Tuesday, January 13, 2015

सोन नदी का सुनहला पानी, सुनहला बालू

अमरकंट - सोनमुडा की वादियां।

मेरा बचपन सोन नदी के पानी में   अटखेलियां करते हुए गुजरा है। दरअसल सोन से निकली नहर मेरे गांव से होकर गुजरती है।   सोन नदी का पानी सुनहले रंग का होता है और उसका बालू भी सुनहले रंग का होता है। सोन का उदगम मध्य प्रदेश के अमरकंटक से हुआ है पर वह सबसे ज्यादा बिहार और झारखंड प्रदेश के खेतों को सींचित करती है। पटना से ठीक पहले सोन गंगा नदी में जाकर मिल जाती है। सोन नदी की कुल लंबाई 784 किलोमीटर है।


रोहतास जिले के शहर डेहरी का पूरा नाम डेहरी ओन सोन है क्योंकि वह सोन नदी के किनारे है। मध्य प्रदेश का सीधी जिला भी सोन की जद में है। वहीं उत्तर प्रदेश में एक जिले का नाम ही रखा गया है सोनभद्र। बिहार में सोन नदी भोजपुरी और मगही भाषा के बीच सांस्कृतिक विभाजन भी करती है। सोन के पश्चिम तट के लोग भोजपुरी बोलते हैं तो पूरब के लोग मगही।

सोनमुडा जाने का रास्ता। 


डेहरी ओन सोन में सोन पर रेल और सड़क पुल बना है तो पटना आरा के बीच कोईलवर में सोन पर ऐतिहासिक रेल सह सड़क पुल है। सोन पर अब्दुल बारी सेतु का निर्माण 1861 में हुआ था। 2008 में सोन नदी पर अरवल और सहार के बीच एक सड़क पुल का निर्माण हुआ। बिहार मे सिंचाई के लिए सोन पर 1874 में बांध बना कर नहरें निकाली गईं। वहीं 1968 में यहां से 8 किलोमीटर आगे इंद्रपुरी बैराज का निर्माण कराया गया। सोन नदी भोजपुर रोहतास जिले की जीवनधारा है। सोन के जल से शाहाबादगया और पटना जिलों के लगभग सात लाख एकड़ भूमि की सिंचाई होती है। 

अमरकंटक में है सोन नदी का उदगम स्थल - 

अमरकंटक में सोन नदी की धारा। 

मैं बचपन से अपने गांव में सोन नदी से आते हुए नहर को देखता आया हूं। इस नहर के पानी से ही हमारे खेत लहलहाते हैं। सोन नहर में पानी न आए तो हमारे खेत बंजर रह जाएं। सोन का पानी ही है जो हमारी मिट्टी से सोना उगाता  है। तो भला मैं अमरकंट पहुंचा था तो सोन के उदगम स्थल को देखे बिना कैसे लौट आता । तो 11 जनवरी की सुबह मैंने स्थानीय लोगों से जानकारी ली। नर्मदा कुंड से सोनमुडा ( सोन के उदगम स्थल) की दूरी डेढ किलोमीटर है।  नर्मदा नदी यहां से पश्चिम की तरफ तो सोन नदी पूर्व दिशा में बहती है।

 

बर्फानी आश्रम में रुकने से पहले हमारे टैक्सी वाले ने अगले दिन अमरकंटक के सभी दर्शनीय स्थलों को घूमाने के लिए कहा था पर वह सुबह 10 बजे से पहले जाने को तैयार नहीं था। इसलिए मैंने सुबह-सुबह ही पदयात्रा करने की ठानी। वैसे भी मैं हर शहर में सुबह सुबह घूमना पसंद करता हूं। मुझे उस सोन नदी का उदगम देखने जाना था जिसके पानी के साथ मैंने बचपन में खूब अटखेलियां जो की थीं... नर्मदा कुंड से सोनमुडा का रास्ता जंगलों से होकर जाता है। पक्की सड़क बनी है। यह रास्ता अत्यंत ही मनोरम है। 

