Saturday, November 30, 2013

नए राज्यों की मांग - कार्बी आंगलांग और बोडोलैंड

असम से काटकर बोडोलैंड और कारबी आंगलांग राज्य बनाने की मांग समय समय पर उठती रहती है। 1987 में बोडोलैंड का आंदोलन मुखर हुआ। तब असम को 50 -50 में विभाजित करने की मांग उठी थी। बोडो लोग जितना असम में हिस्सा मांग रहे हैं वह पूरे असम का 35 फीसदी है। अगर कार्बी आंगलांग भी अलग कर दें तो 50 फीसदी असम ही बचेगा। लेकिन तब असम का मानचित्र काफी टेढामेढा हो जाएगा।
बोडोलैंड के लोग कोकराझार, धुबड़ी, बोंगाईगांव, बारपेटा, नलबरी, कामरूप, दरांग और शोणितपुर जिले को असम से अलग कर बोडोलैंड बनाने की मांग कर रहे रहे हैं। कई बार बोडोलैंड का आंदोलन हिंसक हो चुका है। हालांकि प्रस्तावित बोडोलैंड के 70 फीसदी नान बोडो लोग नहीं चाहते कि असम का विभाजन हो। बोडो लोगों की आकंक्षाओं के अनुरूप क्षेत्र के विकास के लिए बीच का रास्ता निकाला गया और बोडोलैंड टेरिटेरियल काउंसिल की स्थापना 10 फरवरी 2003 को की गई। बीटीसी का मुख्यालय कोकराझार में है। यानी कोकराझार बोडोलैंड की राजनीति का प्रमुख केंद्र है। न्यूजलपाईगुड़ी से गुवाहाटी जाने के क्रम में बोडोलैंड का ज्यादातर हिस्सा आता है।


अब बात करें कार्बी आंगलांग की। जुलाई 2013 में केंद्र सरकार ने जब अलग तेलंगाना के प्रस्ताव को मंजूरी दी कार्बी आंगलांग की मांग फिर से सुलग उठी। असम के दो जिले कार्बी आंगलांग और दीमा हसाओ को मिलाकर अलग राज्य बनाने की मांग खास तौर पर कार्बी जनजाति के लोग कर रहे हैं। इसके लिए कार्बी पीपुल्स लिबरेशन टाइगर्स बन चुकी है। कार्बी छात्र संघ भी समय समय पर आंदोलन करता है। कार्बी आंगलांग भौगोलिक रूप से असम का सबसे बड़ा जिला है। कार्बी जिले का मुख्यालय दीफू है जो लमडिंग और दीमापुर के बीच का रेलवे स्टेशन है, जबकि दीमा हसाओ का मुख्यालय हाफलौंग में है। 

कार्बी लोगों के आकंक्षाओं का सम्मान करने के लिए कार्बी स्वायत्तशासी परिषद बनाया जा चुका है। लेकिन कार्बी के लोग इतने से संतुष्ट नहीं हैं। बोडो और कार्बी क्षेत्र की जनजातियां अपने समाज में प्रचलित परंपरागत नियम कानूनों के कारण अपनी पहचान को बचाए रखने के लिए अलग राज्य की मांग करती हैं। हालांकि देश में इतने राज्यों का निर्माण व्यवहार में संभव नहीं दिखाई देता।

-    विद्युत प्रकाश मौर्य  
(ASSAM, KARBI ANGLONG, DIPHU ) 

Thursday, November 28, 2013

लमडिंग जंक्शन से त्रिपुरा, मणिपुर और मिजोरम

गुवाहाटी के बाद लमडिंग पूर्वोत्तर का दूसरा बड़ा महत्वपूर्ण रेलवे स्टेशन है। ये स्टेशन नौगांव जिले में आता था, अब होजाई जिले में आता है। लमडिंग पूर्वोत्तर सीमा रेलवे (एनएफआर) का डिविजन भी है।लमडिंग पूर्वोत्तर राज्यों में सबसे बड़ा जंक्शन स्टेशन है। असम बंगाल रेलवे द्वारा लमडिंग स्टेशन का निर्माण 1900 में कराया गया। 

