Saturday, March 7, 2015

दमन - प्लास्टिक उद्योग का बड़ा केंद्र

आज दमन देश का बड़ा औद्योगिक केंद्र है। खास तौर पर यह दुनिया के मानचित्र में प्लास्टिक इंडस्ट्री के लिए जाना जाता है। देश के सभी जाने माने प्लास्टिक ब्रांड की उत्पादन इकाइयां दमन में स्थित हैं। दमन में छोटी बड़ी 3000 के करीब औद्योगिक इकाइयां हैं। नीलकमल, प्रिंस, नयासा, सेलो जैसे तमाम प्लास्टिक के लोकप्रिय ब्रांडों के उत्पाद दमन के बने हुए हो सकते हैं। यहां के निर्माता तमाम बड़ी कंपनियों के उत्पादों लगने वाले प्लास्टिक कंपोनेंट भी बनाते हैं। दमन दुनिया के कई देशों में प्लास्टिक उत्पादों की सप्लाई भी करता है।


पिछले कुछ दशक में दमन प्लास्टिक उद्योग में एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में उभरा है। आप जिस रूप में प्लास्टिक के उत्पाद देखते हैं। उनमें से हो सकता है 99 फीसदी दमन में बने हुए हों। पंखा, ट्यूबलाइट, एलईडी बल्ब आदि मे जहां भी प्लास्टिक है या फिर प्लास्टिक की बाल्टी, मग, डिब्बे, मर्तबान, वाहनों में इस्तेमाल किए जाने वाले हार्ड प्लास्टिक के उत्पादों का भी दमन में निर्माण होता है।

उद्योगों को कई तरह की छूट - दमन दीव में उद्योंगों के बड़े पैमाने पर फलने फूलने का कारण यहां कारोबारियों को दी जाने वाली छूट। लघु उद्योगों, मध्यम उद्योगों और बड़े उद्योगों को उत्पादन प्रारंभ करने की तिथि से 15 वर्षों की अवधि के लिए ब्रिकी कर के भुगतान से छूट दी गई है। दमन व दीव में यह सुविधा लघु उद्योगों को 15 वर्षों के लिए, मध्यम उद्योगों को 15 वर्षों और बड़े उद्योगों को 15 वर्षों के लिए उपलब्ध है। इन संघशासित क्षेत्रों में कोई चुंगीकर नहीं है। दमण व दीव में कानूनी दस्तावेजों जैसे पट्टा/बंधक करार आदि के कार्यान्वयन के लिए लघु उद्योगों को स्टांप शुल्क में 50 प्रतिशत की छूट उपलब्ध है।


आखिर क्या है प्लास्टिक -  तो ये प्लास्टिक क्या है। यह रासायनिक तौर पर एक पॉलीमर है। यह कई पदार्थों के मिश्रण से बनता है। इसको बनाने में नायलॉन, फिनोलिक, पॉलीसट्राइन, पौलीथाईलीन, पॉलीविनायल क्लोराइड, यूरिया फार्मेलडिहाइड जैसे पदार्थों का इस्तेमाल होता है। निश्चित तौर पर यह सेहत के लिए हानिकारक है।


फूड ग्रेड प्लास्टिक का ही इस्तेमाल करें -  अगर आप खाने पीने सामान में प्लास्टिक इस्तेमाल करते हैं तो रिसाइकिल उत्पाद की जगह वर्जिन प्लास्टिक को प्राथमिकता दें। पानी में न घुल पाने और बायोकेमिकली ऐक्टिव न होने की वजह से वर्जिन प्लास्टिक बेहद कम जहरीला होता है। खाने पीने में इस्तेमाल किए जाने वाले प्लास्टिक को फूड ग्रेड प्लास्टिक कहते हैं। इसने निर्माण में कई मानकों का ख्याल रखा जाता है। यह एफडीए ( फूड एंड ड्रग एसोसिएशन) से मान्यता प्राप्त होता है।

आबोहवा पर बुरा असर - पर तमाम तरह के दुष्प्रभावों के बीच प्लास्टिक हमारे जीवन का इस तरह हिस्सा बन गया है कि इससे दूरी बनाना अब इतना आसान नहीं रह गया है। घर से लेकर बाहर तक 24 घंटे कोई न कोई प्लास्टिक उत्पाद अब हमारे साथ रहता है। वहीं प्लास्टिक उद्योगों का बुरा असर आबोहवा पर तो पड़ता ही है। इसलिए इन सैकड़ों उद्योगों से दमन की आबोहवा भी खराब हो रही है। इसके बावजूद दमन में बड़ी संख्या में सैलानी आते हैं। दमन की संस्थाएं अब प्लास्टिक के इस्तेमाल को लेकर जागरूकता फैलाने में भी लगी हैं।

कुछ इस तरह जमा होता जाता है प्लास्टिक कचरा जो सैकड़ों साल तक सड़ता नहीं है...

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