Saturday, July 12, 2014

रजरप्पा - मां छिन्नमस्तिके का दरबार


असम के कामाख्या के बाद बड़े शक्तिपीठ के रूप में रजरप्पा का मां छिन्नमस्तिके मंदिर लोकप्रिय है। रामगढ़ के पास दामोदर और भैरवी नदी के संगम स्थल पर मां छिन्नमस्तिके का मंदिर है।
यहां महाकाली मंदिर, सूर्य मंदिर, दस महाविद्या मंदिर,बाबाधाम मंदिर, बजरंगबली मंदिर, शंकर मंदिर और विराट रूप मंदिर जैसे सात मंदिर भी हैं। कहा जाता है कि मंदिर का निर्माण छह हजार वर्ष पहले हुआ था तो कोई इसे महाभारत युग का मानता है।

मां की तीन आंखें  - मां छिन्नमस्तिके की तीन आंखें हैं। बायां पांव आगे की ओर बढ़ाए हुए वह कमल पुष्प पर खड़ी हैं। पांव के नीचे विपरीत रति मुद्रा में कामदेव और रति शयनावस्था में हैं। मां का गला सर्पमाला तथा मुंडमाल से सुशोभित है। बिखरे और खुले केश, जिह्वा बाहर, आभूषणों से सुसज्जित मां नग्नावस्था में हैं। दाएं हाथ में तलवार तथा बाएं हाथ में अपना ही कटा मस्तक है। इनके अगल-बगल डाकिनी और शाकिनी खड़ी हैं जिन्हें वह रक्तपान करा रही हैं और स्वयं भी रक्तपान कर रही हैं। मां गले से रक्त की तीन धाराएं बह रही हैं।  मंदिर का मुख्य द्वारा पूरब मुखी है।

तो ऐसे पड़ा रजरप्पा नाम - मां छिन्नमस्तिके की महिमा की कई कथाएं प्रचलित हैं। प्राचीन काल में छोटानागपुर में रज नामक एक राजा राज करते थे। राजा की पत्नी का नाम रूपमा था। इन्हीं दोनों के नाम से इस स्थान का नाम रजरूपमा पड़ा जो बाद में रजरप्पा हो गया।

मां छिन्न मस्तिके की आदि कथा - एक कथा के अनुसार एक बार भगवती भवानी अपनी सहेली जया और विजया के साथ मंदाकिनी नदी में स्नान करने गईं। स्नान करने के बाद भूख से उनका शरीर काला पड़ गया। सहेलियों ने भी भोजन मांगा। देवी ने उनसे प्रतीक्षा करने को कहा। बाद में सहेलियों के विनम्र आग्रह पर उन्होंने दोनों की भूख मिटाने के लिए अपना सिर काट लिया। कटा सिर देवी के हाथों में आ गिरा व गले से तीन धाराएं निकलीं। वह दो धाराओं को सहेलियों की ओर प्रवाहित करने लगीं। तभी से ये छिन्नमस्तिके कही जाने लगीं।
रजरप्पा में   

हर साल बड़ी संख्या में साधु, महात्मा और श्रद्धालु नवरात्रि में शामिल होने के लिए आते हैं। 13 हवन कुंडों में विशेष अनुष्ठान कर सिद्धि की प्राप्ति करते हैं।

कैसे पहुंचे – झारखंड के जिला मुख्यालय रामगढ़ से शहर से रजरप्पा की दूरी 27 किलोमीटर है। रामगढ़ बोकारो हाईवे (एनएच 320) पर 16 किलोमीटर आगे जाने के बाद रजरप्पा मोड ( चित्तरपुर) आता है। यहां से 11 किलोमीटर का सफर स्टेट हाईवे से है। पीडब्लूडी की सड़क बहुत शानदार बनी है। रामगढ़ से रजरप्पा के लिए टेकरमैक्सिमो जैसी छोटी गाड़ियां हमेशा मिलती हैं। वापसी के लिए शाम 6 बजे के बाद कोई वाहन नहीं मिलता। रामगढ़ शहर रामगढ़ कैंटरांची रोड और बरकाकाना जैसे तीन बड़े रेलवे स्टेशनों से जुड़ा हुआ है।


कहां ठहरें - मंदिर के आसपास ठहरने के लिए समान्य धर्मशाला बने है। खाने के लिए बेहतर रेस्टोरेंट नहीं है। थोडा बेहतर ठहरने खाने का विकल्प चाहिए तो आपको रामगढ़ शहर में ही अपना ठिकाना बनाना चाहिए। वैसे आप झारखंड की राजधानी रांची या बोकारो स्टील सिटी से सुबह चलकर मां के दर्शन कर दोपहर तक लौट भी सकते हैं।
 -  विद्युत प्रकाश मौर्य
( RAJRAPPA, DAMODAR, BHAIRWI, SANGAM, JHARKHAND, RAMGARH )  - आगे पढ़िए - मां के दरबार में बलि और प्रदूषण।