Monday, April 14, 2014

देश की सबसे बडी लाइब्रेरी में कुछ घंटे





नेशनल लाइब्रेरी कोलकाता में - अपनेे कोलकाता के पहले दौरे में एक दिन हमलोग कोलकाता की नेशनल लाइब्रेरी भी देखने गए।  यह हमारे देश की सबसे बड़ी लाइब्रेरी है। पुस्तकों की संख्या के मामले में यह देश में पहले नंबर पर है। तो चलें इस विशाल पुस्तकालय के अंदर।

इस पुस्तकालय की स्थापना साल 1836 में की गई थी। तब इसका नाम कलकत्ता पब्लिक लाइब्रेरी हुआ करता था। इसके संस्थापकों में द्वारका नाथ टैगोर भी हुआ करते थे। एक छोटी सी कोशिश ने धीरे धीरे बड़ा रूप ले लिया। बाद में कोलकाता में 1891 में इंपिरियल लाइब्रेरी की स्थापना की गई थी। गवर्नर जनरल लार्ड कर्जन ने 1903 में इन दोनों पुस्तकालयों को एक साथ समाहित कर दिया। कर्जन की मंशा विद्यार्थी और इतिहासकारों के लिए विशाल संग्रह तैयार करने की थी। और ऐसा हुआ भी। देश की आजादी के समय 1947 में इंपीरियल लाइब्रेरी में 3.50 लाख पुस्तकों का संग्रह मौजूद था। सन 1903 के बाद पुस्तकालय मेटकाफ हाउस में संचालित होता था। 

शुरुआत से ही यह लाइब्रेरी पुस्तक प्रेमियों का प्रिय स्थल हुआ करती थी। अब यह देश भर के शोधकर्ताओं की पहली पसंद है। यहां हर भाषा की पुस्तकें शोधपत्र और पत्रिकाएं बडी संख्या में उपलब्ध हैं। पुस्तकालय का भवन भी काफी विशाल है। 

बालवाडेयर एस्टेट -  आजादी के बाद इसे वर्तमान भवन में 1951 में शिफ्ट किया गया था। यह भवन बालवाडेयर एस्टेट है। पहले यह देश के गवर्नर जनरल का निवास स्थान हुआ करता था। यह 30 एकड़ फैला हुआ है। भवन की वास्तु कला बेहद खूबसूरत है। 

देश भर के शोधकर्ता यहां पढ़ाई करने पहुंचते हैं। आजकल यहां 22 लाख से ज्यादा पुस्तकें हैं। यह पुस्तकालय भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के अधीन है। पुस्तकालय अधिनियम के तहत यह लाइब्रेरी देश के हर प्रकाशित होने वाले पुस्तक और पत्रिका को पाने की अधिकारी है। 

राष्ट्रीय महत्व का संस्थान - नेशनल लाइब्रेरी एक राष्ट्रीय महत्व का संस्थान है। यहां पर हमारी तिवारी जी नामक लाइब्रेरियन से मुलाकात हुई। उनके सहयोग से हमने लाइब्रेरी के कई हिस्सों को देखा। मुख्य भवन के अलावा इसका मैगजीन सेक्शन भी हमने देखा। इसका मैगजीन सेक्शन आठ मंजिला भवन में है। हर मंजिल पर अलग-अलग विषय के पत्र देखे जा सकते हैं।
 

बाहर जाने से पहले एक बार फिर तिवारी जी से बात हुई। उन्हें यह जानकर खुशी हुई कि मैं बीएचयू में इतिहास का छात्र हूं। उन्होंने एक सवाल किया। मुगलकाल में मुगल शासकों ने हिंदू राजपूत राजकुमारियों से तो विवाह किया पर क्या ऐसा उदाहरण मिलता है कि राजपूत राजाओं ने मुस्लिम राजकुमारियों से विवाह किया हो। हालांकि मुझे कई सालों तक इस सवाल का जवाब नहीं मिला। सालों बाद कुछ इतिहासकारों का तर्क ये मिला कि मुगल तो अपनी बेटियों का विवाह राजपूत राजाओं से करना चाहते थे पर राजपूत राजा इसके लिए तैयार नहीं होते थे।
 

अब नेशनल लाइब्रेरी कोलकाता में मुख्य भवन के अलावा भाषा भवन, एनेक्सी1, एनेक्सी 2 और केमिकल लैबोरेटरी जैसे नए भवन भी बन गए हैं। हमारे छोटे भाई बहनों को लाइब्रेरी का पिरियोडिकल सेक्शन काफी पसंद आया।
 कुछ घंटे इस विशाल लाइब्रेरी में गुजारने के बाद हमलोग वापस बड़ा बाजार की ओर चल पड़े।

खुलने का समय : नेशनल लाइब्रेरी सुबह दस बजे से रात आठ बजे तक खुला रहता है। यह साल के 362 दिन खुला रहता है। यह कोलकाता के अलीपुर इलाके में स्थित है। शहर के किसी भी कोने से यहां सिटी बस सेवा से पहुंचा जा सकता है। 

: विद्युत मौर्य vidyutp@gmail.com

( KOLKATA, BOOKS, BELVEDERE ESTATE, NATIONAL LIBRARY )

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