Wednesday, January 15, 2014

त्रिपुरा - 700 साल एक ही राजवंश ने शासन किया


अगरतला की सड़कों पर घूमने निकलने से पहले थोड़ा जान लेते हैं त्रिपुरा के बारे में। तीन तरफ से बांग्लादेश और एक तरफ से असम से घिरे त्रिपुरा राज्य की ऐतिहासिक विरासत अत्यंत समृद्ध रही है। त्रिपुरा एक ऐसा राज्य है जहां स्वतंत्रता से पहले लगभग सात सौ सालों तक एक ही राजवंश का शासन रहा। ऐसा उदाहरण देश में कोई दूसरा नहीं मिलता। भले ही त्रिपुरा को 1972 में राज्य का दर्जा मिला पर इस राज्य का इतिहास काफी पुराना है।

700 साल से ज्यादा एक ही राजवंश का शासन
त्रिपुरा के राजवंश का इतिहास हमें 13वीं सदी से मिलता है। त्रिपुरा में माणिक्य राजवंश की शुरुआत 1280 में हुई थी। यह इंडो मंगोलियन आदिवासी राजवंश था। पर राज परिवार ने हिंदू धर्म अपनाया। आज भी त्रिपुरा का राजपरिवार आदिवासी वर्ग में ही आता है। इस वंश के कुल 186 राजाओं ने 1949 तक त्रिपुरा पर राज किया। देश में किसी राजवंश के शासन की इतनी लंबी परंपरा नहीं मिलती।

त्रिपुरा के राजवंश की वंशावली हमें 'राजमाला' नामक ग्रंथ में मिलती है।
त्रिपुरा की चर्चा महाभारत में भी मिलती है। ऐसा माना जाता है कि त्रिपुर ययाति वंश का 39वां राजा था जिसके नाम पर इस प्रदेश का नाम त्रिपुरा पड़ा। अशोक के शिलालेखों में भी त्रिपुरा की चर्चा आती है।

सन 1808 में त्रिपुरा को ब्रिटिश शासन ने जीत लिया पर इसे प्रिंसले स्टेट का दर्जा मिला रहा। राजा बीर विक्रम किशोर देव बर्मन माणिक्य बहादुर आजादी से पहले त्रिपुरा के राजा हुआ करते थे। उनका जन्म 19 अगस्त, 1908 को हुआ था। वे त्रिपुरा में अपने सुधारवादी कदमों के लिए याद किए जाते हैं।  1949 में भारत में विलय के बाद त्रिपुरा केंद्र शासित हिस्सा रहा। सन 1963 में यहां राज्य के मंत्रालय शुरू हुए, पर पूर्ण राज्य का दर्जा 1972 में जाकर मिला।

नृपेन और मानिक रहे सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री
सन 1972 से 1977 तक सुखमय सेन गुप्ता त्रिपुरा के मुख्यमंत्री रहे। प्रफुल्ल कुमार दास, राधिका रंजन गुप्ता थोडे समय के लिए राज्य के मुख्यमंत्री रहे। सन 1978 से 1988 तक सीपीएम के नृपेन चक्रवर्ती राज्य के मुख्यमंत्री रहे। इसके बाद कांग्रेस के सुधीर रंजन मजुमदार और समीर बर्मन ने कमान संभाली। पर 1993 से 1998 तक सीपीएम दशरथ देव मुख्यमंत्री बने। सन 1998 में सीपीएम के मानिक सरकार ने राज्य की कमान संभाली। वे 20 साल राज्य के मुख्यमंत्री रहे। नौ मार्च 2018 को भाजपा के बिप्लब कुमार देव त्रिपुरा के मुख्यमंत्री बने।



दस नदियों का राज्य - प्रकृति ने त्रिपुरा को भी खूब उपहारों से नवाजा है। राज्य में कुल दस छोटी छोटी नदियां बहती हैं। गोमती राज्य की प्रमुख नदी है। इसके अलावा मनु, फेनी, हावड़ा जैसी नदियां बहती हैं। ज्यादातर नदियों का पानी त्रिपुरा से बहकर बांग्लादेश में चला जाता है।

राज्य के कुल सीमा क्षेत्र का 84 फीसदी यानी 856 किलोमीटर क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय सीमा के रूप में है। असम के साथ इसकी सीमा की लंबाई 53 किलोमीटर है तथा मिजोरम के साथ यह 109 किलोमीटर लंबी है। 

राज्य में आठ जिले -  राज्य आठ जिले हैं। इनके नाम हैं - धलाई (अंबासा), उत्तर त्रिपुरा, (धर्मपुर) दक्षिण त्रिपुरा (बेलोनिया) , पश्चिम त्रिपुरा (अगरतला),  खोवाई (खोवाई), सिपाहीजाला (विश्रामगंज), गोमती (उदयपुर) और उनाकोटि (कैलाशहर)। त्रिपुरा में लोकसभा की दो सीट और राज्यसभा के लिए एक सीट निर्धारित है। राज्य की आबादी में एक-तिहाई हिस्सा जनजातियों का है। सन 1947 में स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद से ही जनजातियों तथा गैर जनजातियों के बीच यहां अधिकारों को लेकर विवाद चल रहा है।
कुमार घाट के पास मनु नदी। 

खेती लायक समतल जमीन कम -  खेती की बात करें तो राज्य में समतल भूमि का प्रतिशत अत्यंत कम है और उस पर बंगाली खेती करते हैं। यहां की मुख्य पैदावार धान है। राज्य में कुल कृषि योग्य भूमि 2‐55 लाख हेक्टेयर के लगभग है और इसमें से 1‐17 लाख हेक्टेयर या 45‐88 प्रतिशत ही सिंचित है। 
पर्यटन की प्रचूर संभावनाएं

साल 2010 के बाद त्रिपुरा एक शांत राज्य है। पर अब ही यहां देशी विदेशी सैलानी ज्यादा नहीं आते। हालांकि यहां पर्यटन की प्रचूर संभावनाएं हैं। वर्ष 2009 में राज्य सरकार ने त्रिपुरा पर्यटन विकास निगम (टीटीडीसी) की स्थापना की है, जिससे इस क्षेत्र को भी विकास का फायदा मिल सके।

त्रिपुरा एक नजर  - 
जनसंख्या - 36.71 लाख ( 2011 की जनगणना ) 
क्षेत्रफल -10491 वर्ग किलोमीटर
सीमा - 84 फीसदी अंतरराष्ट्रीय सीमा 
राज्य - 21 जनवरी 1972 को पूर्ण राज्य का दर्जा मिला। 
सांसद- 02 लोकसभा, 01 राज्यसभा।
- विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyutp@gmail.com 
( TRIPURA, AGARTALA, STATE, 1972, MANIK SARKAR ) 
त्रिपुरा यात्रा को शुरुआत से पढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें 




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