अमरकंटक - सोनमुडा की सुबह। 

अदभुत है सोनमुडा में सूर्योदय देखना -    सोनमुडा जाकर पता चला कि यहां बड़ी संख्या में लोग सूर्योदय देखने आते हैं। यानी सोनमुडा सन राइज प्वांट है। वहां कई गाड़ियां पहले से ही पहुंची हुई थीं। लोग पहुंचे हुए थे। सोनमुडा में बडी संख्या में बंदर हैं, काले मुंह वाले। इनके लिए अगर आप चना लेकर नहीं जाएंगे तो वे आपके ऊपर हमला कर सकते हैं। 


सावधानी से चलते हुए मैं सनराइज प्वाइंट पर पहुंचा। यहां सोन की जल धारा जल प्रपात के तौर पर कई सौ मीटर नीचे घाटी में गिरती हुई दिखाई देती है। नजारा अत्यंत मनोरम है। जल प्रपात से पहले सोन और भद्र की धाराएं मिलती हैं। इसलिए सोन का पूरा नाम सोनभद्र है। सोनमुडा में एक मंदिर भी है। यहां अमरंकटक की घाटियों से मिलने वाली जड़ी बूटियों की का केंद्र भी है। इन जड़ी बूटियों से कई तरह की बीमारियों का उपचार होता है। 





चाय वाले भी पत्रकार भी-   सोनमुड़ा में कैंटीन चलाने वाले गजानन गर्ग से मेरी मुलाकात होती है। वे बड़े ही दिलचस्प आदमी हैं। गजानन बताते हैं कि उनके पुरखे यूपी के उन्नाव से आए थे अमरकंटक। तीन पीढ़ी पहले। वे आए तो थे पंडिताई करने। पर अब पंडिताई में इतना लाभ नहीं हो रहा है। इसलिए मैंने ये चाय की यह कैंटीन खोल ली है। 





गजानन जी चाय बेचने के साथ ही पत्रकारिता भी करते हैं। वे अपना प्रेस कार्ड दिखाते हैं। पत्रकारिता के साथ चाय की कैंटीन को वे बड़े सम्मान से लेते हैं। अब तो उनका गर्व और बढ़ गया है क्योंकि एक चायवाला देश का प्रधानमंत्री बन चुका है। जब मैंने उनसे कहा कि आपकी एक फोटो खींच लूं तो उन्होंने गर्व से कहां हां जरूर लिजिए। 


सीधी जिले में सोन के किनारे मकर संक्रांति का मेला। 

अब एक बार फिर बात सोन नदी की। यह यमुना के बाद दक्षिण से आकर मिलने वाली  नदियों में सबसे बड़ी है। इसका नाम सोनभद्र भी है। इसका एक अन्य नाम हिरण्यवाह भी मिलता है। कहा जाता है कि सोन नदी का बालू पीले यानी सोने के रंग का होता है इसलिए इसका नाम सोन पड़ा। 

छतीसगढ़ की   कन्हर, रिहंद, बनास, गोपद, बीजल, सोप जैसी  नदियां सोन में आगे आकर मिल जाती हैं। सोन अमरकंटक से निकलने के बाद मध्य प्रदेश के सीधी जिले से होकर गुजरती है। 

सीधी जिले के चुरहट शहर से 14 किलोमीटर की दूरी पर सोन नदी का तट है। यहां पर हर साल मकर संक्रांति के मौके पर बड़ा मेला लगता है।   मध्य प्रदेश के सीधी जिले के लाखों श्रद्धालु सोन नदी मे डुबकी लगा कर मकर संक्रांति पर्व का फल प्राप्त करते हैं। जिले के रामपुर नैकिन थाना के शिकारगंज के भंवरसेन घाटखैरा घाटमहेशन घाट,  भितरीकोल्दह, चुरहटगऊघाटपिपरोहर पर नदी तट पर मेले का आयोजन होता है।

 -विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyutp@gmail.com 

 784    किलोमीटर है सोन नदी की कुल लंबाई

05 राज्यों के लोग लाभान्वित होते हैं सोन नदी के पानी से 


( ( AMARKANTAK, SON RIVER, SONMUDA, SUNRISE POINT. SIDHI DISTRICT ) 

2 comments: