Friday, January 31, 2014

ऊर्जा के क्षेत्र में कुलांचे भरता त्रिपुरा

सुदूर पूर्वोत्तर का छोटा सा राज्य त्रिपुरा ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में भी नई इबारतें लिखने की कोशिश में लगा हुआ है। यहां नेचुरल गैस और गैस आधारित बिजली उत्पादन के क्षेत्र में काम हो रहा है। ओएनजीसी की सहयोगी कंपनी ओएनजीसी त्रिपुरा पावर कंपनी यहां काम कर रही है। कंपनी की स्थापना राज्य सरकार के सहयोग से की गई है।

कंपनी तेल और प्राकृतिक गैस के नए खदानों की तलाश में लगी है। साथ ही राज्य में गैस के सीएनजी का उत्पादन हो रहा है। अगरतला शहर और आसपास में सीएनजी के पंप खुल गए हैं।

राजधानी अगरतला में और आसपास के शहरों में सीएनजी से वाहन चलाए जा रहे हैं। देश के दस लाख से ज्यादा आबादी वाले कई बड़े शहर हैं जहां प्रदूषण बड़ी समस्या बन चुकी है पर वहां अभी सीएनजी वाहन नहीं पहुंचाए जा सके है। पर चार लाख आबादी वाले त्रिपुरा की राजधानी अगरतला के सड़कों पर सीएनजी आटो रिक्शा और दूसरे हल्के वाहन चलने लगे हैं। 
गांव गांव में पहुंचे सीएनजी वाहन - 
राजधानी अगरतला के आसपास के गांव में भी सीएनजी वाहन पहुंच गए हैं। गांव में परिवहन के लिए सीएनजी वाहन चलाए जा रहे हैं। मैं एक बार अगरतला से 30 किलोमीटर दूर के मधुपुर गांव में सीएनजी से चलने वाला आटो चल रहा था। 

आटो वाले ने बताया कि गैस खत्म होने पर भरवाने के लिए अगरतला जाना पड़ता है। एक बार तो गांव में गैस खत्म हो गई थी। तब एक दूसरे आटो वाले को 100 रुपये दिए वह आटो को खींच कर अगरतला ले गया। सीएनजी स्टेशन तक।

ओएनजीसी की सहयोगी कंपनी ओपीटीसी के गैस आधारित प्लांट ने बिजली का उत्पादन शुरू कर दिया है। अगरतला से 60 किलोमीटर दूर पटलाना में इसकी दो यूनिटों से 726 मेगावाट बिजली का उत्पादन शुरू हो गया है। यह गैस आधारित बिजली की बड़ी परियोजना है जिसका उदघाटन ऱाष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने जून 2013 में किया था। इस परियोजना से पूर्वोत्तर के सात राज्यों को बिजली मिल सकेगी।

राज्य बिजली उत्पादन में आत्मनिर्भर हो चुका है। अब त्रिपुरा में बिजली उत्पादन की दूसरी संभावनाओं पर भी काम हो रहा है। इनमें सफलता मिलने पर ये राज्य अपनी जरूरत से ज्यादा बिजली दूसरे राज्यों को देने में भी सक्षम होगा।

-    विद्युत प्रकाश मौर्य- vidyutp@gmail.com

(AGARTALA, CAPITAL, ROAD, AUTO RICKSHAW, CNG, POWER ) 

