Thursday, January 2, 2014

इंफाल से जिरीबाम - हरियाली के संग हौले-हौले ((03))

 नेशनल हाइवे नंबर 53 पर इंफाल शहर पार करने के पांच किलोमीटर बाद पहाड़ और फारेस्ट एरिया (वन क्षेत्र) आरंभ हो गया। ये सेनापति जिले के सदर हिल्स का इलाका है। पहाड़ों का सीना चिरती हुई सड़क कभी दाहिने तो कभी बाएं बल खाती हुई आगे बढ़ती जा रही है। पेड़ झूम रहे हैं। गीत गा रहे हैं। 

चटक सुनहली धूप के बीच चिड़ियों की चहक, हवाओं में सन सनाहट सब मिलकर एक ऐसे संगीत की धुन बजा रहे हैं, जिसे सुनकर लगता है कि बस ये सफर हमेशा यूं ही चलता रहे...ये सफर कभी खत्म हो। राजमार्ग की व्यवस्था देखने वाले संगठन बीआरटीएफ का बोर्ड दिखाई देता है- ऐसी भी क्या है जल्दी, प्रकृति के सौंदर्य का लिजिए मजा। लेकिन ये मजा आगे ज्यादा देर तक नहीं रहा।

बराक नदी पर जर्जर पुल। 
इंफाल से जिरीबाम के बीच 220 किलोमीटर के नेशनल हाईवे नंबर 53 की हालत काफी जर्जर है। बमुश्किल 100 किलोमीटर की सड़क की हालत अच्छी है। बाकी सड़क की हालत कच्ची सड़क जैसी है। सड़क देखकर आश्चर्य होता है कि आजादी के सात दशक बाद देश के नेशनल हाईवे की स्थिति ऐसी हो सकती है। वो भी एक ऐसी सडक की जो किसी राज्य की लाइफलाइन हो। हमारी टैक्सी के ड्राइवर ने बताया कि बीआरटीएफ ने सड़को सिंगल लेन से चौड़ा कर डबल लेन किया है। पर कई सालों से ये सड़क धीमी गति से बन रही है। इस धीमी गति के कारण ये रास्ते का सफर मुश्किलों भरा हो गया है। ट्रक और जीप 20 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से धीरे धीरे सरकते हैं।  


ये एनएच-53 है। 
रास्ते में कई जगह सड़क पर काम होता हुआ नजर आया। कुछ पुल तो कई दशक पुराने हैं जो अपनी उम्र खत्म कर चुके हैं। लोहे के बने इन अस्थायी पुलों इन पर वाहन गुजारने से पहले यात्रियों को उतारना पड़ता है। कई जगह नए पुल बन गए हैं तो कई जगह अभी नहीं बने। रास्ते में एक जगह बराक नदी पर भी पुल आता है। मणिपुर में बराक नदी का विस्तार काफी कम है। हालांकि असम में पहुंचकर ये नदी चौड़ी हो जाती है।

जीरीबाम जाने के पूरे रास्ते की सुरक्षा में सीआरपीएफ, असम राइफल्स, मणिपुर राइफल्स और बीआरटीएफ के जवान सड़क और आने जाने वाले वाहनों की सुरक्षा में 24 घंटे मुस्तैद दिखाई देते हैं।मणिपुर में सक्रिय कई उग्रवादी संगठनों से सड़क और इस पर चलने वाले वाहनों को खतरा है। 


रास्ते में दो ट्रक जलते हुए दिखाई दे जिन्हें लगता था कि तुरंत ही आग के हवाले किया गया था। सड़क रेल मार्ग बनाने वाली ठेकेदार कंपनियों से उग्रवादी संगठन लेवी मांगते हैं। नहीं देने पर काम में बाधा पहुंचाते हैं। कई बार इन सड़क मार्गों पर आर्थिक नाकेबंदी भी कर देते हैं। पूरे मणिपुर को शेष भारत से दानापानी यानी राशन, कपड़े आदि की सप्लाई का काम एनएच 53 के रास्ते ही होता है। जिरीबाम से पहले करीब 8 किलोमीटर लंबी ट्रकों की लाइन दिखी। सामान से लदे सभी ट्रक खड़े थे और इंफाल जाने के लिए रास्ता खुलने का इंतजार कर रहे थे। ट्रकों के ड्राइवर और हेल्पर अपनी अपनी ट्रक के आगे अपने निवाले के लिए रोटी बनाने में लगे थे। सचमुच हाईवे की जिंदगी कितनी मुश्किल है। ये पंक्तियां जहन में आती हैं- मुसाफिर की कुछ खबर ही नहीं, न जाने कहां दिन गुजारा और कहां रात की...

-    विद्युत प्रकाश मौर्य     - vidyutp@gmail.com 

No comments:

Post a Comment