Monday, January 6, 2014

तुपुल के शॉल - कुछ अलग है बात

संगाई फेस्टिवल इंफाल में तुपुल के शॉल के साथ. 
मणिपुर अपने कई रंगों के लिए देश भर में प्रसिद्ध है। मसलन मणिपुरी नृत्य जिसमें कई कलाकार देश भर में नाम रोशन कर रहे हैं। मणिपुर की अपनी फिल्म इंडस्ट्री भी है। लेकिन पूर्वोत्तर के शहरों के बीच मणिपुरी हैं हस्तशिल्प की अपनी अलग पहचान है। इसमें खासतौर पर मणिपुरी शाल अपनी विशेषताओं के लिए देशभर में अलग पहचान रखता है। चटख लाल काले रंग और सर्दियों में गरमहाट के लिए मणिपुरी शॉल प्रसिद्ध हैं। शाल के अलावा मणिपुर की महिलाएं घाघरे की तरह लपेटे जाने वाला वस्त्र भी तैयार करती हैं। ये लेडिज शॉल के आकार का ही होता है पर इसका डिजाइन शॉल से थोड़ा अलग होता है। यह उन्हें सरदी से बचाता है। 

इंफाल के पास एक कस्बा है तुपुल है। तुपुल में ग्रामीण महिलाएं घर घर में शॉल तैयार करती हैं। ये शॉल पूरी तरह से हाथ से बुने जाते हैं। कई डिजाइनर शॉल तैयार करने में तो कई दिन लग जाते हैं।  रंग बिरंगे और गर्म मणिपुरी शॉल बाकी राज्यों के हस्तशिल्प उत्पाद की तुलना में सस्ते हैं। प्लेन शॉल तो 200 रुपये से मिलना आरंभ हो जाता है। 

और हमारे सारथि महोदय भी मोल भाव करने लगे। 
मणिपुर से बाहर जाकर शॉल की कीमत थोड़ी बढ़ जाती है। पर दिल्ली के बाबा खड़ग सिंह मार्ग के मणिपुर इंपोरियम से भी आप 400 रुपये के शुरुआती कीमत पर मणिपुरी शॉल खरीद सकते हैं। वैसे डिजाइनर शॉल की कीमत तीन हजार से चार हजार रुपये तक भी हो सकती है। शॉल के अलावा मणिपुरी हस्तशिल्प में स्टोल और डिजाइनर मफलर भी तैयार किए जाते हैं। मफलरों पर भारतीय संस्कृति से जुड़ी कढाई इनकी खासियत है। तुपुल के अलावा मणिपुर के और भी कई जिलों में हस्तशिल्प से शॉल व अन्य उत्पाद बनाने का काम होता है। यहां शॉल के अलावा मणिपुर के अलग अलग इलाकों में सोने के लिए मोटी चटाई, पूजा करने वाली आसनी आदि भी बनाई जाती है, जो अपनी गुणवत्ता के लिए काफी प्रसिद्ध है ।

-    विद्युत प्रकाश मौर्य
  

 (IMPHAL, SANGAI FESTIVAL, TUPUL, SHAWL )