Monday, October 14, 2013

संकटमोचन मंदिर – परीक्षा के समय बढ़ जाती थी भीड़

वाराणसी का संकटमोचन मंदिर। इस मंदिर के साथ सैकड़ो यादें जुड़ी हैं। पांच साल तक काशी हिंदू विश्वविद्यालय में पढ़ाई के दौरान हर छात्र सबसे ज्यादा इसी मंदिर में मत्था टेकने जाता है। खास तौर पर परीक्षा नजदीक आने पर मंदिर में छात्रों की भीड़ बढ़ जाती है। हनुमान जी करेंगे बेड़ा पार।  खास तौर पर जिन छात्रों की परीक्षा की तैयार कमजोर रहती थी वे संकटमोचन ज्यादा पहुंचते थे। हमारे कुछ साथी तो हर मंगलवार और शनिवार बिना नागा संकटमोचन के दर्शन करने जाते थे।
 तो 1990 से 1995 के दौरान में मैं भी अनगिनत बार संकटमोचन मंदिर में गया। बीएचयू के लंका गेट से मंदिर की दूरी एक किलोमीटर है। कई बार संकटमोचन मंदिर के पास स्थित महेंद्रवी छात्रावास में साइकिल लगाकर हमलोग मंदिर में जाते थे हनुमान जी के दर्शन करने। खास तौर पर संकटमोचन संगीत समारोह के दौरान तो मैं पांच रातें मंदिर परिसर में ही गुजार देता था। इस दौरान देश के चोटी के शास्त्रीय साधकों को यहां सुनने का मौका मिला। पांच दिनों तक चलने वाला यह देश का प्रमुख शास्त्रीय आयोजन है। यहां बड़े शास्त्रीय साधन बिना किसी शुल्क के अपनी प्रस्तुति देने आते हैं, तो नए कलाकार इस मंच पर एक बार अपनी कला की प्रस्तुति देने का मौका चाहते हैं।
यहां हमने पंडित शिवकुमार शर्मा (संतूर) पंडित जसराज, सुलक्षणा पंडित, तबला वादक सुभाष निर्वाण जैसे अनगिनत नामों का कला प्रदर्शन देखा। 2006 में संकटमोचन परिसर में आतंकी हमले के बाद अब यहां सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। मंदिर के प्रवेश द्वार में बदलाव दिखाई देता है। पहले इतनी सुरक्षा नहीं हुआ करती थी।

यहां राम और हनुमान विराजते हैं साथ-साथ
वाराणसी का संकटमोचन हनुमान मंदिर काशी के प्रसिद्ध मंदिरों में शामिल है। यह मंदिर ऐतिहासिकआध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व रखता है। विशाल परिसर में यहां हनुमान जी और रामचंद्र जी का मंदिर स्थित है। काशी प्रवास के दौरान रामचरितमानस के रचयिता गोस्वामी तुलसीदास जी ने अपने आराध्य हनुमान जी के कई मंदिरों की स्थापना की। उनके द्वारा स्थापित हनुमान मंदिरों में से एक संकटमोचन मंदिर भी है। यह मंदिर भक्ति की शक्ति का अदभुत प्रमाण देता है। इस मंदिर में स्थापित मूर्ति को देखकर ऐसा आभास होता है जैसे साक्षात हनुमान जी विराजमान हों।

तुलसीदास ने यहां रचे थे पद - मूर्ति के बारे में कहा जाता है कि इसे कवि गोस्वामी तुलसीदास ने स्वयं अपने हाथों से गढ़ा था और तब एक छोटा-सा मंदिर बाद में विस्तृत होता गया। ऐसी भी मान्यता है कि 16वीं शताब्दी में तुलसीदास ने पवित्र हिंदू ग्रंथ रामचरितमानस् का एक अच्छा-ख़ासा हिस्सा वहीं रहकर लिखा था। मान्यता है कि तुलसीदास जी ने रामचरितमानस का कुछ अंशसंकटमोचन मंदिर के पास विशाल पीपल के पेड़े के नीचे बैठकर लिखा था।

संकटमोचन हनुमान मंदिर में भगवान हनुमान के गले में गेंदे के फूलों की माला सुशोभित रहती है। इस मंदिर की एक अद्भुत विशेषता यह हैं कि भगवान हनुमान की मूर्ति की स्थापना इस प्रकार हुई हैं कि वह भगवान राम की ओर ही देख रहे हैंजिनकी वे निःस्वार्थ श्रद्धा से पूजा किया करते थे। भगवान हनुमान की मूर्ति की विशेषता यह भी है कि मूर्ति मिट्टी की बनी है।संकटमोचन महराज कि मूर्ति के हृदय के ठीक सीध में श्री राम लला की मूर्ति विद्यमान हैऐसा प्रतीत होता है संकट मोचन महराज के हृदय में श्री राम सीता जी विराजमान है। मंदिर का निर्माण साल 1611  के आसपास हुआ माना जाता है। चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को यहां हनुमान जयंती धूम-धाम से मनाई जाती है। 
संकटमोचन के लड्डू - 
मंदिर परिसर में प्रसाद की दुकानें भी है। संकटमोचन के बेसन लड्डू श्रद्धालुओं में काफी लोकप्रिय है। इसके लिए कूपन लेना पड़ता है। 
मंदिर परिसर में विवाह आदि संस्कार भी अत्यंत सस्ती दरों पर कराए जाते हैं। हर साल हनुमान जयंती के मौके पर संकटमोचन मंदिर परिसर में पांच दिन तक चलने वाला शास्त्रीय संगीत समारोह चलता है। इसमें देश के प्रसिद्ध शास्त्रीय गायक और वादक पहुंचते हैं।

राम मिलेंगे कीर्तन में मंदिर में रोज शाम को अक्सर कीर्तन होता है। तब यहां आस्था का सुंदर वातावरण दिखाई देता है। यहां लिखा है राम मिलेंगे कीर्तन में। राम मंदिर और हनुमान मंदिर के बीच के विशाल कूप स्थित है। मंदिर परिसर में हरित वातावरण है। इस हरियाली में बड़ी संख्या में बंदर भी निवास करते हैं। श्रद्धालुओं को तनिक उनसे सावधान रहना पड़ता है।
कैसे पहुंचे - मंदिर वाराणसी के दुर्गाकुंड क्षेत्र में स्थित है जो प्रख्यात काशी हिंदू विश्ववविद्यालय के भी काफी नजदीक है। वाराणसी कैंट रेलवे स्टेशन से शेयरिंग आटो या सिटी बस से आसानी संकटमोचन पहुंचा जा सकता है।  हर मंगलवार और शनिवार को मंदिर में अन्य दिनों की अपेक्षा श्रद्धालुओं की ज्यादा भीड़ रहती है।
 विशाल परिसर
8.5 एकड़ मे फैला है संकटमोचन मंदिर का परिसर
2006 में मंदिर ने आतंकवादी हमला झेला था। शहर तीन विस्फोटों से एक विस्फोट मंदिर में हुआ था।
07 मार्च को जब मंदिर पर हमला हुआ तब मंदिर में आरती हो रही थी।

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(SANKATMOCHAN HANUMAN TEMPLE, VARANASI )