इससे पहले लंका नामक स्टेशन भी आता है जो नौगांव जिले में है। लमडिंग महत्वपूर्ण इसलिए है कि लमडिंग जंक्शन से अगरतला और सिलचर के लिए रेलवे लाइन जाती है। लमडिंग से अगरतला की दूरी 404 किलोमीटर है।जो अब ब्राडगेज  लाइन से जुडा है

आप चाहें तो लमडिंग से सिलचर भी जा सकते हैं। सिलचर से पूर्वोत्तर के दो राज्य मणिपुर और मिजोरम जाने का मार्ग है। लमडिंग जंक्शन ब्राडगेज पर है। ये लाइन ढिब्रूगढ़ से तिनसुकिया होते हुए लीडो तक जाती है। फिलहाल तीनसुकिया जिले का लीडो पूर्वोत्तर का आखिरी रेलवे स्टेशन है।

खाने की सस्ती थाली -  मुझे लमडिंग रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर एक दो पर तीन भोजनालय दिखाई देते हैं इनमें दो शाकाहारी और एक मांसाहारी है। यहां 40 रुपये की चावल दाल सब्जी की थाली उपलब्ध है, साथ में पापड़ भी। चावल आप जितनी मर्जी दुबारा भी ले सकते हैं। मुझे नहीं लगता, देश के किसी और रेलवे स्टेशन पर अब इतने वाजिब दाम पर खाना मिल जाता है। यहां मांसाहारी थाली भी वाजिब कीमत पर उपलब्ध है। यहां 60 रुपये में मछली की थाली मिल रही थी। 

अब लमडिंग में अच्छा खासा बाजार विकसित हो चुका है। यहां पर एक डिग्री कालेज और कुछ स्कूल भी हैं। रेेलवे की बड़ी कालोनी है। ब्रिटिश काल में लमडिंग को दूसरे विश्वयुद्ध में रडार स्टेशन के तौर पर भी इस्तेमाल किया गया। लमडिंग नौगांव लोकसभा क्षेत्र में आता है। अगरतला से लौटते वक्त मेरे पास थोड़ा समय होता है तो मैं लमडिंग स्टेशन के बाहर टहलने निकल जाता हूं। यहां पर महिलाएं चिकेन के दुकान में मुर्गा काटकर बेचती हुई नजर आती हैं। 

सूटकी मछली की चटनी -  मछली की बात करें तो पूरे पूर्वोत्तर में मछली खूब खाई जाती है, लेकिन यहां मछली आती है आंध्र प्रदेश से। होटलों में  रोहू, कतला समेत कई तरह की मछलियों के विकल्प खाने के समय मौजूद होते हैं। आप अपनी पसंद के हिसाब से आर्डर कर सकते हैं। पूर्वोत्तर में लोगों को सूखी मछली खाने का भी शौक है।

लोग यहां सूखी मछली का अचार बनाते हैं। वहीं सूखी मछली के साथ हरी सब्जियों का समन्यवय बनाकर घरों में सब्जियां बनती हैं। आपको पूर्वोत्तर के हर मछली बाजार में सूखी मछलियां खूब बिकती हुई मिल जाएंगी।

गुवाहाटी से लमडिंग के बीच एक रेलवे स्टेशन आता है जागी रोड। जागी रोड सूखी मछली का बड़ा उत्पादन केंद्र और बाजार है। इसे असमिया में सुटकी कहते हैं। सूखी मछली की चटनी असम और बंगाल के लोगों को खूब पसंद है।

-    विद्युत प्रकाश मौर्य  ( LUMDING JUNCTION,  NFR DIVISION, RAIL, ASSAM )