Saturday, August 11, 2012

शाही जीवन का झरोखा - विक्टोरिया मेमोरियल





कोलकाता जाएं और विक्टोरिया मेमोरियल न देखें ऐसा कैसे हो सकता है। यह कोलकाता का लैंडमार्क है। यह ब्रिटिश कालीन भारत का अदभुत स्मारक है। अपनी पहली कोलकाता यात्रा में कई घंटे तक हमलोग विक्टोरिया मेमोरियल के परिसर में घूमते रहे। दूसरी यात्रा के दौरान अनादि और माधवी को भी विक्टोरिया मेमोरियल दिखाने ले गया।



बात विक्टोरिया मेमोरियल की। तो कोलकाता के हृदय स्थल मैदान इलाके में बना विक्टोरिया मेमोरियल दशकों से कोलकाता के कला प्रेमियों की पसंदीदा जगह है। पर यह प्रेमी प्रेमिकाओं के मिलने वाले स्थल के तौर पर    भी   जाना जाता है। पर इस इमारत के अंदर ब्रिटिश राज का अनूठा संग्रहालय है।  


दो तरह के प्रवेश टिकट- यहां   संग्रहालय घूमने का टिकट 8 रुपये का है। और अगर   सिर्फ पार्क घूमना है तो टिकट   का  मूल्य 4   रुपये का है। विक्टोरिया मेमोरियल का संग्रहालय    हर   सोमवार को बंद रहता है। पर  इस दिन  भी आप इसके लॉन में  घूम सकते हैं।  बाहर से नजारा कर सकते हैं।


शाही जीवन का झरोखा - वास्तव में विक्टोरिया मेमोरियल क्वीन विक्टोरिया के शाही जीवन का झरोखा हैयह भवन भारत में अंग्रेजी राज को दी गई एक श्रद्धांजलि है। कहा जाता है कि इसका डिजाइन ताजमहल पर आधारित था। पर इसमें तमाम जगह यूरोपीयन शैली की झलक नजर आती है।

 15 साल में बनकर तैयार  हुआ -  
साल 1906 में कोलकाता घूमने निकले जॉर्ज पंचम ने वास्तुकला के इस अद्भुत स्मारक के लिए आधारशिला रखी थी। यह लगभग 15 सालों बाद 1921 में बनकर पूरा हुआ। इसके भवन की वास्तुकला इतनी सुंदर है कि यह दूर से भी काफी भव्य दिखाई देता है। भवन के अंदर विशाल संग्रहालय है। यहां रानी के पियानो और स्टडी-डेस्क सहित 3000 से अधिक वस्तुएं प्रदर्शित की गई हैं। पूरा संग्रहालय देखने के लिए आपको कुछ घंटे का वक्त निकालना पड़ेगा।



शाही तांगे की सवारी करें - विक्टोरिया के बाहर सजे धजे तांगे दिखाई देते हैं। इन तांगों को विक्टोरिया या फिटन भी कहा जाता है। तांगे वालों का यह कारोबार भी उतना ही पुराना है जितनी विक्टोरिया मेमोरियल की इमारत। कोलकाता घूमने आने वाले लोग इन तांगों में बैठकर विक्टोरिया के चक्कर लगाते हैं।

गोले का स्वाद और सीख -  जो पेड़ झुकना नहीं जानते तूफानों में टूट जाते हैं। ये  बचपन में किताबों में पढ़ा था। कोलकाता की सड़कों पर घूमते हुए विक्टोरिया मेमोरियल के सामने घूमते हुए बेटे ने जिद की गोला खाएंगे। विक्टोरिया के सामने कतार में गोला की कई दुकाने हैं।

गोला खाने के बाद अनादि के हाथ गंदे हो गए। अब अनादि हाथ धोना चाहते थे। दुकानदार ने थोड़ा पानी दिया।  पर हाथ धोते हुए उनके कपड़े गिले हो गए। दुकानदार ने कहा हाथ थोड़ा झुक कर धोना चाहिए। फिर बोले, थोड़ा झुकना जान जाओगे तो जीना सीख जाओगे। सचमुच जीवन का  यह   बड़ा पाठ है। ढेर सारी लड़ाइयां तो इसी बात को लेकर होती है,   क्योंकि हम थोड़ा झुकना नहीं चाहते।


गोला का दुकान चलाने वाले लखेंद्र पटना के पास के लोदीपुर के रहने वाले हैं पिछले 38 सालों से कोलकाता में गोला की दुकान चला रहे हैं। अब कोलकाता के ही हो गए हैं।

विद्युत प्रकाश मौर्य   -   vidyutp@gmail.com 

( KOLKATA, BENGAL, VICTORIA MEMORIAL ) 

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