Friday, January 10, 2014

सिलचर से त्रिपुरा की ओर -बराक घाटी रेल मार्ग पर पंचग्राम पेपर मिल

मीटरगेज ट्रैक पर गुजरती सिलचर अगरतला पैसेंजर ( नवंबर 2013 ) 

पूर्वोत्तर के एक नए राज्य त्रिपुरा की राह पर हूं। एक ऐसा राज्य जो दिल्ली से पूर्वोत्तर के अन्य राज्यों की तुलना में सबसे दूर है। गुवाहाटी से त्रिपुरा आने में 20 घंटे से ज्यादा वक्त लग जाता है। असम, नगालैंड, मणिपुर के बाद मैं पूर्वोत्तर के चौथे राज्य में प्रवेश करने जा रहा हूं।

त्रिपुरा की राजधानी अगरतला के लिए असम के शहर सिलचर से रोज एक पैसेंजर ट्रेन मीटर गेज लाइन पर चलती है। जब मैंने इस ट्रेन में टिकट बुक कराया था तो इसके खुलने का समय पौने 11 बजे था। तब ये अगरतला रात नौ बजे पहुंचती थी। लेकिन लोगों की मांग पर इसका समय बदला गया। अच्छा रहा जो मैंने एक दिन पहले समय चेक कर लिया था वरना ट्रेन छूट सकती थी। इस पैसेंजर ट्रेन में एक कोच वातानुकूलित चेयरकार का होता है। मीटरगेज के एसी चेयरकार कोच में मेरा ये पहला सफर है। खिड़की के पास वाली सीट मिल गई है। तो अच्छे खास नजारे देखते हुए सफर कटेगा।  


अगरतला पैसेंजर में , बराक घाटी का सफर। 
अपने नए तय समय के अनुसार सिलचर अगरतला पैसेंजर ठीक पौने सात बजे सिलचर से यानी सही समय पर अगरतला के लिए चल पड़ी। वैसे तो ये पैसेंजर ट्रेन है जो सिलचर अगरतला के 257 किलोमीटर के सफर में 35 स्टेशनों पर रुकती है। पर इस ट्रेन में लगा है एक वातानुकूलित चेयरकार का कोच। जिसमें मैंने आरक्षण काफी पहले ही करा लिया था। देश में बहुत कम पैसेंजर ट्रेनों में एसी कोच लगे होते हैं।

सेब वाले शमीम साहब - सिलचर से चलते ही कोच में सहयात्री से परिचय हुआ। ये हैं मोहम्मद शमीम साहब। ये दिल्ली के आजादपुर मंडी के सेब के फर्म में कार्यरत हैं। पूरे देश में कहीं सेब हिमाचल या कश्मीर से ही जाता है। पूरे पूर्वोत्तर के हर शहर में दिल्ली की इनकी फर्म सेब सप्लाई करती है। सो शमीम साहब अपनी कंपनी की मार्केटिंग के सिलसिले में अगरतला जा रहे हैं। उनकी भी ये पहली अगरतला यात्रा है। अच्छा सहयात्री मिल जाए तो रास्ते आसान हो जाते हैं। 

कछार पेपर मिल, पंचग्राम (हेलाकांडी, असम)
सिलचर के बाद रास्ते में आता है, असम के हेलाकांडी जिले का पंचग्राम रेलवे स्टेशन। बदरपुर से पांच किलोमीटर पहले पड़ने वाले पंचग्राम में हैं भारत की सबसे बड़ी पेपर मिल।

 कछार पेपर मिल (सीपीएम)। ये पेपर मिल भारत सरकार के हिंदुस्तान पेपर कारपोरेशन लिमिटेड की आनुसांगिक इकाई है। http://www.hindpaper.in/mills/cachar.htm यहां बांस से कागज बनाया जाता है। पंचग्राम पेपर मिल में न्यूजप्रिंट भी बनाया जाता है जो अखबार छापने के काम आता है। मिल की स्थापना 29 मई 1970 को की गई। इस पेपर मिल की सालाना क्षमता है एक लाख टन की। लेकिन 2006-07 में यहां एक लाख 06 हजार कागज का रिकॉर्ड उत्पादन हुआ। पेपर मिल बराक नदी के तट पर सुरम्य वातावरण में स्थित है। पेपर मिल के बगल से नेशनल हाइवे नंबर 57 गुजरता है।

आपको पता है हमारा देश कागज की खपत में दुनिया के दूसरे देशों से कितना पीछे है। हमारे यहां प्रति व्यक्ति सालाना कागज की औसत खपत महज 4 किलोग्राम है। हिंदुस्तान पेपर की तीन और पेपर मिल हैं। नौगांव पेपर मिल असम के नौगांव जिले में है। नागालैंड पल्प एंड पेपर कंपनी लिमिटेड, नागालैंड के मांकोचुक जिले के तुली में है। जबकि केरल के कोट्टटायम के पास हिंदुस्तान न्यूज प्रिंट लिमिटेड (एचएनएल) है। फिर भी हमारे देश में कागज की जितनी जरूरत है वह भारतीय मिलों से पूरी नहीं हो पाती। हमें बड़ी मात्रा में न्यूज प्रिंट विदेशों से मंगाना पड़ता है।

पंचग्राम गुजर गया ट्रेन असम के तमाम रेलवे स्टेशनों को पीछे छोड़ती हुई अपनी गति से भागती जा रही है। सुबह बिना नास्ता किए ही ट्रेन में बैठ गया हूं। रास्ते में आने वाले स्टेशनों पर हमलोग केले, चनाजोर गरम जैसी चीजें खाते हुए पेट को संतुष्ट कर रहे हैं। धर्मनगर रेलवे स्टेशन पर कुछ ठीकठाक सा खाने को मिल गया।  

- विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyutp@gmail.com 


( बराक वैली एक्सप्रेस, AGARTALA PASSENGER, BARAK VALLEY EXPRESS, HELAKANDI, PANCHGRAM PAPER MILL )

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