Thursday, January 30, 2014

चलिए खाते हैं अगरतला में चिकेन पुलाव

खाने पीने का खालिस बंगाली स्वाद है अगरतला की सड़कों पर। सबसे पहले बात चिकेन पुलाव की। बट्टला चौराहे पर एक साथ कई दुकाने हैं जहां चिकेन पुलाव मिलता है। बासमती चावल के इस पुलाव को आप बिरयानी भी कह सकते हैं। अगर आप सिर्फ बिरयानी खाते हैं तो 30 या 50 रुपये की प्लेट। इसके साथ आपको चिकेन की ग्रेवी मिल जाएगी। इसके साथ चिकेन लेते हैं तो 50 रुपये में हाफ या 80 रुपये में फुल। यानी चिकेन पुलाव की हाफ थाली 80 की और फुल 140 की। होटल वाले इसके साथ करीने से कट बारीक सलाद भी पेश करते हैं। चिकेन का स्वाद ऐसा की एक बार खाएं आप लंबे समय तक याद रखें कि क्या अगरतला में खाया था। रेल यात्री और शौकीन लोग यहां से चिकेन पुलाव पैक कराकर भी ले जाते हैं। श्यामाश्री रेस्टोरेंट समेत यहां तीन दुकानें हैं जिनका चिकेन पुलाव प्रसिद्ध है। 
मिठाइयों की बहार - अब पुलाव खाने के बाद मिठाई खाने का दिल करे तो सामने मिठाइयों की प्रसिद्ध दुकान सत्यनारायण मिष्टान भंडार है। 
वैसे अगरतला की हर सड़क पर आपको मिठाइयों की दुकानें मिलेंगी जहां आप खीर कदम, रसगुल्ले जैसी मिठाइयां और सुस्वादु समोसे खा सकते हैं। कोलकाता की ही तरह यहां मिठाइयां प्रति नग के हिसाब से बिकती हैं। चाहे तो आप एक मिठाई खरीद लें और पैक करा लें। एक मिठाई पैक करने के लिए कागज की डिब्बी मौजूद है।
 दिल्ली में तो ऐसा कत्तई नहीं होता। हरिगंगा बसाक रोड पर खाने के लिए कई रेस्टोरेंट हैं। चांदना होटल में मछली की थाली तो भूरी भोज में त्रिपुरा के अलग अलग स्वाद का मजा ले सकते हैं।

अगरतला में गुजरात के गांधीजी 
अगर आप अगरतला की शहरों पर शाकाहारी थाली खाना चाहते हैं तो बहुत कम विकल्प हैं। मोटर स्टैंड के पास निरामिष भोजनालय समेत दो होटल मौजूद हैं। 
गुजरात भोजनालय के अशोक गांधी। 
शकुंतला रोड पर गुजरात भोजनालय शहर का अच्छा शाकाहारी होटल है। इस होटल को अगरतला के एकमात्र गुजराती भाई अशोक गांधी ( मोबाइल – 98620 46317 ) चलाते हैं। होटल पहली मंजिल पर स्थित है। होटल की पूरी बिल्डिंग थोड़ी सी टेढ़ी हो गई है। शायद गुजरात में आए भूकंप का असर इस पर पड़ गया था। 
कई दशकों से चल रहा ये होटल एक जनवरी 2014 से नई बिल्डिंग में शिफ्ट हो रहा है। अशोक गांधी बताते हैं कि उनके तीन बेटे अच्छी खासी पढाई कर बेहतरीन नौकरियां कर रहे हैं इसलिए मेरे बाद इस होटल को कोई नहीं चलाएगा। गुजरात होटल का खाना बहुत सस्ता है।
अगरतला में स्ट्रीट फूड की भी बहार है।  अगरतला की सड़कों पर पीठा भी बिकते हुए देखा। आमतौर पर ये घर में खास मौकों पर ही बनाया जाता है। पर यहां बाजार में बिक रहा था। तो यहां सड़क पर गोलगप्पा 10 रुपये में आठ मिल रहे थे। यानी दिल्ली से सस्ता है।

थक गए तो नारियल पानी पीएं। अगरतला की सड़कों पर नारियल पानी भी खूब मिलता है। वह भी सस्ता । त्रिपुरा के दूध के ब्रांड का नाम गोमती मिल्क है जो गोमती नदी और राज्य के एक जिले के नाम पर है। गोमती न सिर्फ दूध बल्कि दूध से बनने वाले तमाम दूसरे तरह के उत्पाद भी बनाती है। 

-    विद्युत प्रकाश मौर्य

( TRIPURA - A Place of Satiety, AGARTALA, CHICKEN PULAO, RICE, MILK, ASHOK GANDHI, VEG FOOD  ) 

Wednesday, January 29, 2014

हेरिटेज पार्क बयां करता है विकास की कहानी

अगरतला मेरे एक फेसबुक फ्रेंड हैं धीरेश सैनी। पहले कभी मुलाकात नहीं हुई। मैंने उन्हें जब अपने अगरतला आने की जानकारी दी तो उन्होंने हेरिटेज पार्क में मिलने को बुलाया। यहां जाने पर पता चला कि यह भी राजधानी का एक दर्शनीय स्थल है।

अगरतला राजभवन के पास बने हेरिटेज पार्क में हर मौसम में टहलने का लुत्फ उठाया जा सकता है। इस पार्क में प्रवेश का टिकट पांच रुपये का है। पार्क का मुख्य द्वार काफी कलात्मक है। इस पार्क में पूरे त्रिपुरा के विकास की कहानी को संजोया गया है। 

