Wednesday, April 16, 2014

सन 1873 में कोलकाता में चली पहली ट्राम

प्रारंभ में ट्राम को खींचते थे घोड़े। 
कोलकाता में ट्राम संचालन का इतिहास तीन शताब्दियों का है।  सन  1873 में शहर में ट्राम चलाने की पहली कोशिश हुई। 24 फरवरी 1873 को पहली ट्राम पटरियों पर चली थी। सियालदह से आर्मेनिया घाट के बीच 2.4 मील का ट्राम ट्रैक माल ढुलाई के लिए बनाया गया था। हालांकि तब ये सेवा लोकप्रिय नहीं हुई और उसे 20 नवंबर को बंद कर दिया गया।

लार्ड रिपन ने किया उदघाटन -      एक बार फिर कोशिश हुई। सन 1880 में कोलकाता ट्रामवेज कंपनी ( सीटीसी) का गठन हुआ। सियालदह से आर्मेनिया घाट के बीच डलहौजी स्क्वायर, स्ट्रैंड रोड होते हुए मीटर गेज पर ट्राम चलाई गई जिसे घोड़े खींचते थे। एक नवंबर 1880 को ट्राम सेवा का उदघाटन   तत्कालीन   वायसराय लार्ड रिपन ने किया। 


1882 में  स्टीम लोकोमोटिव  -  साल 1882 में स्टीम लोकोमोटिव से ट्राम का संचालन शुरू किया गया। 19वीं सदी के अंत में सीटीसी के पास 186 ट्राम कार, 1000 घोड़े, 7 स्टीम इंजन और 19 मील का ट्राम नेटवर्क था। साल 1900 में ट्राम रुट के विद्युतीकरण की शुरुआत की गई। तब इसे मीटर गेज से बदल कर स्टैंडर्ड गेज पर (  4    फीट 8.5 इंच) लाया गया।  कोलकाता में साल 1905 तक पूरा ट्राम ट्रैक विद्युतीकृत हो चुका था। 

कभी हावड़ा  ब्रिज पर भी चलती थी ट्राम -  सन 1943 न्यू हावड़ा ब्रिज के बनने पर ट्राम हावड़ा स्टेशन पर भी हावड़ा पुल होते हुए पहुंच चुकी थी।  मुझे याद है   अपनी  1991 की पहली कोलकाता यात्रा  जब  हमलोग  हावड़ा स्टेशन से बाहर निकल कर 60 पैसे का टिकट लेकर ट्राम में सवार हो जाते थे।  ट्राम पर बैठकर हावड़ा ब्रिज को पार करने का आनंद ही कुछ अलग था। 
  हालांकि 1992 में ट्राम को हावड़ा ब्रिज से ट्रैफिक और पुल पर संकट का हवाला देते हुए हटा दिया गया।   सन 1943 में ट्राम का कोलकाता शहर में 67.3 किलोमीटर के दायरे में विस्तार था। यह कोलकाता के सभी प्रमुख इलाकों को कवर करती थी। 

बंगाल सरकार के अधीन - आजादी के बाद 1951 में कोलकाता ट्रामवे कंपनी पश्चिम बंगाल सरकार के अधीन गई। 1970 में नीमतल्ला घाट और हावड़ा में कुछ इलाकों में ट्राम सेवा बंद कर दी गई। इसके बाद   कुल ट्राम रूट घट कर 62.08 किलोमीटर रह गया।  सन 1986 में दक्षिण में ट्राम का विस्तार बेहाला से जोका तक किया गया। तो सन   1992 में कोलकाता ट्रामवे कंपनी ने अपनी बसें भी चलानी शुरू कर दीं।


90 किलोमीटर हो सकती है अधिकतम गति - वैसे तो ट्राम को धीमी गति का वाहन माना जाता है पर विशेषज्ञों के अनुसारअन्य वाहनों की तरह ट्राम भी   90   किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ने की क्षमता रखती है।    इसके लिए   ट्राम को  रेल या मेट्रो की तरह डेडिकेटेड रेल ट्रैक मिलना चाहिए।   पर उसकी पटरियों पर अन्य वाहनों के अतिक्रमण एवं शहर की भीड़-भाड़ सुस्त यातायात व्यवस्था के कारण ट्राम  की गति  घट जाती है। 


भीड़ में घट जाती है गति - कोलकाता में  एमजी रोड की  भीड़भाड़ में  ट्राम    को   महज   8   से  15   किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने के लिए मजबूर होना पड़ता है। इस दौरान   ट्राम के चालक को बार बार ब्रेक लगाना पड़ता है। ट्राम चालकों का कहना है कि      ट्रामों की रफ्तार तेज करने एवं ट्राम की पटरियों पर से अन्य गाड़ियों को चलने से रोकने के लिए पुलिस कभी भी  मदद नहीं करती है।
-    विद्युत प्रकाश मौर्य  vidyutp@gmail.com
( KOLKATA , TRAM, LORD RIPON, RAIL, BENGAL, METRO ) 



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