Thursday, November 21, 2013

सिलिगु़डी से गुवाहाटी - रेलगाड़ी में चलता है बाजार

वैसे तो भारतीय रेल में आप कहीं किसी भी मार्ग पर सफर करें रेलगाड़ी के डिब्बे के अंदर सामान बेचने वाले जरूर आ धमकते हैं, लेकिन न्यू जलपाईगुड़ी से गुवाहाटी के बीच के सफर की तो बात ही निराली है। 

यहां वह सब कुछ आप रेलगाडी के अंदर की खरीद सकते हैं जो आप बाजार में जाकर खरीदेंगे। मैं गारंटी के साथ कह सकता हूं कि इस तरह का बाजार आपको देश के किसी और रेल मार्ग पर शायद नहीं देखे को मिलेगा।इसकी शुरुआत न्यू जलपाईगुड़ी (एनजेपी) रेलवे स्टेशन से ही हो जाती है।
सबसे पहले न्यू जलपाईगुड़ी में दार्जिलिंग की चाय बेचने वाले डिब्बे में पहुंच जाते हैं। वह चाय पत्ती जिसके लिए आपको 90 किलोमीटर आगे दार्जिलिंग के बाजार में या सिलिगुड़ी मार्केट जाने की कोई जरूरत नहीं है। यहीं से खरीद डालिए। ट्रेन आगे बढ़ती है इसके साथ ही बच्चों के खिलौने, महिलाओं के लिए साड़ियां, सलवार सूट के कपड़े, आर्टिफिशियल से लेकर चांदी की ज्वेलरी, तरह तरह के शॉल, रजाई, कंबल बेचने वाले आते रहते हैं। यानी घर जा रहे हैं तो अपने परिवार के लिए सब कुछ आप रेलगाड़ी के डिब्बे में ही खरीद सकते हैं।

इतना ही नहीं आगे शूटिंग, शर्टिंग और पैंट कोट के कपड़े बेचने वाले भी डिब्बे में आ धमकते हैं। तो मोबाइल फोन, पेन ड्राइव, मेमोरी कार्ड, बैटरी क्या कुछ चाहिए जनाब। सब कुछ यहीं रेलगाड़ी में ही हाजिर है। यहां तक की मल्टी मीडिया फोन और स्मार्ट फोन बेचने वाले भी डिब्बे में पहुंच जाते हैं। पर ये सामान कितने असली और टिकाउ हैं ये आपकी सूझबूझ पर निर्भर करता है। हां खाने पीने की चीजें बेचने वाले भी खूब आते हैं। खास तौर पर इस मार्ग पर लाल चाय मतलब नींबू की चाय पी सकते हैं। यह चाय मिलती है पांच रुपये में एक कप। 

खूब करें मोलभाव - रेल गाड़ी में बिकने वाले इन सामानों के रेट को लेकर मोलभाव भी खूब होता है। आप को समान की परख हो तो खरीदिए नहीं तो किनारे हो लिजिए। आप घर जा रहे हैं और घर वालों के लिए कुछ लेना भूल गए हैं तो ट्रेन में ही खरीद लिजिए। एसी कोच में भी जनरल डिब्बों में भी। कूच बिहार और अलीपुर दुआर के साथ असम में प्रवेश तक ये बाजार चलता रहता है। हमने भी अपने सफर के दौरान लकड़ी के खिलौने रेलगाड़ी में ही खरीदे। पर रेलगाड़ी में बिकने वाले इलेक्ट्रानिक सामानों की कोई गारंटी नहीं रहती।


कामतापुर राज्य की मांग - कूच बिहार से गुजरते हुए कुछ याद आया। ये वही इलाका है जहां अलग कामतापुर राज्य की मांग हो रही है। दार्जिलिंग वाले गोरखालैंड मांग रहे हैं तो पश्चिम बंगाल के दुआर्स क्षेत्र और असम के कोकराझार आदि इलाकों को मिलाकर अलग कामतापुर राज्य की भी मांग की जा रही है। इसके लिए ऐतिहासिक कामतापुर राज्य के सीमाओं की दुहाई दी जा रही है।

कई बार कामतपुर राज्य की मांग का आंदोलन उग्र भी हो उठता है। अगर कोलकाता से दूरी की बात करें तो दुआर्स और दार्जिलिंग के इलाके काफी दूर हैं। इसलिए ये लोग खुद को कोलकाता से गहराई से जोड़ नहीं पाते। यहां के लोगों की जन आकंक्षा बार-बार अलग राज्य की मांग को लेकर हिलोरें मारने लगती है।  


-    विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyutp@gmail.com
 ( TRAIN, COACH, MOBILE MARKET, TOWARDS GUWAHATI ) 
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