त्रिपुरा में रेल नेटवर्क, सड़कों का नेटवर्क, पूरे राज्य का मानचित्र, प्रमुख मंदिर और तीर्थस्थलों के बारे में जानकारी को छोटे-छोटे मिनियेचर के माध्यम से पार्क में दिखाया गया है। पार्क सिर्फ बच्चों को बल्कि बड़े लोगों को भी आकर्षित करता है। इसी पार्क में मेरी तयशुदा मुलाकात अगरतला के दोस्त धीरेश सैनी से होती है। वे वैसे तो मुजफ्फरनगर के रहने वाले हैं पर इन दिनों अगरतला में आशियाना है।

उन्होंने शहर के बारे में काफी उपयोगी जानकारियां दीं। शहर में बांग्लादेश के महान कवि काजी नजरूल इस्लाम के नाम पर नजरूल कला केंद्र बना है। यहां अक्सर नाटक होते रहते हैं। कई बार यहां बांग्लादेश के नाटक समूह भी आकर अपने नाटक पेश करते हैं।

वेणुवन बौद्ध विहार - अगरतला शहर के मानचित्र में ठीक बीच में है उज्जयंत पैलेस। इस विशाल किले के चारों तरफ मंदिर बने हैं। किले के अलावा अगर आप कुछ और दर्शनीय स्थलों को देखने जाना चाहें तो राधानगर मोटर स्टैंड के पास रविंद्र सरणी मार्ग पर वेणुवन विहार नामक बौद्ध मंदिर देख सकते हैं। ये सुंदर विहार शहर में बौद्ध धर्म की मौजूदगी दर्शाता है। यहां बुद्ध और बोधिसत्व की धातु की बनी मूर्तियां हैं जो बर्मी मूल की हैं। यहां बुद्ध पूर्णिमा का त्योहार हर साल मनाया जाता है।

मस्जिद खेदू मियां- न सिर्फ हिंदू मंदिर और बौद्ध विहार बल्कि अगरतला शहर में आप सुंदर मस्जिद भी देख सकते हैं। यहां खेदू मियां की मस्जिद देख सकते हैं जो वास्तुकला का सुंदर नमूना है। शहर के मध्य में शिवनगर में स्थित ये मस्जिद अपनी कलात्मकता के लिए जानी जाती है।

चतुर्दश देवता मंदिर - शहर के बाहरी इलाके में  चतुर्दश देवता मंदिर भी अगरतला का एक और मुख्य आकर्षण है। इस मंदिर का प्रबंधन भी सरकार देखती है। मंदिर साफ सुथरा, व्यवस्थित और खूबसूरत है।

त्रिपुरा में और क्या देखें -
महामुनि पैगोडा - सबरुम से 25 किलोमीटर आगे मनुबांकुल में महामुनि पैगोडा में भी देखा जा सकता है। यहां श्रीलंका, थाईलैंड म्यामांर और जापान से भी श्रद्धालु आते हैं।

पाछेरताल - पाछेरताल में उदयन बुद्ध विहार में गौतम बुद्ध की एक और मूर्ति देखी जा सकती है। यह स्थल कुमारघाट रेलवे स्टेशन से 9 किलोमीटर है। यहां हर साल मई में तीन दिनों का बुद्ध मेला लगता है।

उनाकोटि - कुमारघाट से 23 किलोमीटर आगे कैलाशहर से 8 किलोमीटर की दूरी पर उनाकोटि में शिव की गुफा चित्र और मूर्तियां देखी जा सकती हैं। 

कमला सागर - मां काली कस्बे वाली का प्रसिद्ध मंदिर है। बांग्लादेश बार्डर पर स्थित यह मंदिर विशालगढ़ के करीब है।   
नीरमहल - मेलाघर के पास नीरमहल विशाल झील के बीचों बीच बना त्रिपुरा का ताजमहल है। 

उदयपुर - माताबाड़ी (त्रिपुर सुंदरी ) और अन्य ऐतिहासिक मंदिर। यहां प्रसिद्ध भुवनेश्वरी मंदिर भी है। 

-    विद्युत प्रकाश मौर्य
-    टूरिस्ट हेल्पलाइन –0381-2300332 www.tripuratourism.gov.in


(AGARTALA, HERITAGE PARK, DEVELOPMENT STORY, VENUVAN BAUDH VIHAR )