Monday, March 16, 2015

ऐसा हो नास्ता - हरित ज्वार की चाट या भेलपुरी

बड़ौदा रेलवे स्टेशन के बाहर से गुजरते हुए हल्की सी भूख लगी थी। देखा एक महिला भेलपुरी बेच रही है। ज्वार की भेलपुरी। हरे रंग का ज्वार। भला उसकी भेलपुरी कैसी लगती होगी। मैंने ज्वार के पोषक तत्वों के बारे में भी काफी सुना है। पर हरा ज्वार और उसकी भेलपुरी खाने का कैसा अनुभव हो सकता है। मैंने कहा 10 रुपये की बना दो। अम्मा ने फटाफट बनाकर पेश कर दिया। यकीन मानिए खाकर दिल खुश हो हो गया। नींबू, नमक, काली मिर्च, टमाटर, कटे आम के टुकड़े। हरा ज्वार खाने में अच्छा लगता है। न मीठा न खट्टा। पर फिर भी इसका एक स्वाद है।

भारतीय व्यंजन में ज्वार का बहुत पहले से महत्व है। अलग-अलग तरह से और नए-नए स्वाद से खाने का जायका बदला जा सकता है। इसमें एक है ज्वार का चाट। इसे बनाना आसान है। यह सुपाच्यसरलसस्ता और सुंदर है। कच्चे सलाद जैसे ककड़ीगाजरकच्ची कैरीभुट्टे के दाने से इसे और भी पौष्टिक बनाया जा सकता है। बच्चे चाट के नाम से इसे शौक से खाते हैं।

तो ऐसे बनती है ज्वार की चाट -  तो आइए जानते हैं कैसे बनती है ज्वार की चाट या भेलपुरी। तो तैयार हो जाइए। सबसे पहले लें एक कप ज्वार।  बारीक कटा प्याज, हरी चटनी, बारीक कटी हरी मिर्च, बारीक कटा टमाटर, इमली की चटनी, नींबू का रस, बारीक कटा आम, हरा धनिया, सेव,  भुना हुआ जीरा पाउडर, चाट मसाला। ज्वार पचने में हल्की और पौष्टिक होती है। और यह सबसे सस्ता धान्य है। सेहत के लिए उत्तम है।

अफ्रीका से आया भारत में -  ज्वार का इतिहास तकरीबन आठ हजार साल पुराना है। इसकी मूल देश उत्तरी अफ्रीका है। पर अब भारत के कई राज्यों में ज्वार की खेती होती है। हमारे गांव में भी बचपन में ज्वार की खेती होती थी। पर हमारे भोजपुरी क्षेत्र में इसे जोनहरी या जनेरा कहते हैं। वहां हम इसे जानवरों के चारे के लिए लगाते थे। पर यह एक पौष्टिक फसल है। महाराष्ट्र में ज्वार की रोटी को भाकरी कहते हैं। ज्वार भारत में कोई चार हजार साल पहले लाया गया। ज्वार दुनिया में पांचवें नंबर पर उगाया जाने वाला खाद्यान है। ये करीब तीस देशों के 50 करोड़ से ज्यादा लोगों का भोजन है।

भारत में ज्वार, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, गुजरात, राजस्थान, उत्तर प्रदेश आदि में बड़े पैमाने पर लगाया जाता है। कई जगह खरीफ फसल के तौर पर इसकी खेती जानवरों के चारे के लिए होती है।  

ज्वार के फायदे - इसके कई औषधीय गुण हैं। ज्वार कफ और पित्त को शांत करता है। यह शरीर में वात को बढ़ाता है। शरीर को बल भी प्रदान करता है। थकान दूर करता है। वीर्य बढ़ाता है। यह जलन, मोटापा, गैस, घाव, बवासीर और रक्तपित्त को नष्ट करने में सक्षम है। इसके फल पौष्टिक, पाचक, खून साफ करने वाले तथा कफ को निकालने वाले होते हैं। बाजरा सर्दियों में खाने के लिए मुफीद रहता है तो ज्वार का सेवन आप गर्मियों में कर सकते हैं। 
- विद्युत प्रकाश मौर्य -vidyutp@gmail.com
( JOWAR, SORGHUM, GUJRAT , VADODRA ) 

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