Sunday, April 28, 2013

हरे हरे सहजन में इतने सारे गुण

सहजन या मुनगा ऐसी वनस्पति है जो जड़ से लेकर पत्ती और फूल तक इंसान के काम आती है। यथा बंगाल में 'सजिना', महाराष्ट्र में 'शेगटा', तेलगु में 'मुनग', और हिंदी पट्टी में 'सहजनके अलावा 'सैजन 'मुनगकहा जाता है। दक्षिण भारत के प्रायः हर भोजन में सहजन की मौजूदगी अनिवार्य मानी जाती है। दक्षिण में हर घर में इसे सांबर में जरूर डाला जाता है। 

सहजन यानी DRUMSTICK TREE  का वानस्पतिक नाम मोरिंगा ओलिफेरा ( Moringa Oleifera)  है।  एक एक बहुत उपयोगी पेड़ है। इसे हिन्दी में सहजनासुजनासेंजन और मुनगा आदि नामों से भी जाना जाता है। हम इसके महत्व को नहीं जानते हैं. यह फ़ूड नहीं सुपर फ़ूड है।

आयुर्वेद में 300 रोगों का सहजन से उपचार बताया गया है। इसकी फलीहरी पत्तियों व सूखी पत्तियों में कार्बोहाइड्रेटप्रोटीनकैल्शियमपोटेशियमआयरनमैग्नीशियमविटामिन-एसी और बी कॉम्पलैक्स प्रचुर मात्रा में पाया जाता है।



इस पेड़ के विभिन्न भाग अनेकानेक पोषक तत्वों से भरपूर पाये गये हैं सहजन के पेड़ के लगभग सभी भागों में औषधीय गुण पाया जाता हैं। यह औषधीय गुण कई बीमारियों के उपचार में विशेष रूप से फायदेमंद होते हैं। सहजन के पत्तेछालफूलफल सभी उपयोगी हैं। यह जहां सर्दी में गरमी का अहसास देता हैवहीं भोजन में पाचन में भी मदद करता है।

त्वचा की कई समस्याओं का इलाज सहजन में छिपा है। इनमें कई तरह के हारमोन्स और प्राकृतिक तत्व होते हैंजो त्वचा की सेहत के लिए महत्वपूर्ण होते हैं। इसके फूलपत्तों की कई स्वास्थ्य संबंधी लाभ है। यह मानव शरीर के यौन शक्ति को बढ़ाने में प्रधान रूप से काम करता है। जो पुरूष लो लिबीडो (कम सेक्स की इच्छा) और इरेक्टाइल डिसफंक्शन (स्तंभन दोष)सेक्स में अरूचि जैसे मर्ज को दूर करता है। सहजन की छाल का पावडर रोज लेने से वीर्य की स्थिरता तथा पुरुषों में शीघ्रपतन की समस्या भी दूर होती है।

बनाएं अचार - सहजन के अचार का स्वाद भी अनूठा होता है। सहजन के अचार के लिए एकदम कच्ची और बिना बीज वाली नरम-नरम सहजन की फलियों का इस्तेमाल किया जाता है। सहजन का ये आचार खाने में बहुत स्वादिष्ट होता है। सहजन की फली जब एकदम नरम होती हैउनके अन्दर बीज नहीं बन पाते तब ऐसी ही एकदम कच्ची नरम मुलायम सहजन की फली से ही अचार बनता है। 
-        ---  विद्युत प्रकाश मौर्य  
 DRUMSTICK TREE, SUPER FOOD )