Sunday, November 9, 2014

श्रीनगर से दिल्ली वाया चंडीगढ़

वायुसेना के विमान एएन 32 में चंडीगढ़ की ओर- 12-09-2014
( जन्नत में जल प्रलय - 53 )
श्रीनगर के वायुसेना एयरपोर्ट से शाम सात बजे हमें वायुसेना के विमान एएन 32 में ले जाकर बिठाया गया। वायुसेना के एक कैप्टन इस विमान में बैठने वाले 64 लोगों को पंक्ति में लगाकर रनवे तक ले गए। रूस के बने एएन 32 विमानों की 100 से ज्यादा खेप हमारी वायुसेना के पास है। इन्हें 1976 के आसपास भारत सरकार ने रूस से खरीदा था। ये मल्टी यूटीलिटी विमान हैं। इससे यात्री और सामान दोनों ढोए जाते हैं। युद्ध के दौरान ये विमान बहुत काम आते हैं। विमान के अंदर दोनों तरफ लोगों के बैठने के लिए बेंच बना है। इस पर एक तरफ 32 लोग बैठ सकते हैं। लकड़ी के बेंच पर सीट बेल्ट भी लगा हुआ है। एएन 32 विमान में पीछे से प्रवेश करने का रास्ता है। किसी चिड़िया के चोंच की तरह इसका मुंह खुल जाता है और बंद हो जाता है। 

हम सबके बैठने के बाद कैप्टन ने विमान का मुंह पीछे से बंद कर दिया और अंदर की नीली लाइट जला दी। कैप्टन ने आकर हमें जानकारी दी इस विमान में कोई टायलेट नहीं है। अगर किसी को उड़ान के दौरान उल्टी आए तो कुछ पॉलीथीन यहां रखे हैं, उसमें ही उल्टी करें और उतरने के बाद उसे अपने साथ ही ले जाएं।

विमान ने सात बजकर 10 मिनट पर श्रीनगर के आसमान से उड़ान भरी। रनवे पर करीब दो किलोमीटर दौड़ लगाने के बाद हौले से विमान हवा में उपर उठ चला। हालांकि ये विमान कभी ज्यादा ऊंचाई पर नहीं गया, क्योंकि सारे रास्ते में कोई न कोई शहर रोशनी में नहाया हुआ दिखाई दे रहा था। एक घंटे बाद हमलोग ला कारबुजिए के शहर चंडीगढ़ के आसमान पर पहुंच चुके थे। चंडीगढ़ में रनवे पर उतरने के बाद वायुसेना की बस हमें बाहर लेकर आई। हमें वायुसेना के सरकुलेटिंग एरिया में रोका गया। यहां पर वायुसेना के अफसरों ने आपदा पीड़ितों के मदद के लिए हर इंतजाम कर रखा था। आने वालों को पहले चाय, फिर मिठाई फिर डिनर के लिए पैकेट दिए जा रहे थे।

ये तो मेरी ड्यूटी है --- वायुसेना के बड़े बड़े अधिकारी एक-एक व्यक्ति का हालचाल पूछने में लगे थे। यहां पर फ्री फोन और दवाओं का भी इंतजाम था। यहां पर हिंदी ट्रिब्यून और एबीपी न्यूज के पत्रकारों की टीम मौजूद थी। इतना ही नहीं वायु सेना ने सबके लिए चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड जाने के लिए निशुल्क बसों का इंतजाम कर रखा था। वायुसेना के अफसर आपदा से बचकर आए लोगों की हर तरह की मदद करने को तैयार थे। अधिकारियों की ये आत्मीयता और इंतजामात देखकर एक बार फिर आंखे भर आईं। मैंने वायुसेना के युवा अधिकारी को चलते हुए खास तौर पर धन्यवाद कहना चाहा, तो उसने कहा, गर्व से कहा, नहीं भाई धन्यवाद कैसा, ये तो मेरी ड्यूटी है। थोड़ी देर मैं चंडीगढ़ बस स्टैंड में पहुंच चुका था।

चंडीगढ़ के सेक्टर 17 का बस स्टैंड मेरे लिए जाना पहचाना है। यहां सारी रात चहल पहल रहती है। मैंने सात दिन से दाढ़ी नहीं बनाई थी और न ही नहा सका था। पांच दिन से भूखा तो था ही। अपनी शक्ल खुद को डरावनी लग रही थी। रात को 10 बजे बस स्टैंड के एक सैलून में जाकर शेविंग कराई। 

चंडीगढ़ से दिल्ली की बस में। ( 13.09.2014)
हिम गौरव से दिल्ली - सैलून में शेेविंग करवाने के दौरान मैंने बिल्कुल डिस्चार्ज हो चुके अपने मोबाइल चार्च किया तो पटना हिंदुस्तान से अपने साथी सुनील झा का फोन आया। मैंने उन्हें अपने सकुशल चंडीगढ़ तक पहुंचने की जानकारी दी। तभी दिल्ली से रामकृपाल मौर्य अंकल का फोन आ गया। वे लोग भी बड़ी चिंता में थे।

हालांकि एयरपोर्ट पर वायुसेना की टीम ने हमें लंच पैकेट दिया था। पर मैंने चंडीगढ़ बस स्टैंड के ढाबे में गरम गरम दाल और दो रोटियां खाई। क्योंकि कई दिन हो गए थे कुछ ताजा बना हुआ खााए हुए। इसके बाद हिमाचल रोडवेज की हिम गौरव वातानुकूलित बस में दिल्ली के लिए एक सीट बुक कराई। वैसे तो समान्य बसें भी दिल्ली के लिए लगातार जा रही हैं। पर हिम गौरव इसलिए इसमें अच्छी नींद आ जाएगी। सचमुच हिम गौरव में बैठते ही नींद आ गई। छह दिनों के बाद मीठी नींद। नींद खुली तो सुबह पांच बजे थे। मैं दिल्ली के कश्मीरी गेट महाराणा प्रताप आईएसबीटी पहुंच चुका था। उजाला होने के साथ ही मैं अपने घर में था।

2 comments:

  1. वायु सेना को सलाम , उत्तराखंड में और
    कश्मीर में उन्होने अपनी जान पर खलकर जो आपदा पीड़ित लोगो की मदद की वो काबिले तारीफ़ है !
    मेरे ब्लॉग पर आपका स्वागत है

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