Saturday, March 14, 2015

गुजरात मे ऐतिहासिक गोल्डेन ब्रिज से गुजरते हुए

 भरुच अंकलेश्वर के बीच नर्मदा नदी पर बना ऐतिहासिक गोल्डेन ब्रिज। 

अंकलेश्वर गुजरात का बड़ा औद्योगिक और प्रदूषित शहर है। यहां से हमें भरूच के लिए मारूति ओमनी मिली। जो शेयरिंग में 15 रुपये प्रति सवारी की दर से आगे बढ़ी। भरूच शहर से बाहर निकलने पर नर्मदा नदी दिखाई देने लगती है। थोड़ी देर बाद ही हम ऐतिहासिक गोल्डेन ब्रिज पर थे। ऐतिहासिक इसलिए कि 1881 में इस पुल के बनने से पहले गुजरात और मुंबई सड़क मार्ग से नहीं जुड़े थे। इसलिए गोल्डेन ब्रिज देश के प्रमुख पुलों में शुमार किया जाता है।

1881 का बना हुआ है पुल - नर्मदा नदी पर ये पुल 1881 का बना हुआ है। पर पुल बनाने की शुरुआत 1877 में हुई। इस पुल के बनने से पहले गुजरात का मुंबई से संपर्क सिर्फ नाव से ही संभव था। ब्रिटिश सरकार ने व्यापार और प्रशासन के बेहतर पहुंच के लिए नर्मदा नदी पर एक पुल की जरूरत महसूस की। तब इसके निर्माण की योजना बनी। यह शानदार लोहे का पुल है। पर इसके लोहे को सुनहले रंग से रंग दिया गया है और अब यह गोल्डेन ब्रिज कहलाता है। 

ये पुल 16 मई 1881 को बनकर तैयार हो गया। यानी निर्माण में लगे कुल चार साल। तब इस पुल के निर्माण में 45.65 लाख की लागात आई थी। पुल की कुल लंबाई 1412 मीटर है। यानी लगभग डेढ़ किलोमीटर। यह लोेहे का पुल है। तकनीकी लिहाज से यह थ्रो ट्रस ब्रिज का उदाहरण है। पहले इसे नर्मदा ब्रिज के नाम से जाना जाता था। बाद में गोल्डेन ब्रिज के ठीक बगल में रेलवे का पुल भी बना। तो जब आप अंकलेश्वर से भरुच रेल से गुजरेंगे तो खिड़की से गोल्डेन ब्रिज नजर आएगा। 
पहले की कोशिश असफल हुई थी - दरअसल नर्मदा नदी पर पुल बनाने की कोशिश 1861 से ही आरंभ हो गई थी। पर कई बार बाढ़ और नर्मदा में पानी के तेज बहाव के कारण इसके पिलर बह गए। तीन बार असफलता के बाद 1877 में जब इस पुल का काम शुरू हुआ तो उसमें सफलता मिल सकी। उस समय के लिहाज से इसके निर्माण में खर्च बहुत ज्यादा आया था। 


संकट में भी तन कर खड़ा है - गोल्डेन ब्रिज ने अपने सौ साल से ज्यादा के इतिहास में कई बार बाढ़, भूकंप जैसे संकट झेले हैं। पर आज भी सही सलामत है। साल 2013 में नर्मदा में भीषण बाढ़ आने पर इस पुल को पांच दिनों के लिए एहतियात के तौर पर बंद किया गया था। गोल्डेन ब्रिज अंकलेश्वर से भरुच के बीच लोगों के दैनिक परिवहन का प्रमुख साधन है। पुल पर आजकल भारी वाहनों की आवाजाही पर रोक है। पर कार-जीप और हल्के वाहन इस पुल से खूब गुजरते हैं। औसतन रोज 10 हजार वाहन इस पुल से गुजरते हैं। 

गोल्डेन ब्रिज की सुरक्षा के लिए इस पर वाहनों की गति 15 किलोमीटर प्रति घंटे रखी गई है। पहले नेशनल हाईवे नंबर आठ गोल्डेन ब्रिज से ही होकर गुजरता था। पर अब भरुच और अंकलेश्वर के बीच नर्मदा पर एक नया सड़क पुल बन गया है। यह पुल गोल्डेन ब्रिज से दूर है। तो भारी वाहन अब नए पुल से होकर गुजरते हैं।गोल्डेन ब्रिज पार करते ही भरूच शहर और रेलवे स्टेशन आ जाता है। यहां नर्मदा नदी के तट पर एक गुरुद्वारा भी दिखाई देता है। अब गोल्डेन ब्रिज के ठीक बगल में एक और नर्मदा मैय्या ब्रिज बनाने पर काम चल रहा है।
- विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyutp@gmail.com
(KOSAMBA TO VADODRA ON NH8, BHARUCH, HISTORIC GOLDEN BRIDGE, NARMADA RIVER ) 

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