठों का वर्चस्व बहुत बढ़ गया था। उन्हें दबाने में शाही सेना को सफलता नहीं मिल रही थी। इसलिए सन 1683 में औरंगजेब खुद सेना लेकर दक्षिण की ओर गया। वह राजधानी से दूर रहता हुआअपने शासन−काल के लगभग अंतिम 25 वर्ष तक इसी अभियान में व्यस्त रहा।

उसकी मृत्यु महाराष्ट्र के अहमदनगर में 23   मार्च सन  1707  ई. में हो गई। उसकी इच्छा के ही मुताबिक दौलताबाद में स्थित फकीर सैय्यद जैनुद्दीन सिराजी रहमतुल्लाह की कब्र के अहाते में उसे दफना दिया गया। हालांकि उसकी नीति ने इतने विरोधी पैदा कर दिए थे जिस कारण मुगल साम्राज्य का अंत ही हो गया। औरगंजेब के बाद दिल्ली सल्तनत दिल्ली के आसपास ही सिमट कर रह गया था।

औरंंगजेब की कच्ची कब्र। 
खुल्ताबाद में औरंगजेब की मजार पर बहुत कम लोग ही पहुंचते हैं। ज्यादातर लोग जो एलोरा या दौलताबाद आते हैं उनमें से कुछ लोग लगे हाथ औरंगजेब की मजार पर भी दस्तक देने पहुंच जाते हैं। मजार के पास बाहर कई इत्र की दुकानें हैं। चूंकि मजार के बगल में फकीर बुरहानुद्दीन (शेख जैनुउद्दीन शिराजी-हक) की कब्र है इसलिए उनकी कब्र पर फूल चढ़ाने वाले और दुआएं मांगने वाले पहुंचते हैं। फकीर बुरहानुद्दीन अकबर के गुरु सलीम चिश्ती के परिवार से आते थे, हजरत ख्वाजा बुरहानुद्दीन फकीर शेख बुरहानुद्दीन के नाम पर मध्य प्रदेश का बुरहानपुर शहर बसा है।


टोपियां सी कर गुजारा करने वाला बादशाह  - कहा जाता है औरंगजेब सादा जीवन जीता था। वह उन सब दुर्गुणों से सर्वत्र मुक्त थाजो आमतौर पर राजाओं में होती है। खाने-पीनेवेश-भूषा और जीवन की सभी-सुविधाओं में वह बेहद संयम बरतता था। प्रशासन के कार्यों में व्यस्त रहते हुए भी वह अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए टोपियां सीकर कुछ पैसा कमाने का समय निकाल लेता था। औरंगजेब पर नई दृष्टि से बात करने वाले इतिहासकार कहते हैं कि उसने सिर्फ उन्ही मंदिरों को तोड़वाया जहां से उसे भ्रष्टाचार की शिकायतें मिलीं। उसने अपने जीवन में कई मंदिरों को दान भी दिया था।  प्रयागराज के इतिहासकार  प्रदीप केसरवानी के अनुसार औरंगजेब ने  संगम के किनारे  स्थित सोमेश्वर नाथ मंदिर को भारी मात्रा में दान भी दिया था।

विद्युत  प्रकाश मौर्य - vidyutp@gmail.com

( AURANGABAD, AURNGNJEB TOMB, KHULTABAD ) 

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