Wednesday, February 25, 2015

कभी नैरो गेज का मक्का था डभोई जंक्शन

गुजरात में नैरो गेज नेटववर्क के विकास के क्रम में बडौदा जिले का शहर डभोई नैरो गेज रेलवे का प्रमुख जंक्शन बन गया। वास्तव में डभोई को नैरो गेज का मक्का कहें तो कुछ गलत नहीं होगा। हालांकि 2018 में डभोई जंक्शन से नैरोगेज की सारी लाइने उखाड़ी जा चुकी थीं। डभोई को जोड़ने वाली तमाम नैरोगेज लाइनें ब्राडगेज में बदली जा रही थीं। पर डभोई रेलवे स्टेशन पर एक नैरोगेज हेरिटेज पार्क का निर्माण किया गया है। हालांकि इस हेरिटेज पार्क में कुछ सामग्री नहीं रखी गई है। 

साल 2018 के जनवरी महीने की एक सुबह जब मैं डभोई जंक्शन पर पहुंचा तो यहां से नैरोगेज की पटरियों को तेजी से उखाड़े जाने का काम जारी था। हालांकि समय सारणी में अब नैरोगेज रेलों का समय लिखा हुआ था। पर रेलगाड़ियों का संचालन ठप्प हो चुका था। अब इसी मार्ग से केवड़िया तक के लिए बड़ी लाइन बिछाने का काम जारी था।

महाराजा गायकवाड के राज्य में डभोई गुजरात का प्रमुख व्यापारिक शहर था। इस शहर से मियागाम करजन के बीच सन 1862 में ही 2 फीट 6 इंच चौड़ाई वाले नैरो गेज रेलवे लाइन की शुरुआत कर महाराजा ने इसे विश्व मानचित्र पर ला दिया। यह देश का पहला नैरोगेज नेटवर्क था। वास्तव में महाराजा ने 1860 में ही डभोई और बड़ौदा के नैरो गेज लाइन से जोड़ने के बारे में सर्वे शुरू करा दिया था। दो साल बाद 32 किलोमीटर के इस मार्ग का निर्माण किया गया। आठ अप्रैल 1873 को इस नेटवर्क पर लोकोमोटिव से संचालित रेलगाड़ियों का परिचालन होने लगा।


डभोई से मोटी कोराल वाया मियागाम करजन

नैरो गेज के मक्का कहे जाने वाले डभोई से मियागाम होकर मोटी कोराल तक नैरो गेज नेटवर्क 2014 तक संचालन में था। डभोई नेशनल हाईवे नंबर 8 पर स्थित वडोदरा जिले का छोटा सा व्यापारिक शहर है। वडोदरा से डभोई की दूरी 32 किलोमीटर है।




डभोई में ऐतिहासिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण एक मन्दिर के प्राचीन अवशेष भी प्राप्त हुए हैं। डभोई वडोदरा जिले का एक कस्बा है, जिसे पहले दर्भावती नाम से जाना जाता था। इस प्रचीन शहर का गिरनार के जैन धर्मग्रथों में बहुत महत्व है। डभोई का किला हिंदू सेना की वास्तु शिल्प का एक दुर्लभ उदाहरण है, जिसे आज भी देखा जा सकता है। छोटे से शानदार किले के कारण भी डभोई शहर को जाना जाता है।
डभोई रेलवे स्टेशन एक नैरो गेज स्टेशन के तौर पर 150 साल से ज्यादा समय तक अपनी पहचान बनाए रखा। पर  सारी लाइनों के ब्राडगेज में बदले जाने के बाद डभोई से यह पहचान छिन गई।
डभोई के आसपास मालसर- मियागाम करजन- डभोई- चंदोद नैरो गेज मार्ग की कुल लंबाई 90 किलोमीटर हुआ करती थी। मालसर नर्मदा नदी के किनारे एक छोटा सा शहर है। सुबह 6.10 में डभोई से चलने वाली 52046 पैसेंजर 12.15 बजे मोटी कोराल पहुंचती थी। इस मार्ग पर कुल 15 रेलवे स्टेशन हुआ करते थे। 
वहीं डभोई से दूसरा नैरो गेज रेलमार्ग चंदोद तक जाता था। मियागाम करजन बड़ौदा मुंबई मुख्यमार्ग पर ब्राडगेज का रेलवे स्टेशन है। मियागाम करजन से डभोई की दूरी 32 किलोमीटर है। वहीं डभोई से चंदोद की दूरी 19 किलोमीटर है।
साल 1880 में 1 जुलाई को डभोई से गोया गेट (प्रताप नगर, वडोदरा) तक 32 किलोमीटर की नैरोगेज लाइन तैयार हो गई थी। अब यह लाइन ब्राडगेज में बदल चुकी है। अब वडोदरा से डभोई होते हुए छोटा उदयपुर तक आप ब्राडगेज रेलवे लाइन से जा सकते हैं। 2 अक्तूबर 2008 को प्रताप नगर डभोई नैरोगेज रेल मार्ग को ब्राडगेज मेंबदल दिया गया और इस पर बड़ी लाइन की ट्रेनों का संचालन होने लगा। इसके बाद डभोई अगले कुछ साल तक नैरोगेज और ब्राडगेज दोनों तरह की लाइनों का स्टेशन बना रहा। 

डभोई से जुड़े नैरो गेज नेटवर्क

डभोई से चांदोद - 19 किलोमीटर
डभोई से मियागाम करजन – 32 किलोमीटर
मियागाम करजन से मालसर – 38 किलोमीटर

- विद्युत प्रकाश मौर्य- vidyutp@gmail.com

( GUJRAT NARROW GAUGE, DABHOI   1)