Thursday, April 10, 2014

कोलकाता का राइटर्स बिल्डिंग और बीबीडी बाग



कोलकाता में कई दिन रहने के दौरान हमारी बस बार बार राइटर्स बिल्डिंग के आसपास से गुजरती थी। आखिर ये राइटर्स बिल्डिंग क्या है। बाद में पता चला कि इस भवन में पश्चिम बंगाल सरकार का सचिवालय है। यह लाल रंग की कोलकाता की आइकोनिक इमारत है। इसके साथ बंगाल की कई कहानियां जुडी हुई हैं। 

लेखकों के लिए बनी थी इमारत - राइटर्स बिल्डिंग अंग्रेजों के शासन काल में लेखकों और ईस्ट इंडिया कंपनी के निम्‍न तबके के अधिकारियों के मुख्‍यालय के रूप में काम करता था। इस भवन में ब्रिटिश प्रशासन के जूनियर कलर्क बैठा करते थे। बाद में राइटर्स बिल्डिंग को बाद में पुनर्निमित किया गया। पर स्वतंत्रता के बाद राइटर्स बिल्डिंग को पश्चिम बंगाल सरकार के सचिवालय के तौर पर इस्तेमाल किया जाने लगा। इसमें मुख्यमंत्री समेत सारे मंत्रियों के कार्यालय हुआ करते थे। 
ब्रिटिश पेंटर डेनियल की पेंटिंग में राइटर्स बिल्डिंग। 

तो थोडा और जानते हैं इस भवन के बारे में। ब्रिटिश भारत के शुरुआती दिनों में वर्ष 1777 में थॉमस लयॉन ने इस इमारत को डिजाइन किया था। इसकी लंबाई 150 मीटर है। इसके मुख्य बरामदे की लंबाई 128 फीट है। हालांकि इस भवन के डिजाइन में बाद में कई बार बदलाव किए गए। इतने सालों में इस इमारत का कई बार विस्तार हो चुका है। सबसे पहले यह इमारत तीन मंजिला बनाई गई थी। वर्ष 1780 में यह इमारत लेखकों को बिना किसी किराये के इस्तेमाल के लिए दिया गया था। बाद में वर्ष 1800 में यहां फॉर्ट विलियम कॉलेज को भी शिफ्ट किया गया। इस कॉलेज में अलग अलग भाषाओं के लेखकों को तैयार किया जाता था। 

राइटर्स बिल्डिंग की एक पुरानी तस्वीर ( सौ - ब्रिटिश लाइब्रेरी )

अगले 20 सालों में यहां कई बदलाव हुए जिनमें से 32 विद्यार्थियों के लिए छात्रावास बनाया गया। ये हॉस्टल और परीक्षा भवन आज भी इस भवन में मौजूद हैं।

अब बना नया सचिवालय - पर पश्चिम बंगाल में 2012-13 में ममता बनर्जी के शासन काल में राइटर्स बिल्डिंग से सचिवालय को हटाने का फैसला किया गया। 4 अक्तूबर 2013 से पहले तक राज्य सरकार का सचिवालय यहां काम कर रहा था। पर इसे हटाने का फैसला लिया गया क्योंकि यह शासकीय जरूरतों के लिए छोटा पड रहा था। इसके आसपास जगह की कमी होने पर नया सचिवालय भवन हावडा में बनाया गया है। इसका नाम रखा गया नबन्ना।

नया रूप मिलेगा राइटर्स बिल्डिंग को -  पर बंगाल सरकार राइटर्स बिल्डिंग को करोडो रुपये खर्च कर नया रूप प्रदान कर रही है। इस विरासत को संभाल कर रखा जाएगा।

बीबीडी बाग – मतलब बिपिन, बादल दिनेश बाग। यह राइटर्स बिल्डिंग के पास ही स्थित है। कोलकाता का प्रसिद्ध चौराहा डलहौजी स्क्वायर। पर आजादी के बाद ब्रिटिश गुलामी की मानसिकता को खत्म करने के लिए इसका नाम बदलकर क्रांतिकारियों के नाम पर रख दिया गया। बंगाल के तीन क्रांतिकारियों के नाम पर यह अब बिपिन-बादल-दिनेश बाग के नाम से जाना जाता है। इन तीनों रणबांकुुरों ने 1930 में राइटर्स बिल्डिंग पर हमले की योजना बनाई थी। इस सिलसिले में तीनों शहीद हो गए थे। डलहौजी स्क्वायर का यह नाम लंबा हो गया है इसलिए बसों पर लिखा रहता है- बीबीडी बाग। पर आम लोगों को इसका पूरा नाम नहीं पता।

इसके आसपास आम लोगों का एक बाजार भी है। इसका नाम है विधानचंद्र राय मार्केट। विधानचंद्र राय मतलब डॉक्टर बीसी राय पश्चिम बंगाल के लंबे समय तक 14 साल तक मुख्यमंत्री रहे। वे पेशे से डाक्टर थे और स्वतंत्रता आंदोलन में उनकी अग्रणी भूमिका थी। उनका जन्म पटना के बांकीपुर में हुआ था। बंगाल में कई कालोनियां और संस्थान उनके नाम पर हैं।
-        विद्युत प्रकाश मौर्य- vidyutp@gmail.com
-        ( WRITERS BUILDING, KOLKATA, BBD BAG, DR BC ROY )

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