Tuesday, February 11, 2014

अगरतला में बसों और आटोरिक्शा का अनुशासन

अगरतला की सड़क पर सीएनजी ऑटो रिक्शा 
आमतौर पर जिन राज्यों में प्राइवेट बसें या टैक्सियां चलती हैं वहां एक दूसरे से आगे निकलने की होड़ रहती है। मोटर स्टैंडों पर सवारियां बिठाने को लेकर जंगल का कानून चलता है। चार सवारी एक गाड़ी में तो चार दूसरी में। आने वाले यात्री को बस टैक्सी वाले अपनी अपनी तरफ खींच रहे होते हैं। ऐसे में कोई भी गाड़ी तय समय पर नहीं चल पाती। आगे बढ़ने के होड़ में कई बार हादसे भी होते रहते हैं। दिल्ली से लेकर देश के कई शहरों में इस तरह का नजारा देखने को मिल जाता है। पर त्रिपुरा में नजारा कुछ अलग दिखाई देता है। बस और टैक्सी सेवाएं अनुशासन में चलती हैं। जिसका नंबर है वही सवारी बिठाएगा। गाड़ी भरे या फिर नहीं भरे अपने समय से चल देगी।
मैं माताबाड़ी से वापस आने के बाद उदयपुर से वापस अगरतला आने के लिए बस स्टैंड पहुंचा। जिस बस का अगरतला के लिए नंबर था उसमें मैं पहली सवारी था। मैं बैठ गया।

 
हरिगंगा बसाक रोड पर अगरतला का सिटी सेंटर। 


मैंने बस के कंडक्टर साहब को बोला मेरे पास 500 रुपये का नोट है। उन्होंने बस चलने से पहले ही छुट्टा कराकर मुझे लाकर रुपये पकड़ा दिए। कई बार थोड़ा किराया और बड़ा नोट हो तो कंडक्टर झंझट करने लगते हैं इसलिए मैं पहले ही समस्या का समाधान कर लेना चाहता था। तभी माइक से घोषणा हुई कि बस का समय हो गया है। आगे बढ़ाएं। और मेरी बस एक सवारी लेकर ही स्टैंड से निकल पड़ी। ऐसी व्यवस्था त्रिपुरा के हर बस स्टैंड में है।

त्रिपुरा में बस आपरेटर यूनियन ने अपनी अनुशासित व्यवस्था बना रखी है। हर स्टैंड पर इसी तरह आटो यूनियन भी हैं। वे भी नियम का पालन करते हैं। 3 सीट वाले आटो में 4 और आगे दो कुल 6 सवारियां चलती हैं। अगर आपको जल्दी है तो छह सवारी का किराया देकर आटो रिजर्व लेकर जा सकते हैं। नहीं तो आटो में सवारी भरने का इंतजार करें। यानी आटो के रिजर्व के किराया को लेकर कोई मोलभाव करने की जरूरत नहीं है। आटो का किराया 5 से 15 रुपये के बीच दूरी के मुताबिक तय है। अब अगरतला शहर में बैटरी रिक्शा भी पहुंच चुका है। 
- विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyutp@gmail.com

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