Saturday, April 11, 2015

बेटे ने मां की याद में बनवाया मकबरा

औरंगाबाद शहर की पहचान है बीबी का मकबरा। यह देखने में बिल्कुल आगरा के ताजमहल जैसा ही लगता है। वैसा ही यहां भी चारबाग बनाया गया है। पर यह कई मायने में ताज से काफी अलग भी है। ताज जहां पति की अपने पत्नी के प्रति प्रेम की निशानी है तो बीबी का मकबरा एक बेटे ने अपनी मां की याद में बनवाया था। एक रिश्ता और है  ताज महल से , दोनों ही मुगलिया सल्तनत  की निशानी हैं।  इसे दक्कन का ताज भी कहा जाता है।

धोखा मत खाना, ये ताजमहल नहीं है.....


रबिया उल दुरानी  की कब्र-    बीबी का मकबरा  मुगल सम्राट औरंगजेब ( शासन काल - 1658-1707 ईसवी ) की पत्‍नी रबिया-उल-दुरानी उर्फ दिलरास बानो बेगम की याद में बना है। औरगंजेब  ने  1637 में  दिलरास  बानो से विवाह किया था। ये एक अति सुंदर मकबरा है।  यहां पर रबिया उल दुरानी के मानवीय अवशेष भूतल के नीचे रखे गए हैं। उनका मकबरा अत्‍यंत सुंदर डिजाइनों वाले एक अष्‍टकोणीय संगमरमर के आवरण से घिरा हुआ है। यहां तक सीढियां उतर कर जाया जा सकता है। आमतौर पर मकबरे में आने वाले दर्शक चारों तरफ बने घेरे से नीच झुक कर मकबरे को देखते हैं।

























ताज के नकल की पूरी कोशिश - बीबी   के    मकबरा का   निर्माण मुगल बादशाह औरंगजेब के शहजादे आजमशाह ने सत्रहवीं शताब्दी के अंत में करवाया था। यह उसकी माता दिलरास बानो ( रबिया) औरंगजेब की बेगमों में से एक थी। राजकुमार आजम शाह ने अपनी मां बेगम राबिया की याद में इसे 1678 में बनवाया था।  कहीं कहीं इसके निर्माण का काल 1651 से 1661 के बीच का मिलता है। 


इसके निर्माण में दस साल का वक्त लगा था। यह संयोग की   उनके पति औरंगजेब की कब्र भी औरंगाबाद शहर के पास ही  स्थित है।   इस    मकबरे   के वास्‍तुकार    का   नाम अता उल्‍लाह था जिसने ताजमहल की नकल करने की पूरी कोशिश की थी लेकिन उसे उतनी सफलता नहीं मिली।   यहां पहुंचकर दिखाई देता है कि  यहां हरियाली कुछ ज्यादा ही है। चार बाग में आम के असंख्य पेड़ हैं जिन पर टिकोले झूम रहे हैं। 

यह मकबरा एक विशाल अहाते के केंद्र में बना है। बाग की लंबाई चौड़ाई उत्तर-दक्षिण में 458 मीटर और पूर्व-पश्‍चिम में 275 मीटर है। बरादरियाँ या स्तंभयुक्त मंडप,  अहाते की दीवार के उत्‍तर,  पूर्व और पश्‍चिमी भाग के केंद्र में अवस्थित हैं।  मुख्य संरचना के पश्चिम में एक मस्जिद भी है, जो हैदराबाद  के निजाम ने बाद में बनवाई थी, जिसके कारण इस तरफ का प्रवेश मार्ग बंद हो गया है। पर मकबरे चार बाग की हालत भी दयनीय है। पानी के अभाव में फूल मुरझा रहे हैं। आम के पेड़ बहुतायत हैं पर उनकी सिंचाई के लिए पानी दूर से लाना पड़ता है।

औरंगाबाद स्थित बीबी का मकबरा स्थित चार बाग का एक नजारा। 
कैसे पहुंचे – औरंगाबाद रेलवे स्टेशन से 6 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है बीबी का मकबरा। यह शहर  की सीमा के अंदर ही  है। आटो रिक्शा से यहां पहुंचा जा सकता है। शहर में सिटी बसें नहीं चलती हैं। मकबरे का संरक्षण भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण करता है। प्रवेश टिकट पांच रुपये है। मकबरा सुबह से शाम तक खुला रहता है।
- विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyutp@gmail.com

 
औरंगाबाद स्थित बीबी का मकबरा।
(AURANGABAD CITY, MARATHWADA, BIBI KA MAKBARA, SECOND TAJ  ) 

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