Wednesday, November 20, 2013

चलो चलें चाय और अनानास के देश में


पूर्वोत्तर यानी सात बहनों वाला राज्य। उसका एक भाई भी है सिक्किम। सात बहनें यानी अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, मणिपुर, मिजोरमनागालैंड और त्रिपुरा। इनमें असम सबसे बड़ी बहन है। हम सबके अंदर थोड़ा पूर्वोत्तर जरूर है। भारत का पूर्वोत्तर हिस्सा जिसे हम नार्थ ईस्ट कहते हैं। हरा भरा प्रदेश हमारी प्याली की चाय प्रदान करता है तो हमारे वाहनों के लिए पेट्रोल डीजल पूर्वोत्तर से आता है। सागवान और बांस के फर्नीचर का भी बड़ा स्रोत पूर्वोत्तर है। पू्र्वोत्तर अनानास (पाइनएपल) का भी बड़ा उत्पादक है।
ब्रह्मपुत्र मेल में - पूर्वोत्तर की ओर....

देश के कई राज्यों घूमने का मौका मिला है पर पूर्वोत्तर जाने की लालसा पुरानी थी। राष्ट्रीय युवा योजना के शिविरों में पूर्वोत्तर के हर राज्य के लोगों से मुलाकात होती थी, तो जाने का एक मौका और बहाना मिल ही गया। साल 2013 महीना नवंबर। सफर की शुरूआत बिहार के पटना जंक्शन से हुई। कुछ दिन पहले ही मैं दिल्ली से पटना पहुंचा था। 

दिल्ली से पूर्वोत्तर को जोड़ने वाली रेलगाड़ियां हैं नार्थ ईस्ट, अवध आसाम एक्सप्रेस, लोहित एक्सप्रेस, ब्रह्मपुत्र मेल आदि। अब असम के आखिरी छोर न्यू तिनसुकिया तक ब्राडगेज लाइन है। मैं ब्रह्मपुत्र मेल के एसी-2 कोच में हूं। ट्रेन पटना जंक्शन पर दो घंटे देर से पहुंची है।
मेरे सामने वाली बर्थ पर पटना से चढ़े सहयात्री असम राइफल्स में अधिकारी हैं। वे भी पटना से ही बैठे हैं। पटना के पास के एक गांव के रहने वाले हैं। वे 1984 से पूर्वोत्तर के अलग राज्यों में तबादलों के साथ घूम रहे हैं। आजकल उनकी पोस्टिंग डिमापुर में है। वे बताते हैं अपनी पोस्टिंग के बाद शुरुआती दिनों में
बरौनी आकर वहां से छोटी लाइन ( मीटर गेज) से गुवाहाटी जाया करता था। तब काफी समय लग जाता था। हमारी रेलगाड़ी पटना से बरौनी के बाद सारी रात सफर कर कटिहार पहुंच चुकी है। यहां से आगे किशनगंजबारसोई जैसे स्टेशनों से गुजरते हुए पाया कि ब्राडगेज लाइन का दोहरीकरण और विद्युतीकरण काम तेजी से जारी है।

न्यू जलपाईगुड़ी रेलवे स्टेशन ...
पटना से न्यू जलपाईगुड़ी (एनजेपी) तक जाने के दो मार्ग हैं एक जमालपुर, भागलपुर, साहेबगंज मालदा टाउन होते हुए तो दूसरा बरौनी, कटिहार होते हुए है। 

हमारी ब्रह्मपुत्र मेल का मार्ग भागलपुर, मालदा टाउन होकर है। ट्रेन का आखिरी पड़ाव ढिब्रूगढ़ है।
हमारी सुबह न्यू जलपाईगुडी स्टेशन पर होती है। एनजेपी में पहले भी आ चुका हूं साल 2010 में दार्जिलिंग जाने के क्रम में। यहां प्लेटफार्म नंबर एक पर बहुत अच्छी कैंटीन हैजहां नास्ते में सुस्वादु इडली और डोसा मिल रहा है। यहां रोटी सब्जी अभी सस्ती मिल रही है। साल 2013 में 20 रुपये में आठ रोटियां सब्जी के साथ। तो हमने यहां पर जमकर नास्ता कर लिया। एनजेपी में सभी ट्रेनों का ठहराव इतना ज्यादा होता है कि आप आराम से खा-पी सकें।
दुआर्स में चाय के बगान - रेलगाड़ी की खिड़की से....


न्यू जलपाईगुडी (एनजेपी) बंगाल में पड़ने वाला रेलवे का बड़ा स्टेशन है। यहां से दार्जिलिंग और सिक्किम की राजधानी गंगटोक और भूटान के शहर फुटशिलांग जाने के लिए सड़क मार्ग जाता है। एनजेपी से गुवाहाटी के रेलमार्ग का भी दोहरीकरण जारी है। इस मार्ग पर बंगाल के अलीपुर दुआर और कूच बिहार जैसे रेलवे स्टेशन आते हैं। न्यू जलपाईगुड़ी से आगे गुवाहाटी मार्ग का सफर मेरे लिए नया है। 
असम के रास्ते में - न्यू कुचबिहार रेलवे स्टेशन पर...


हमारे सहयात्री बताते हैं कि श्रीरामपुर नामक स्टेशन आने के बाद रेल असम में प्रवेश कर जाती है। गुवाहाटी से पहले बोंगाइगांव, कोकराझार, रंगिया जैसे प्रमुख शहर आए। रास्ते में हरे भरे चाय के बगान दिखाई देने लगे हैं। बंगाल के दुआर्स इलाके से चाय बगान शुरू हो जाते हैं जो आगे असम तक जारी रहते हैं। रंगिया जंक्शन है जहां से हारामुती के लिए रेलमार्ग जाता है। ये मार्ग अरूणाचल प्रदेश की राजधानी ईटानगर ( नाहरालागुन ) को रेलवे नेटवर्क से जोड़ता है।

रेलगाड़ी में अनानास बेचने वाले भी आ रहे हैं। यह मेरा प्रिय फल है। दिल्ली में भी जहां मिले खाता हूं तो भला यहां क्यों नहीं... असम में प्रवेश के साथ ही रेलगाड़ी की खिड़की से तांबुल के पेड़ और चाय के बगान दिखाई देने लगते हैं। तांबुल ( सुपारी या कसैली) पूर्वोत्तर में ज्यादातर लोग खाते हैं। हमारे साथ वाले फौजी भाई बताते हैं कि घर आने वाले मेहमानों को लोग तांबुल पेश करके स्वागत करते हैं।
-    विद्युत प्रकाश मौर्य           (  यात्रा काल-  नवंबर 2013 ) 

( RAIL, BRAHMPUTRA MAIL, ASSAM, NORTH EAST, PINEAPPLE, TEA, GUWAHATI ) 

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