Wednesday, November 27, 2013

लामडिंग जंक्शन से त्रिपुरा, मणिपुर और मिजोरम

गुवाहाटी के बाद लामडिंग पूर्वोत्तर का दूसरा बड़ा महत्वपूर्ण रेलवे स्टेशन है। वैसे तो गुवाहाटी से डिमापुर जाते समय लमडिंग रात में गुजर गया पर वापसी में यहां दिन में कुछ घंटे गुजराने का मौका मिला। 

ये स्टेशन नौगांव जिले में आता था।  अब होजाई जिले में आता है। लमडिंग पूर्वोत्तर सीमा रेलवे (एनएफआर) का डिविजन भी है। लामडिंग पूर्वोत्तर राज्यों में सबसे बड़ा जंक्शन स्टेशन है। असम बंगाल रेलवे द्वारा लमडिंग स्टेशन का निर्माण 1900 में कराया गया। 

इससे पहले लंका नामक स्टेशन भी आता है जो नौगांव जिले में है। लामडिंग महत्वपूर्ण इसलिए है कि लमडिंग जंक्शन से अगरतला और सिलचर के लिए रेलवे लाइन जाती है। लामडिंग से अगरतला की दूरी 404 किलोमीटर है।जो अब ब्राडगेज  लाइन से जुडा है

आप चाहें तो लामडिंग से सिलचर भी जा सकते हैं। सिलचर से पूर्वोत्तर के दो राज्य मणिपुर और मिजोरम जाने का मार्ग है। लमडिंग जंक्शन ब्राडगेज पर है। ये लाइन ढिब्रूगढ़ से तिनसुकिया होते हुए लीडो तक जाती है। फिलहाल तीनसुकिया जिले का लीडो पूर्वोत्तर का आखिरी रेलवे स्टेशन है।



खाने की सस्ती थाली -  मुझे लामडिंग रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर एक दो पर तीन भोजनालय दिखाई देते हैं इनमें दो शाकाहारी और एक मांसाहारी है। यहां 40 रुपये की चावल दाल सब्जी की थाली उपलब्ध है, साथ में पापड़ भी। चावल आप जितनी मर्जी दुबारा भी ले सकते हैं। 

मुझे नहीं लगता, देश के किसी और रेलवे स्टेशन पर अब इतने वाजिब दाम पर खाना मिल जाता है। यहां मांसाहारी थाली भी वाजिब कीमत पर उपलब्ध है। यहां 60 रुपये में मछली की थाली मिल रही थी।

अब लामडिंग में अच्छा खासा बाजार विकसित हो चुका है। यहां पर एक डिग्री कालेज और कुछ स्कूल भी हैं। रेेलवे की बड़ी कालोनी है। ब्रिटिश काल में लमडिंग को दूसरे विश्वयुद्ध में रडार स्टेशन के तौर पर भी इस्तेमाल किया गया। लामडिंग नौगांव लोकसभा क्षेत्र में आता है। अगरतला से लौटते वक्त मेरे पास थोड़ा समय होता है तो मैं लामडिंग स्टेशन के बाहर टहलने निकल जाता हूं। यहां पर देखता हूं कि महिलाएं चिकेन के दुकान में मुर्गा काटकर बेचती हुई नजर आती हैं। तो ये पूर्वोत्तर में महिला सशक्तिकरण का उदाहरण है।


सूटकी मछली की चटनी -  मछली की बात करें तो पूरे पूर्वोत्तर में मछली खूब खाई जाती है, पर इतनी मछली का उत्पादन नहीं होता है। इसलिए  यहां मछली आती है आंध्र प्रदेश से। होटलों में  रोहू, कतला समेत कई तरह की मछलियों के विकल्प खाने के समय मौजूद होते हैं। आप अपनी पसंद के हिसाब से आर्डर कर सकते हैं। पूर्वोत्तर में लोगों को सूखी मछली खाने का भी शौक है।

लोग यहां सूखी मछली का अचार बनाते हैं। वहीं सूखी मछली के साथ हरी सब्जियों का समन्यवय बनाकर घरों में सब्जियां बनती हैं। आपको पूर्वोत्तर के हर मछली बाजार में सूखी मछलियां खूब बिकती हुई मिल जाएंगी।

गुवाहाटी से लामडिंग के बीच एक रेलवे स्टेशन आता है जागी रोड। जागी रोड सूखी मछली का बड़ा उत्पादन केंद्र और बाजार है। इसे असमिया में सुटकी कहते हैं। सूखी मछली की चटनी असम और बंगाल के लोगों को खूब पसंद है।

-    विद्युत प्रकाश मौर्य  ( LUMDING JUNCTION,  NFR DIVISION, RAIL, ASSAM )
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