Friday, March 13, 2015

एनएच 8 पर सूरत से बड़ौदा वाया अंकलेश्वर-भरूच

कोसांबा जंक्शन से मुझे बड़ौदा जाना था। अभी तुंरत कोई रेलगाड़ी नहीं है। तो कुछ घंटे इंतजार करने के बजाए मैंने आगे की यात्रा सड़क मार्ग से यानी बस से करने की सोची। क्योंकि इस मार्ग पर मैं ट्रेन से तो कई बार आवाजाही कर चुका था। कोसांबा में लोगों ने बताया कि भरुच की तरफ जाने वाली गाड़ियां हाईवे से मिलेंगी। कोसांबा से आटो रिक्शा में बैठकर 5 किलोमीटर दूर बाइपास तक पहुंचा। पर बाइपास पर कोई बस स्टाप नहीं था। 

नेशनल हाईवे नंबर 8 अहमदाबाद से मुंबई के बीच छह लेन का बन चुका है। पर इस फोर लेन हाईवे पर कोई भी बस वाला हाथ देने पर भी रोक नहीं रहा था। फिर लोगों ने सलाह दी की ट्रक से भी आगे जाया जा सकता है। मेरे साथ दो और सहयात्री आ गए। हमें देख एक छोटा ट्रक ( टेंपो) रुका। हम उस खाली टेंपो में सवार हो गए। टेंपो में खड़े होकर एनएच आठ पर अंकलेश्वर की ओर सफर। हाईवे का विहंगम नजारा दिखाई दे रहा है। खड़े होकर सफर करते हुए हाईवे के दोनों तरफ विशाल ढाबे दिखाई दे रहे हैं जिसमें आवासीय होने की भी जानकारी है। सीएनजी गैस के पंप, पेट्रोल पंप की कतार है। दिन हो या रात हाईवे गुलजार रहता है वाहनों से।



कोसांबा से आगे बढ़ते ही नहर पार करने के बाद गुजरात गैस सीएनजी पंप के दूसरी तरफ महुवेज गांव में मुझे विशाल चाकलेट फैक्ट्र नजर आती है। इसमें सेल्स आउटलेट भी बना है। यह शमीन (schmitten) चाकलेट की फैक्ट्री है। स्विटजरलैंड का जाना माना चाकलेट ब्रांड जो अब गुजरात में भी बनने लगा है। भारत में प्रियंका चोपड़ा इसकी ब्रांड एंबेस्डर हैं। सूरत की राजहंस न्यूट्रामिंस ( देसाई- जैन समूह) इन चाकलेट्स का निर्माण करता है। हालांकि मैं चाकलेट लेने के लिए उतर नहीं सका। थोड़ी देर बाद अंकलेश्वर बाजार में टेंपो वाले ने हमें उतार दिया। उसने किराया लिया मात्र 10 रुपये,  यानी बस से कम। यहां से मारूति ओमनी में बैठकर मैं भरुच पहुंच गया हूं। भरूच में एक दुकान पर ढोकला खाया। हां ढोकला सफेद रंग वाला। पीले रंग वाला तो खम्मण होता है। 
भरुच बाइपास का बस स्टैंड। 

अहमद पटेल तीन बार सांसद रहे भरुच से - भरुच शहर और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों के विकास में कांग्रेस नेता अहमद पटेल के बहुत बड़ा योगदान है। अहमद पटेल भरुच से तीन बार लोकसभा का चुनाव जीत चुके हैं। यहां से पहला चुनाव उन्होंने 1977 में जनता लहर के दौरान कांग्रेस उम्मीदवार के तौर पर जीता था। भरुच में चीनी मिलें, उद्योग और रेलवे के विकास के लिए यहां के लोग पटेल को याद करते हैं।
गुजरात का भरूच रेलवे स्टेशन 

भरूच से बड़ौदा का सफर भी मैंने सडक मार्ग से करने की सोची। शहर से फिर बाईपास आटो में बैठकर आया। बाईपास में बस स्टैंड भी है और मारूति वैन वाले भी बड़ौदा की तरफ जाते हैं। वैन वाले 60 रुपये लिए और सवारी पूरी होने पर चल पड़ा एनएच 8 पर बड़ौदा की ओर। रास्ते में करजन, आलमगीर जैसे पड़ाव आते हैं। बड़ौदा शहर के बाहर से एनएच 8 गुजर जाता है। मैं टैक्सी से अजवा बाइपास पर उतर जाता हूं। अजवा से बड़ौदा जंक्शल के लिए आटो रिक्शा। गुजरात के खूबसूसरत और सांस्कृतिक शहर बड़ौदा या वडोदरा की बातें अगली कड़ी में...
- विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyutp@gmail.com
(KOSHAMBA TO VADODRA ON NH8, ANKLESHWAR, BHARUCH, GUJRAT ) 

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