Wednesday, February 19, 2014

कांगड़ा की मां ब्रजेश्वरी देवी- नगरकोट वाली देवी

हिमाचल प्रदेश के कांगडा जिले में मां ब्रजेश्वरी देवी का मंदिर स्थित है। मां ब्रजेश्वरी देवी नौ देवियों और 51 शक्तिपीठों में से एक मानी जाती हैं। इनका मंदिर कांगड़ा मुख्य शहर में ही अवस्थित है। इसे लोग नगर कोट या कांगड़ेवाली देवी भी कहते हैं। आस्था की इस स्थली पर सालों भर श्रद्धालुओं का जमावड़ा लगा रहता है। खास तौर पर पंजाब और हिमाचल के जिलों के लोग यहां हमेशा पहुंचते हैं। 

मंदिर का वर्तमान भवन 1905 में पुनर्निमित किया गया जब पुराना भवन भूकंप के कारण ध्वस्त हो गया था। साल 1905 से 1925 के बीच बीस सालों में भव्य मंदिर बन कर तैयार हुआ। ब्रजेश्वरी देवी हिमाचल प्रदेश का सर्वाधिक भव्य मंदिर है। मंदिर के सुनहरे कलश के दर्शन दूर से ही होते हैं। मंदिर के प्रांगण में महावीरभैरो और शिवजी की भी प्रतिमाएं हैं। मंदिर परिसर में तारा देवी का भी छोटा सा मंदिर है। 

 कांगडा शहर की आबोहवा सालों भर मनोरम रहती है। यह हिमाचल प्रदेश का ऐतिहासिक शहर है। यहां रहने के लिए कई सस्ते होटल और मंदिर के पास धर्मशालाएं भी हैं। आप यहां रह कर ही कांगड़ा के आसपास के स्थल जैसे धर्मशालामैक्लोडगंजनड्डीपालमपुरअंद्रेटामां चामुंडा देवी आदि स्थल भी घूमने जा सकते हैं।

 देवी की कथा - कहा जाता है कि कांगड़ा में शिव तांडव नृत्य के दौरान  सती का स्तन गिरा था। इसलिए यहां शक्तिपीठ की स्थापना हुई।
 जालंधर ने अपनी मृत्यु के समय यह वरदान मांगा था कि मेरा पार्थिव शरीर जहां जहां फैला हो वहां देवी देवताओं का वास हो। भगवान ने जालंधर को ऐसा ही आशीर्वाद दिया। ब्रजेश्वरी देवी के मंदिर को 1500 साल पुराना बताया जाता है। 1009 में महमूद गजनी के आक्रमण के समय इस शहर का नाम नगरकोट था। गजनी ने मंदिर की संपदा को बुरी तरह लूटा था। ये मंदिर फिरोजशाह तुगलक की सेना द्वारा एक बार फिर 1360 में लूटा गया। वहीं प्रचीन कथा के अनुसार कांगड़ा में जालंधर दैत्य का किला हुआ करता था।

श्रावण अष्टमी पर मंदिर में बड़ा मेला -  ब्रजेश्वरी देवी के मंदिर में साल के दो नवरात्र और श्रावण अष्टमी के समय श्रद्धालुओं की सबसे ज्यादा भीड़ होती है। तब यहां बड़ा मेला लगता है। मंदिर का प्रबंधन कांगड़ा जिला प्रशासन देखता है। जनवरी में 13 तारीख को मनाया जाने वाला लोहड़ी इस मंदिर का खास त्योहार होता है। उस समय पिंडी रूप में स्थापित देवी का मक्खन से श्रंगार किया जाता है।  


मंदिर खुलने का समय - मां ब्रजेश्वरी का मंदिर गरमी के दिनों में सुबह 5 बजे खुल जाता है। वहीं सरदी के दिनों में सुबह 6.30 बजे खुलता है। शाम को मंदिर में भव्य आरती होती है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु हिस्सा लेते हैं। मंदिर रात्रि 9 बजे बंद हो जाता है। मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के रहने के लिए धर्मशाला भी बनी है। इसके साथ ही मंदिर में अन्न क्षेत्र भी संचालित होता है। 
मंदिर से पहले गलियों में सुंदर बाजार है। इन बाजारों का नजारा करते हुए और खरीददारी करते हुए श्रद्धालु आगे बढ़ते हैं।

कैसे  पहुंचे -  मां ब्रजेश्वरी देवी का मंदिर पुराने कांगड़ा शहर के मध्य में स्थित है। कांगड़ा रेलवे स्टेशन से मंदिर की दूरी दो किलोमीटर है। कांगड़ा पहुंचने के लिए पठानकोट से जोगिंदरनगर जाने वाली लाइट रेलवे से सफर किया जा सकता है। पठानकोट से कांगड़ा तीन घंटे का रास्ता है। या फिर आप पंजाब में होशियारपुर से कांगड़ा बस से भी जा सकते हैं। जालंधर शहर से कांगड़ा बस से चार घंटे में पहुंचा जा सकता है। श्रद्धालु चिंतपूर्णी और ज्वालामुखी के साथ कांगडा और चामुंडा देवी के दर्शन के कार्यक्रम एक साथ बना सकते हैं। 

-    विद्युत प्रकाश मौर्य

BRAJESHWARI DEVI, KANGRA, HIMACHAL, NINE GODDESS )