Tuesday, December 2, 2014

आबाद कर दो मेरे दिल की दुनिया... सलीम चिश्ती

फतेहपुर सीकरी के महल का बुलंद दरवाजा। 
साल 2008 में आगरा के साथ फतेहपुर सीकरी भी जाना हुआ था। पर इससे पहले 1991 में फतेहपुर सीकरी जाने का मौका पहली बार मिला था। तब सांप्रदायिक सौहार्द शिविर अलीगढ़ के दौरान एक दिन का आगरा, फतेहपुर सीकरी का दौरा करने का मौका मिला था। फतेहपुर सीकरी का किला जिसका बुलंद दरवाजा अहम हिस्सा है यूनेस्को के विश्व विरासत की सूची में शुमार है।


176 फीट ऊंचे बुलंद दरवाजे से छलांग
बुलंद मतलब महान या ऊंचा, फतेहपुर सीकरी के बुलंद दरवाजे का निर्माण अकबर ने 1575 में करवाया था। सम्राट अकबर की 1572 में गुजरात विजय की सफलता का जश्न मनाने के लिए इसका निर्माण कराया था। यह विशाल प्रवेश द्वार फारसी और मुगल वास्तुकला का एक अच्छा मिश्रण है। बुलंद दरवाज़े की ऊंचाई 54 मीटर या 176 फीट हैबुलंद दरवाजा पूरा बनाने में पांच साल लग गए थे दरवाजे के ठीक बगल में एक विशाल पानी की हौज है। नब्बे के दशक में एक बुजुर्ग बाबा हुआ करते थे जो बुलंद दरवाजे के ऊंचाई पर चढ़कर हौज में छलांग लगा देते थे। दूरदर्शन के लोकप्रिय कार्यक्रम में उन्हें ऐसा करते हुए दिखाया गया था। साल 1991 के फतेहपुर सीकरी दौरे में हमारी उनसे मुलाकात हुई थी। दोबारा जाने पर पता चला कि उनका इंतकाल हो गया। 

सलीम चिश्ती की समाधि - महान सूफी संत हज़रत सलीम चिश्ती रहमतुल्लाह अलैह  समाधि आगरा शहर से 35 किलोमीटर दूर फतेहपुर सीकरी में स्थित है। 1580-81 में बना ये मजार मुगल वास्तु कला का सुंदर नमूना है। यहां नि:संतान महिलाएं दुआ मांगने आती हैं। मन्नत मांगने वाले यहां के धागा बांधते हैं। मन्नत पूरी हो जाने का बाद लोग धागा खोलने भी आते हैं। उनकी मजार ज़नाना रौजा के निकट, दक्षिण में बुलन्द दरवाजे़ की ओर मुख किए हुए जामी मस्जिद की भीतर स्थित है। शेख सलीम चिश्ती एक सूफी संत थे।  वे अजमेर के ख्वाज़ा मुईनुद्दीन् चिश्ती के पौत्र थे।

अकबर को अपनी तीन बेगमो से भी कोई औलाद न हुई। एक दिन उन्हें सपना आया कि ख्वाजा की दरगाह पर मन्नत मांगने से औलाद होगी। तो वह स्वप्न में आए निर्देश के मुताबिक चल पड़े। कहते है बादशाह अकबर संतान प्राप्ति के लिए मन्नत मांगने अजमेर के ख्वाजा  मोईनुद्दीन चिश्ती के दरगाह के लिए पैदल ही निकल पड़ा था। रास्ते में ही सीकरी पड़ता था। वहां एक सूफी फ़कीर शेख सलीम चिश्ती से मुलाकात हुई।


फकीर ने अकबर को आशीर्वाद दिया तेरी मुराद पूरी होगी। कुछ समय पश्चात् अकबर की हिन्दू बेगम जोधाबाई गर्भवती भी हो गई। कहा जाता है कि अकबर ने जोधाबाई को डिलिवरी के लिए मायके  भेजने के बदले सीकरी के सलीम चिश्ती के पास ही भिजवा दिया। साल 1569 में वहीं एक पुत्र का जन्म हुआ।

सलीम चिश्ती को इज्जत बख्शने के लिए बालक का नाम सलीम ही रख दिया गया जो बाद में जाकर जहांगीर कहलाया। अकबर ने निश्चय कर लिया था कि जहां बालक पैदा हुआ वहां एक सुन्दर शहर बसाएंगे जिसका नाम था फ़तेहबाद जिसे आज हम फतेहपुर सीकरी के नाम से जान रहे हैं। मुगल शासनकाल का यह प्रथम योजनाबद्ध तरीके से बसाया गया एक वैभवशाली नगर था। फतेहपुर सीकरी 1571 से 1585 तक अकबर की राजधानी रहा। पर बाद में राजधानी आगरा शिफ्ट कर दी गई। पानी की की कमी राजधानी परिवर्तन का बड़ा कारण था।
फतेहपुर सीकरी में सलीम चिश्ती की दरगाह। 

देश विदेश से बड़ी संख्या में लोग इस महान सूफी संत की दरगाह पर जियारत के लिए आते हैं। पांच दिसंबर 2010 को फ्रांस के राष्ट्रपति निकोला सार्कोजी और उनकी पत्नी कार्ला ब्रूनी फतेहपुर सीकरी पहुंचे, जो शहंशाह अकबर की राजधानी रह चुकी है। 
फ्रांस के राष्ट्रपति सार्कोजी और कार्ला ब्रूनी ने शेख सलीम बिन चिश्ती की दरगाह पर जियारत की। तो कैटरीना कैफ अपनी फिल्म के लिए मन्नत मांगने पहुंची।

राजकुमार की एक पुरानी हिंदी फिल्म लाल पत्थर को याद करें। उस फिल्म के बड़े हिस्से की शूटिंग इसी फतेहपुर सीकरी के महलों में हुई है। सलीम चिश्ती की दरगाह पर हर साल उर्स मनाया जाता है। यहां सूफी संत की शान में कव्वाली गाई जाती है...
थामो मेरा हाथ मौला सलीम चिश्ती, आका सलीम चिश्ती 
आबाद कर दो मेरे दिल की दुनिया... सलीम चिश्ती ....

कैसे पहुंचे - आगरा से फतेहपुर सीकरी की दूरी 35 किलोमीटर है। आगरा से बस या रेल से पहुंचा जा सकता है। अगर आप पैकेज टूर बुक करते हैं तो आगरा, मथुरा, घुमाने वाली टैक्सी फतेहपुर सीकरी भी घुमाती है। आप राजस्थान के भरतपुर और बयाना जंक्शन से भी आसानी से फतेहपुर सीकरी पहुंच सकते हैं।   
-    विद्युत प्रकाश मौर्य

( IT IS A WORLD HERITAGE SITE LISTED IN 1986  )