Tuesday, January 28, 2014

ऐसी है त्रिपुरा की आदर्श ग्राम पंचायत


कमला सागर जाने के रास्ते में त्रिपुरा राज्य के आदर्श ग्रामीण परिवेश से हमारा साक्षात्कार होता है। कमलासागर से पहले मधुपुर नामक गांव आता है। गांव का पंचायत भवन पक्के का बना हुआ है। पंचायत भवन के बगल में ही पंचायत सचिव का दफ्तर है। यहां जमीन के कामकाज से जुडे मामले देखे जाते हैं। रोज नियत समय पर पंचायत सचिव यहां आकर बैठता है।


पंचायत भवन के बगल में ही सीपीएम का पक्का दफ्तर भी बना हुआ। इस दफ्तर में सीपीएम के कार्यकर्ता अखबार पढ़ते हुए नजर आते हैं। यहां तीन बांग्ला के अखबार रोज आते हैं जो अगरतला से प्रकाशित होते हैं। 
पंचायत संकुल में ही एलोपैथिक और आयुर्वेदिक चिकित्सालय भी है। इन चिकित्सालयों में रोज समय पर डाक्टर आकर बैठते हैं। गांव के लोग बताते हैं कि राज्य के ज्यादातर ग्राम पंचायतों के भवन इसी तरह पक्के के बन चुके हैं। कुल मिलाकर पंचायत संकुल मिनी सचिवालय है। हर पंचायत में सड़क के किनारे गांव के कृषि उपज को बेचने के लिए प्लेटफार्म बना हुआ दिखाई देता है।


छतदार प्लेटफार्म बना है यानी बारिश से बचने का भी पूरा इंतजाम है। राज्य में मानिक सरकार की अगुवाई में चल रही सीपीएम की सरकार की छाप गांव गांव में दिखाई देती है। मानिक दादा ऐसे समावेशी विकास की बात करते हैं जिसका असर समाज के हर तबके पर दिखाई दे। यानी विकास की लाभ गांव के दलित पिछड़े और गरीबों तक पहुंच सके।
गांव में कृषि उत्पादों की बिक्री के लिए बना शेड। 
मुझे पंचायत भवन के पास ही गांव का सरकारी स्कूल नजर आता है। स्कूल बंद है। पर मैं देखता हूं कि स्कूल में बच्चों के लिए शौचालय बने हुए हैं, लड़कियों के लिए अलग और लड़कों के लिए अलग। स्कूल में पेयजल के लिए टंकी भी बनी है। नलों में पानी आ रहा है। मुझे अपने बचपन का बिहार के गांव का स्कूल याद आता है। वहां शौचालय नहीं थे। पीने के पानी के लिए एक हैंडपंप था जो अक्सर खराब हो जाता था।


अगरतला लौटते हुए एक साप्ताहिक हाट दिखाई देता है। इस हाट में सूअर की मंडी लगती है। लोग छोटे छोटे सूअर खरीद कर ले जाते हैं, फिर इन्हें पाल कर बड़ा करते हैं। बाद में ये उंचे दामों पर बिकते हैं। छोटे सूअरों को पैक करने के लिए चटाई बुनने वाली सामग्री की पैकिंग मिलती है। इसमें छोटे सूअर का मुंह और पूंछ बाहर रहता है बाकी हिस्सा पैक। मंडी से सूअर खरीदकर छोटे किसान गांव ले जाते हैं।
 हमें कमला सागर में एक बोर्ड दिखाई देता है रूरल टूरिज्म का। यानी राज्य सरकार की ओर सैलानियों को गांव दिखाने के इंतजाम भी किए जाते हैं। वाह अलबेला है त्रिपुरा... 

-    विद्युत प्रकाश मौर्य     - vidyutp@gmail.com 
( ADARSH GRAM PANCHYAT, MADHUPUR, KAMLA SAGAR, AGARTALA)


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