Friday, April 18, 2014

देश में पहली ट्राम सेवा मुंबई में


देश की पहली ट्राम मुंबई में 1873 में परेल से कोलाबा के बीच चली थी। पर इस ट्राम लोकोमोटिव नहीं बल्कि 6 से 8 घोड़े खींचा करते थे। मुंबई में ट्राम सेवा को खींचने के लिए 900 घोड़े अस्तबल में बहाल किए गए थे।

नौ मई 1874 को घोड़े से खिंचने वाले ट्राम मुंबई के कई इलाकों में चलाए गए थे। पर 7 मई 1907 को बिजली से चलने वाली ट्राम सेवा मुंबई में आरंभ हुई। यह तकरीबन छह दशक तक सफलतापूर्वक चली। मुंबई में चलने वाली ट्राम कोलकाता के ट्राम से थोड़ी अलग थी। इसमें आमतौर पर एक ही डिब्बा हुआ करता था। इसलिए यह दूर से देखने में किसी बस की तरह ही लगती थी। कुछ ट्राम डबल डेकर हुआ करती थीं तो कुछ एक ही मंजिल वाली थीं। इन ट्राम का रंग आम तौर पर लाल हुआ करता था। इनके बाहर अलग अलग उत्पादों के विज्ञापन भी लिए जाते थे। मुंबई में चलने वाली ट्राम की तस्वीरें और वीडियो बहुत कम ही दिखाई देती हैं।

1965 में सेवा बंद - मुंबई में बिजली से चलने वाली ट्राम ने लगभग 57 साल अपनी सेवाएं दीं। 31 मार्च 1964 को आखिरी बिजली चलित ट्राम सेवा मुंबई में संचालित हुई। यह बोरी बंदर और दादर के बीच चल रही थी। कोलाबा जंक्शन कार्नर मुंबई ट्राम सेवा का मुख्य केंद्र था। इस ट्राम सेवा का संचालन बेस्ट कंपनी किया करती थी। यही कंपनी मुंबई में बसों का संचालन भी करती है। शहर में लगातार बढ़ती भीड़ घाटे के कारण ट्राम सेवा बंद करने का फैसला लिया गया।

पर साल 2016 में अचानक सड़क के लिए मुंबई के फ्लोरा फाउंटेन इलाके में खुदाई के दौरान सड़क के नीचे दबे ट्राम के ट्रैक दिखाई दे देने लगे। तब लोगों को मुंबई की ट्राम सेवाओं की याद आई।


फिल्मों में ट्राम पर गीत - 1956 में आई फिल्म सीआईडी फिल्म के गीत में मुंबई में चलने वाली ट्राम का जिक्र आता है। फिल्म के पर्दे पर जानी वाकर गाते हैं- कहीं बिल्डिंग कहीं ट्राम, कहीं मोटर कहीं मिल, सब कुछ मिलता है मिलता नहीं दिल...। गीत जरा हटके जरा बचके ये है बांबे मेरी जान की अगली पंक्तियां हैं। यह गीत मजरूह सुल्तानपुरी का लिखा हुआ है।

नासिक में नैरो गेज ट्राम सेवा -  ट्राम सेवा महाराष्ट्र के नासिक शहर में भी 1889 शुरू की गई थी लेकिन ये 1933 में ही बंद कर दी गई। यह 2 फीट 6 इंच वाली नैरोगेज ट्राम सेवा थी। यह नासिक रोड रेलवे स्टेशन से पुराने नगर निगम भवन के बीच 10 किलोमीटर के दायरे में चलती थी।

कानपुर में गंगा घाट तक ट्राम-  उत्तर प्रदेश के बड़े व्यापारिक शहर कानपुर में भी 1907 में ट्राम सेवा आरंभ हुई थी जिसे 1933 में बंद कर दिया गया। इसका मार्ग 6.4 किलोमीटर लंबा था। यह ट्राम रेलवे स्टेशन से गंगा घाट ( सिरसैया घाट ) के बीच चलती थी। यहां बिजली से चलने वाली सिंगल कोच वाली ट्राम चलाई जा रही थी।


