Wednesday, September 17, 2014

चल छलिया कश्मीर ((02 ))

( जन्नत में जल प्रलय -2)
अनादि के लिए फ्लाइट में चढ़ने का पहला मौका था इसलिए वह हर चीज को बारीकी से देख और समझ रहे थे। नई दिल्ली डोमेस्टिक ( प्रस्थान) का वेटिंग लांज उन्हें काफी अच्छा लगा। खाने पीने के लिए फूड कोर्ट में उत्तर भारतीय और दक्षिण भारतीय खाना पीना मिल जाता है। यहां एक फेब इंडिया की स्टाल भी है। हमारा चेक इन हो चुका था। बोर्डिंग पास ले लेने के बाद अभी इंट्री करने में समय था। 6 सितंबर 2014 को फ्लाइट का समय 10.20 था और हमारी इंट्री 9.40 में होनी थी। सो अनादि फुदकते हुए वेटिंग लांज के हर कोने का नजारा करना चाहते थे। कभी टायलेट तो कभी फूडकोर्ट तो कभी अलग अलग तरह की दुकानें, दूसरे विमान से जाने वाले यात्रियों के लिए उदघोषणा,  लेट होने वाले यात्रियों के नाम पुकारे जा रहे थे, अत्यंत शुद्ध हिंदी में।

हालांकि पिछले कुछ दिनों से कश्मीर के कई हिस्सों में बारिश हो रही थी। पर मैंने पता कर लिया था कि श्रीनगर शहर में कोई परेशानी नहीं है। एक दिन पहले होटल वाले से भी बात हुई थी। उसने कहा था कि श्रीनगर आने में कोई दिक्कत नहीं है। मौसम विभाग की भविष्यवाणी थी कि शनिवार दोपहर के बाद कश्मीर में बारिश रुक जाएगी। इसलिए अपनी यात्रा को लेकर मैं आश्वश्त था। गो एयर की 181 फ्लाइट तक हमें बसों से ले जाया गया। गो एयर की इस फ्लाइट पर वाडिया समूह का नाम, उनकी कंपनी बांबे डाइंग और ब्रिटानिया समूह का विज्ञापन लगा था। पर फ्लाइट में अंदर जाने पर कोई सीट नंबर नहीं था। खूबसूरत व्योम बाला प्रिया एस ने कहा जहां मर्जी वहां की सीट लूट लो। ए 320 फ्लाइट में 180 लोगों के बैठने की जगह होती है। एक पंक्ति में छह सीटें बीच से रास्ता। हमने एक साथ तीन सीटें हथिया लीं।
विमान से श्रीनगर शहर ( 6 सितंबर 2014) 

अनादि ने खिड़की पास वाली सीट झटक ली क्योंकि वे बाहर का नजारा लगातार देखना चाहते थे। कई किलोमीटर रनवे पर कुलांचे भरने के बाद बाद विमान उपर उठ गया। थोड़ी देर में बादलों के भी उपर। विमान को कैप्टन पीएस अरोड़ा उड़ा रहे थे। व्योम बालाओं ने खाने की बिक्री शुरू कर दी। अनादि जानना चाहते थे कि इस विमान में टायलेट है या नहीं। उन्होंने पीछे जाकर देखा एक लेडिज और एक जेंट्स टायलेट मौजूद था। थोड़ी देर में विमान पठानकोट शहर के उपर था।

लगभग एक घंटे की उड़ान के बाद जम्मू में जब विमान हमारा उतरा तो हल्की बारिश हो रही थी बाहर। कुछ भी साफ साफ नजर नहीं आ रहा था। पर इस बारिश में भी लोग छाता लेकर लांज तक आ जा रहे थे। यहां पर बड़ी संख्या में लोग उतरे तो काफी लोग चढ़े भी। लगभग 20 मिनट के ठहराव के बाद विमान फिर हवा में था। बातों ही बातों में हम श्रीनगर के शहर के ऊपर पहुंच चुके थे। श्रीनगर जम्मू से 40 मिनट का रास्ता है हवाई मार्ग से तो सड़क मार्ग से 7 से 11 घंटे लगते हैं।



श्रीनगर का शेख उल आलम अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट। 2009 से यहां अंतराष्ट्रीय उड़ाने भी जारी हैं। यहां हम विमान से एयरब्रिज के द्वारा सीधे लांज में पहुंच गए। कोई बस की जरूरत नहीं। न ज्यादा चलना पड़ा।

थोड़ी देर बेल्ट नंबर दो पर इंतजार करने के बाद हमारा लगेज भी बाहर आ गया। आसमान में बादल थे, पर बारिश नहीं हो रही थी। छाता खोलने की कोई जरूरत नहीं पड़ी। वह एक खुशनुमा दोपहर थी जब हमने श्रीनगर की धरती पर कदम रखे। यहां पर पार्किंग में खड़ी हमें एक टूरिस्ट बस नजर आई जिस पर लिखा था - चल छलिया कश्मीर।   

जन्नत में जल प्रलय की पहली कड़ी पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। 

-    विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyutp@gmail.com
( JAMMU, SRINAGAR, AIRPORT, GO AIR, AIRO BRIDGE, FLOOD, RAIN ) 

2 comments:

  1. Very interesting post. Enjoyed it...

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    1. धन्यवाद भालसे जी अभी लगातार पढ़े कश्मीर त्रासदी के अनुभव अगले 60 दिनों तक।

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