Tuesday, April 22, 2014

बहुत बदल गया है मेरा गांव- सोहवलिया

कई साल बाद गांव पहुंचने पर मैं कुछ अलग महसूस कर रहा हूं। अब मेरा गांव सोहवलिया बहुत बदल गया है। बदले हुए गांव को देखकर खुशी हो रही है। गांव में पहुंचने के लिए तीन तरफ से सड़के बन गई हैं। कुदरा से सोहवलिया पहुंचे या फिर परसथुआ से नेशनल हाइवे छोड़कर तुरंत गांव पहुंच जाएं। तो हमारे ब्लॉक करगहर से भी गांव के लिए अररुआ, शहर बकसड़ा होते हुए सीधी सड़क बन गई है। अब मेरे गांव में बिजली भी आ गई है। एक छोटा ट्रांसफारमर लग गया है जिससे सारा गांव 22-22 घंटे रोशन रहता है। बाकी वक्त के लिए लोगों ने शहरों ती तरह इनवरटर भी लगवा लिए हैं।

मेरी मां बताती हैं कि जब मैं इस गांव में पैदा हुआ तो कुदरा तक 14 किलोमीटर का सफर पैदल करना पडता था। वह भी बारिश के दिनों में गांव शहर से कट जाता था क्योंकि कुदरा नदी उफान पर होती थी। नदी में पुल नहीं था। यही हाल परसथुआ में भी नदी का होता था। मेरी छोटी बहन जन्म तक बसही तक सड़क बन गई। फिर भी 4 किलोमीटर का रास्ता पैदल का तय करना पड़ता था खेतों की मेड से होकर। पर अब हालात बदल गए हैं।




अब तो गांव से सीधे बनारस के लिए बस जाती है। गांव गांव में सवारी ढोने लिए आटो रिक्शा, महिंद्रा जीवो, मैक्सिमो आदि चलने लगे हैं। हर गांव में लोगों के पास कई कई एसयूवी और स्टेशन वैगन जैसी बड़ी गाड़ियां आ गई हैं। एक गांव से दूसरे गांव में जाने के लिए वाहन चलने लगे हैं। लोगों के पास अपने वाहन हैं हीरो होंडा जैसे। मुझे याद आता है मेरे दादा जी को हितई गनई में पैदल जाना पड़ता था। अब ये बातें इतिहास बन चुकी हैं।

टीवी और फ्रिज पहुंच गए गांव में -  गांव में बिजली आने से लोगों ने कलर टीवी लगा लिए हैं। टाटा स्काई के सहारे सभी सेटेलाइट चैनल देखते हैं और देश दुनिया से बा-खबर रहते हैं। कई घरों में फ्रिज और वाशिंग मशीन भी पहुंचने लगे हैं। चाचा के फ्रिज में कोल्ड ड्रिंक की बोतलें भी रखी हुई हैं। 


सोहवलिया के एक किलोमीटर आगे का गांव बकसड़ा अब गांव के बड़े बाजार में तब्दील हो चुका है। इस गांव में अब सोना चांदी छोड़कर हर चीज की दुकानें खुल गई हैं। आपको किसी भी तरह की खरीददारी करनी हो तो शहर जाए बिना भी काम चल सकता है। कुदरा बाजार के कान्वेंट स्कूलों की बसें गांव के बच्चों को ले जाने के लिए आने लगी हैं। ये सब कुछ हो सका है सड़कों के बेहतर नेटवर्क से। इसके लिए प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना को श्रेय देना होगा।
गांव की सड़क पर चहलकदमी करते अनादि ( मार्च 2014 ) 

केंद्र सरकार की निर्मल ग्राम योजना का असर भी मेरे गांव में दिखाई दे रहा है। अब हर घर में शौचालय बन चुके हैं। अब कोई बहरी अलंग नहीं जाता। सभी मोबाइल कंपनियों के नेटवर्क शानदार मिल रहे हैं गांव में। अब थ्री जी में नेटसर्फिंग का मजा यहीं बैठे लिया जा सकता है। मतलब की पंजाब के गांवों से मुकाबला करने लगा है अब मेरा गांव भी। हां, अब तो मेरा गांव ही मेरा देश है।

-    विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyutp@gmail.com 

( SOHWALIA DAYS 4,  MY  VILLAGE, ROHTAS, BIHAR ) 

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