Wednesday, April 1, 2015

जुझार सिंह पन्नू के साथ श्री हुजुर साहिब ( नांदेड़) की ओर



अमृतसर से नांदेड़ को जोड़ती है दैनिक चलने वाली 12716 सचखंड एक्सप्रेस। यह ट्रेन  सिख  पंथ के पांच तख्त में से दो  को जोड़ती है। बड़ी संख्या में हर रोज पंजाब के श्रद्धालु हजुर साहिब के लिए इस ट्रेन से सफर करते हैं। एक दिन दिल्ली से हम भी इस रेल के मुसाफिर बन गए नांदेड़ साहिब के लिए।  दिल्ली में  दोपहर में चलने  वाली इस ट्रेन के हम एस 9 कोच में हैं।   हमारा यह सफर करीब 27 घंटे  का होगा।  मतलब स्लिपर क्लास में यह लंबा सफर है।  तारीख है 27 और मार्च का महीना है तो दिल्ली से आगे बढ़ने पर गर्मी भी  ठीक -ठाक लग रही है।


भुसावल में सुबह का नास्ता - खम्मण- ढोकला 
नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से ट्रेन नियत समय पर खुली। 
   हमारे कोच में पटियाला के पास के रहने वाले पांच साल के जुझार सिंह पन्नू भी हैं जो अपने परिवार के साथ हुजुर साहिब जा रहे हैं। अनादि उनसे दोस्ती करना चाहते हैं। पर वे थोड़े संकोची हैं। जुझार सिंह बच्चे हैं पर नाम बड़ो जैसा भारी भरकम है। पगड़ी भी बड़ों जैसी ही है। रेलगाड़ी में ज्यादातर पंजाबी परिवार श्री हुजुर साहिब जा रहे हैं।  दिल्ली के बाद ट्रेन फरीदाबाद, मथुरा, आगरा, धौलपुर, मुरैना,  ग्वालियर, डबरा, झांसी,  ललितपुर, बीना  में रुकती हुई आगे बढ़ रही है। भोपाल, इटारसी, खंडवा रात को सोते हुए  गुजर गए।  अहले सुबह बुरहानपुर  भी गुजर गया।   यह मध्य प्रदेश का आखिरी रेलवे स्टेशन है।



अगली सुबह   भुसावल जंक्शन में ट्रेन महाराष्ट्र में प्रवेश कर जाती है। भुसावल में पांच मिनट का ठहराव है सचखंड एक्सप्रेस का। सुबह-सुबह भुसावल के प्लेटफार्म पर खाने पीने की बहार नजर आ रही है। इडली, डोसा, पकौड़े, बड़ा पाव, खम्मण, ढोकला  सब कुछ 20 रुपये की प्लेट। और भाई भुसावल है तो केले तो सस्ते होंगे ही यहां। पूरे देश में केला भुसावल से जाता है। हम अपना पसंदीदा नास्ता  ढोकला खरीदते हैं रेलवे प्लेटफार्म से।


महाराष्ट्र का सबसे बड़ा रेलवे जंक्शन   - भुसावल बड़ा रेलवे  स्टेशन है। यह सेंट्रल रेलवे का डिविजन है। मतलब यहां डीआरएम का दफ्तर है। यह महाराष्ट्र का सबसे बड़ा रेलवे जंक्शन  भी है। वैसे यह जलगांव जिले में आता है। वहीं भुसावल शहर की आबादी दो लाख के आसपास है। भुसावल के बाद जलगांव, पचोरा, चालीसगांव में हमारी  ट्रेन रुकती है। जलगांव भी केले का बड़ा उत्पादक क्षेत्र है। यहां से अजंता की गुफाएं भी काफी निकट हैं। 

और मनमाड जंक्शन पर लगा है लंगर। 
इसके बाद हम पहुंचे हैं मनमाड। मनमाड जंक्शन में सचखंड एक्सप्रेस 20 मिनट के लिए रुकती है। यहां इसका इंजन पीछे की ओर जाकर लगता है। यानी  मार्ग परिवर्तन होता है। सुबह सुबह का वक्त है। सचखंड एक्सप्रेस के प्लेटफार्म पर लंगर लगता है हर रोज। मनमाड के एक गुरुद्वारे की ओर से लंगर में दाल रोटी मिलती है। यह लंगर श्री हजुर साहिब की ओर जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए है। जिन्हें मालूम था वे कटोरी और ग्लास में दाल भर भर कर लाए। कुछ लोग श्रद्धा से लंगर के दान पात्र में रुपये भी देते जाते हैं।



मनमाड से चलने के बाद सचखंड एक्सप्रेस में कई तरह के सामान बेचने वाले   डिब्बे के अंदर आ गए हैं। कंघी, लाइटर और बच्चों के कई तरह के खिलौने लेकर पहुंचे हैं।  घूमंतु दुकानदारों के दर्शन ये भारतीय रेल में ही संभव है। लोग अपनी जरूरत की चीजें इनसे खरीदते हैं। एक सज्जन किताबें लेकर  भी आए हैं।  इनसे  अनादि के लिए एक कहानियों की किताब खरीदते हैं हम। इसी बीच एक महिला आती है, वह छोटी सी मशीन की सहायता से किसी का भी नेम प्लेट तैयार कर दे रही हैं। महज 30 रुपये में। तो अनादि अनत ने भी अपने  लिए एक नेम प्लेट बनवा ली है।  इसे अपने टी शर्ट पर लगाकर वे बड़े खुश हैं।  सचखंड एक्सप्रेस के साथ हमारा सफर जारी है।

- विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyutp@gmail.com
( SACHKHAND EXPRESS, NANDED, MAHARASTRA, SIKH TEMPLE ) 

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