Friday, May 1, 2015

माथेरन में चलता है कोलकाता की तरह हाथ रिक्शा

पूरे देश में सिर्फ कोलकाता ऐसा शहर है जहां हाथ रिक्शा चलता है। पर दूसरा शहर है माथेरन जहां इस तरह का रिक्शा संचालन में है। ऐसे रिक्शा में दो पहिए होते हैं। तीसरे पहिए की जगह एक इंसान इस रिक्शा को लेकर दौड़ता है। चूंकि माथेरन में कोई डीजल वाहन नहीं चलता इसलिए जो लोग पैदल नहीं चल सकते उनके लिए हाथ रिक्शा या घोड़ा विकल्प है। माथेरन की भौगोलिक स्थिति जैसी है उसमें तीन पहिए वाले साइकिल रिक्शा का संचालन संभव नहीं है। 


वास्तव में माथेरन में घूमने के तरीके तीन हैं। घोडे से,   हाथ रिक्शा से या फिर पैदल। माथेरन में 450 घोड़े संचालन में हैं और यहां पर 94 हाथ रिक्शा वालों को लाइसेंस मिला हुआ है।  मतलब बिना लाइसेंस के यहां घोड़े या  रिक्शा नहीं चल सकते।


कोलकाता के बाद माथेरन वह दूसरा शहर है जहां आदमी रिक्शा लेकर दौड़ता है। हालांकि माथेरन का रिक्शा कोलकाता के रिक्शा की तुलना में छोटे और हल्के होते हैं। ये रंग-बिरंगे भी हैं . जो सैलानी पैदल यात्रा करने में असमर्थ हैं वे चाहें तो इन हाथ रिक्शा पर सफर करते हैं।   


वैसे माथेरन में हाथ रिक्शा का कोई तय किराया नहीं है। आप अपनी यात्रा के घंटे और यात्रा मार्ग के हिसाब से किराया तय कर सकते हैं। 
श्रमिक रिक्शा संगठन माथेरन ने यहां रिक्शा हटाकर बैटरी रिक्शा (ई रिक्शा ) लाने की मांग की थी। पर इसमें कई तरह की तकनीकी दिक्कते हैं। 


साल 1959 में एक नोटिफिकेशन के तहत माथेरन में किसी भी तरह के डीजल पेट्रोल वाहनों पर प्रतिबंध लगाया गया। उसके बाद वहां सिर्फ हाथ रिक्शा और घोड़े ही चलते हैं। दरअसल माथेरन हिल स्टेशन पर पक्की सड़कें भी नहीं है। इसलिए इस इको फ्रेंडली जोन में वाहन चलाया ही नहीं जा सकता। 

पैदल चलना बेहतर विकल्प -  ऊंचे नीचे रास्तों के कारण ई रिक्शा या तीन पहिया साइकिल रिक्शा भी नहीं चल सकते। तो सिर्फ हाथ से खींचने वाला रिक्शा ही विकल्प में बचता है।   पर हमने माथेरन में पैदल ट्रैक करना तय किया। यहां सुनने में आया कि एक विदेशी सैलानी लड़की कुछ दिन पहले घोड़े से गिर गई और उसका प्राणांत हो गया। अब प्रकृति के नजारे लेने हैं तो पैदल चलने से बेहतर क्या हो सकता है।

-        विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyutp@gmail.com (MATHERAN, HAND PULLED RICHSHAW, MAHARASTRA, NERAL )


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