Monday, February 17, 2014

नीचे रेल ऊपर रेल - अनूठा है हाथीदह जंक्शन

हाथीदह- नीचे भी रेल और उपर भी रेल। 
बिहार में स्थित पूर्व मध्य रेलवे का हाथीदह जंक्शन वास्तव में एक दो मंजिला स्टेशन है। ऐसे स्टेशन रेलवे में बहुत कम देखने को मिलते हैं। यहां जो रेलगाड़ियां हावड़ा या किउल जंक्शन की तरफ से पटना के लिए आती हैं वे नीचे-नीचे प्लेटफार्म नंबर एक या दो होकर गुजर जाती हैं। पर जो रेलगाड़ियां बरौनी की तरफ से राजेंद्र पुल को पार करके के आती हैं वे ऊपर ही ऊपर किउल या मोकामा की तरफ निकल जाती हैं।

दो अलग अलग स्टेशन कोड -  एक ही रेलवे स्टेशन पर दो स्टेशन कोड हैं यहां। ऊपर वाले मार्ग से गुजरने वाली ट्रेनों के लिए स्टेशन कोड इस्तेमाल होता है हाथीदह जंक्शन अपर ( HTZU) का। जबकि हाथीदह जंक्शन के लिए HTZ स्टेशन कोड का इस्तेमाल किया जाता है । अपर में प्लेटफार्म नंबर 3 है। नीचे प्लेटफार्म नंबर 1 और दो। लेकिन आपको अपर से भी रेल पकड़नी हो तो टिकट खरीदने के लिए प्लेटफार्म नंबर एक के बाहर बने टिकट खिड़की पर ही आना होगा।

अगर आप बरौनी की ओर से आ रहे हैं और आपको हाथीदह जंक्शन में ट्रेन बदलनी है तो आपको तीन नंबर प्लेटफार्म से उतर कर एक नंबर प्लेटफार्म के लिए पैदल नीचे तक का सफर करना होगा। अक्सर प्लेटफार्म नंबर 3 सुनसान रहता है। 
खतरनाक है अपर प्लेटफार्म -  हाथीदह जंक्शन का अपर प्लेटफार्म नंबर 3 कुछ मामलों में खतरनाक है। यहां पर बरौनी की ओर जाने वाली ट्रेन जब रुकती है तो पीछे के कुछ डिब्बे रेल ओवरब्रिज के उपर वाले हिस्से में आ जाते हैं। वहां कोई बैरिकेटिंग या बैरियर नहीं होने के कारण यात्रियों के सीधे नीचे गिर जाने का खतरा बना रहता है। नीचे डबल लाइन पर अप डाउन मार्ग पर रेलगाड़ियां आती जाती रहती हैं। जिन्हें नहीं मालूम वे कई बार हादसे के शिकार हो जाते हैं। कई बार गार्ड चिल्लाकर लोगों को उतरने से रोकता है।यहां रात को तो रात को तो प्लेटफार्म नंबर दो और तीन काफी निर्जन और असुरक्षित हो जाते हैं।


 रेलवे की उपेक्षा का शिकार - देखा जाए तो हाथीदह बहुत की महत्वपूर्ण रेलवे स्टेशन है। पर यहां पर जन सुविधाओं को लेकर रेलवे प्रशासन का कोई ध्यान नहीं है। साफ सफाई से लेकर पार्किंग तक सब कुछ उपेक्षा का शिकार है।
साफ सफाई के लिहाज से बात करें तो यह इस जोन से सबसे गंदे स्टेशनों में शामिल किया जा सकता है। टिकट काउंटर पर भी भारी अव्यवस्था का आलम है। मैं जब काउंटर पर टिकट खरीदने गया तो ड्यूटी बदलने का समय हो गया था। पर काउंटर के अंदर दो रेल कर्मचारी आपस में लड़ रहे थे। इसलिए काउंटर पर टिकट बिक्री का काम बाधित था। इधर भीड़ बढ़ती जा रही थी। खैर थोड़े इंतजार के बाद टिकट मिल सका।

खैर, प्लेटफार्म नंबर दो पर कई घंटे इंतजार के बाद पटना जाने वाली ट्रेन आई। इस दौरान मच्छरों ने मानव रक्त भक्षण का पूरा आनंद उठाया। हम पीड़ित उफ तक नहीं कर सकते थे। टिकट लेकर एक घंटे से ज्यादा देर तक पटना के लिए जाने वाली ट्रेन का इंतजार करना पड़ा। ट्रेन आई तो जनरल डिब्बे में जगह पाने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी। जगह तो नहीं मिली।काफी देर तक भीड़ में खड़े रहना पड़ा। जमुई से तीन मुस्लिम भाई फैजाबाद में किसी धार्मिक जलसे में शामिल होने जा रहे थे। उनसे बातें करते करते पटना तक का सफर कटता रहा। हालांकि गुवाहाटी से बरौनी तक का सफर जितना आसान रहा। बरौनी से हाथीदह होते हुए पटना का सफर उतना ही मुश्किलों भरा और उबाउ रहा। पटना पहुंचने से पहले ट्रेन बिना वजह जगह जगह रुकने भी लगी। पटना जंक्शन पहुंचते पहुंचे तो रात हो चुकी थी। 
विजय माल्या कनेक्शन -  हाथीदह की एक और पहचान है। यहां जाने माने कारोबारी विजय माल्या के पिता पंडित विट्‌ठल माल्या द्वारा 1973 में शराब की फैक्टरी लगाई गई। यूनाइटेड स्प्रिट्स में लंबे समय तक उत्पादन होता रहा।
बड़ा इंटरचेंज प्वाइंट-  अगर आप मेन लाइन से दिल्ली या हावड़ा की तरफ से आ रहे हैं और बरौनी जाना है तो आपको हाथीदह में ही ट्रेन बदलनी पड़ेगी। वहीं उत्तर बिहार से भी काफी लोग आकर हाथीदह में ट्रेन पकड़ते हैं।   
 उपसंहार - बचपन में एक कहानी सुनते थे हाथीदह का नाम आखिर हाथीदह क्यों पड़ा.. कहते हैं कि यहां गंगाजी में इतना गहरा पानी है कि हाथी भी दह जाते थे। पानी में उन हाथियों का कहीं पता नहीं चलता था। तो इसलिए इस जगह का नाम पड़ गया है हाथीदह। कोई शक....।

- vidyutp@gmail.com

( HATHIDAH, BARAUNI JN, RAIL, BIHAR, SIMARIA GHAT, RAJENDRA PUL  )