चेन्नई में 58 साल चली ट्राम - दक्षिण के शहर चेन्नई में चलने वाली ट्राम सेवा को 58 साल की सेवाओं के बाद 1953 में बंद किया गया। चेन्नई में ट्राम सेवा 7 मई 1895 में आरंभ हुई थी। चेन्नई में ट्राम सेवा का संचालन मद्रास इलेक्ट्रिक कंपनी (एमईएस ) करती थी। यह देश की पहली बिजली से चलने वाली ट्राम सेवा थी। इसकी औसत गति 7 किलोमीटर प्रति घंटे हुआ करती थी। शहर के माइलापुर से हाईकोर्ट के बीच ट्राम की सेवा लोकप्रिय थी। चेन्नई की ट्राम सेवा बिजली से संचालित थी। इसमें दो तरह के कोच हुआ करते थे। 35 फीट और 50 फीट लंबे सिंगल कोच वाले ट्राम का यहां संचालन होता था। साल 1953 में कर्मचारियों की हड़ताल के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री सी राजगोपालाचारी ने इसे बंद करने का फैसला लिया।

पटना की सड़कों पर ट्राम
उन्नीसवीं सदी के अंतिम कालखंड में बिहार की राजधानी पटना के ऐतिहासिक अशोक राजपथ पर ट्राम दौड़ा करती थी। पर ये ट्राम कोलकाता या दिल्ली के ट्राम सेवाओं थोड़ी अलग थी। गंगा नदी के समांतर गांधी मैदान से बांकीपुर की तरफ चलने वाली ट्राम को मुंबई की तरह ही घोड़े खींचा करते थे। तब ये प्रदूषणमुक्त सेवा पटना शहर की शहरी ट्रांसपोर्ट का महत्वपूर्ण हिस्सा हुआ करता था।

कभी पटना शहर की सड़के सजीले टमटम और रंगीले कोचवानों के लिए जानी जाती थी। घोड़ों की मदद से चलने वाली इस ट्राम सेवा का पूर्वी टर्मिनल सब्जीबाग (पीर बहोर थाने के पास) हुआ करता था। तब पटना शहर में नगरपालिका हुआ करती थी जो इस ट्राम सेवा का संचालन करती थी। पर लोकप्रियता में कमी के कारण 1903 में इस ट्राम सेवा को बंद कर दिया गया। हालांकि तब इसे इलेक्ट्रिक इंजन से चलाने और अन्य मार्गों पर विस्तार का भी प्रस्ताव आया था। पटना में ट्राम सेवा के दुबारा शुरू करने की योजना थी पर ये कभी परवान नहीं चढ़ सकी।
कराची की सड़कों पर चलती थी ट्राम। 
कराची में पेट्रोल इंजन से दौड़ती थी ट्राम - वहीं ऐतिहासिक शहर कराची जो तब ब्रिटिश भारत का हिस्सा हुआ करता थामें भी ट्राम की सेवा काफी लोकप्रिय थी। कराची में ट्राम सेवा शुरू करने का ख्याल 1881 में आया। 1884 में ट्राम के लिए नेटवर्क का निर्माण कार्य आरंभ हुआ। यहां मोहम्मद अली ट्रामवे कंपनी ट्राम का संचालन करती थी। 1885 में संचालित हुई ट्राम सेवा तब स्टीम इंजन से संचालित थी। 1886 में इसमें घोड़े जोत दिए गए। बाद में 1905 से 1909 के बीच इन्हें पेट्रोल इंजनों से चलाया गया। 1914 में कराची की सड़कों पर 45 पेट्रोल इंजन वाले ट्राम चलाए जा रहे थे। यहां पटरियों की चौड़ाई 4 फीट हुआ करती थी। 1945 के आसपास इनमें कुछ डीजल लोकोमोटिव भी लगाए गए। देश विभाजन के बाद 1949 में कराची की ट्राम सेवा को मोहम्मद अली नामक उद्योगपति ने संचालित करना शुरू किया। 30 अप्रैल 1975 तक कराची की सड़कों पर ट्राम दौड़ रही थी।


- विद्युत प्रकाश मौर्य - ई मेल - vidyutp@gmail.com 

( TRAM SERVICE , MUMBAI, PATNA, NASIK, CHENNAI, KANPUR ) 

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