Saturday, March 29, 2014

आधा आना में मोनो रेल का सफर ((03 ))


पंजाब के पटियाला स्टेट मोनो रेल में सफर के लिए 1908 में किराया महज आधा आना हुआ करता था। यह किराया इस रेल के पूरे सफर के लिए था। चाहे आप रास्ते में कहीं भी उतर जाओ। जबकि माल ढुलाई का किराया एक आना से शुरू होता था। इसके 1927 में बंद होने तक किराया यही रहा। मतलब लोगों पर किराया को बोझ नहीं  बढ़ाया गया। हालांकि इन 20 सालों में महंगाई में इजाफा हुआ। पर महाराजा पटियाला द्वारा संचालित रेलवे कंपनी ने लोगों का खयाल रखते हुए किराया स्थिर रखा।

अपने इस किफायती सफर के कारण ही यह मोनो रेल पंजाब के लोगों के बीच काफी लोकप्रिय हुआ करती थी। इस रेल नेटवर्क की लोकप्रियता का ये आलम था कि सरहिंद मोरिंडा लाइन में 1908 में तकरीबन 20 हजार लोग इस रेल पर हर महीने सफर किया करते थे।

कनक यानी गेहूं की ढुलाई - पटियाला मोनो रेल जिस मार्ग पर चलती थी वह पंजाब का कनक ( गेहूं) उत्पादन करने वाला इलाका है। इस रेल से न सिर्फ लोग सवारी करते थे बल्कि इसमें कनक भी ढोई जाती थी। कनक ढोने के लिए अलग से कोच थे। मतलब मोनो रेल मालगाड़ी का काम करती थी। छोटे छोटे गांव से रेलगाड़ी में कनक लाद कर इसे मंडी तक पहुंचाया जाता था। किसानों के लिए कनक ढुलाई के लिए यह एक सस्ते विकल्प के तौर पर मौजूद थी। 




मोटर मार्ग से मिली चुनौती  1912 के बाद पंजाब की सड़कों पर मोटर वाहन आने लगे थे। इनकी स्पीड मोनो रेल से अधिक थी। पटियाला के आसपास सड़कों का भी विस्तार होने लगा था। इन सड़कों पर तेज गति वाले मोटर आ जाने के कारण 1927 आते आते मोनो रेल की लोकप्रियता काफी कम हो गई थी। लोग मोनो रेल के बजाय तेज गति के मोटर वाहन से चलने लगे थे। 

बंदी की ओर पटियाला मोनो रेल – एक दिन ऐसा आया जब इस सेवा को बंद करना पड़ा। एक अक्तूबर 1927 को महाराजा पटियाला ने मोनो रेल को बंद करने का फैसला किया। बीस साल से चला आ रहा शानदार सफर रुक गया। और इस तरह ये अनूठी रेल इतिहास के पन्ने का हिस्सा बन गई।

पटियाला में कोई निशानी नहीं - इसके बाद सन 1938 में मोनो रेल के सपने को साकार करने वाले पटियाला के महाराजा भूपिंदर सिंह की मृत्यु हो गई। पटियाला रियासत में इसके बाद के राजाओं ने मोनो रेल की सुध नहीं ली। पर इसके कोच और इंजन कई दशक तक पटियाला के पीडब्लूडी शेड में अपनी जगह पर ही आराम फरमाते रहे। कई दशक बाद भारतीय रेलवे ने इस अनमोल विरासत को संरक्षित करने का प्रयास किया। पर पटियाला शहर में अब इस मोनो रेल की याद में कुछ भी उपलब्ध नहीं है। नई पीढ़ी के लोगों को तो ये मालूम भी नहीं की उनके शहर में कभी इतनी शानदार रेलगाड़ी चलती थी। 

-- विद्युत प्रकाश मौर्य  ( Email - vidyutp@gmail.com) 
( PATIALA STATE MONO RAIL TRAMWAY , PSMT ) 



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