Saturday, September 6, 2014

रचा इतिहास - 8 माह, 105 शहर 20 राज्यों का सफर ((52))

नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर मई 1994 को जब देश भर का दौरा कर सदभावना रेल पहुंची तो इतिहास रचा जा चुका था।  20 राज्यों के 105 शहरों में एक से पांच दिन के ठहराव के साथ अपना आठ महीने का सफर पूरा कर ट्रेन दिल्ली लौटी थी। 24 मई 1994 को जब ट्रेन एक बार फिर उसी नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर पहुंची जहां से 8 अक्तूबर को शुरुआत हुई थी, तब वहां रेल यात्रियों का स्वागत करने के लिए मौजूद थे रेलवे बोर्ड के वर्तमान अध्यक्ष एमके राव, मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री सुश्री शैलजा। यात्रियों के उत्साह का तो क्या कहना, उन्होंने एक इतिहास रच डाला था। 

इस रेलयात्रा ने करीब 70 लाख लोगों तक सीधे तौर पर सदभावना का संदेश पहुंचाया। इससे पहले बाबा आम्टे की अगुवाई में भारत जोड़ो यात्रा देश व्यापी तौर पर निकाली गई थी। राष्ट्रीय एकता और सांप्रदायिक सदभाव की कड़ी में ये रेल यात्रा अभिनव प्रयास साबित हुई।

अक्तूबर में जब इस रेलगाड़ी पर 200 लोग सवार हुए तो वे 20 दिनों की यात्रा की योजना बनाकर आए थे। पर इनमें से कई लोगों का यात्रा में ऐसा मन रम गया कि वे आठ महीने से अधिक इस यात्रा का हिस्सा बन गए। यानी पूर्णकालिक यात्री बन गए। ये पूर्णकालिक यात्री यात्रा के दौरान रसोई व्यवस्था, साइकिल ट्रांसपोर्ट, अनुशासन, दफ्तर का संचालन आदि में अपनी सक्रिय भूमिका निभा रहे थे।

कुछ लोगों ने रेलयात्रा की आलोचना भी की। इसे सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग बताया। पर सुब्बराव जी कहते हैं कि रेल यात्रा के आयोजन के लिए मानव संसाधन विकास मंत्रालय की ओर से 15 लाख रुपये की आर्थिक सहायता की गई। पर अगर 8 महीने में 200 यात्रियों के भोजन का ही खर्च देखें तो यह 40 लाख रुपये बैठता है। पर यह खर्च सभी स्थानों पर स्थानीय संस्थाओं ने उठाया। इसलिए सुब्बराव जी कहते हैं कि रेल यात्रा को सरकारी सहयोग से ज्यादा तो आम जनता का सहयोग मिला।

सात दिनों का समापन शिविर -आठ माह के देश भर के सफर के बाद 24 मई 1994 को रेलयात्रा के दिल्ली पहुंचने के बाद यहां सात दिनों का एक समापन शिविर का आयोजन हुआ। 24 से 31 मई तक के मध्य हुए इस शिविर में देश भर से आए 1000 युवाओं ने शिरकत की। इस शिविर के दौरान सदभावना का संदेश आगे भी प्रसारित होता रहे इसके लिए योजनाओं पर चर्चा हुई। खास तौर पर अगले दो सालों तक हर साल दो दो महीने रेल यात्रा पुनः संचालित करने पर विचार हुआ। इसके बाद देश भर से आए युवा अपने अपने घरों के लिए विदा हुआ इस प्रेरणा के साथ कि वे सदभावना के संदेश को न सिर्फ अपने जीवन में उतारेंगे बल्कि इसका  प्रचार प्रसार अपने आसपास जीवन पर्यंत करते रहेंगे।  

सदभवाना रेल यात्रा ( पहला चरण ) 

244 दिन तक देश भर में सफर
105 शहरों में यात्रा का ठहराव
20 राज्यों से होकर गुजरी रेल
1867 युवा बने सदभावना रेल यात्रा के हिस्सेदार
70 लाख लोगों तक सीधे सदभावना संदेश पहुंचाया। 

- विद्युत प्रकाश मौर्य

(SADBHAWNA RAIL YATRA, SUBBARAO, LIFE ON WHEELS ) 

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