Monday, June 10, 2013

गोपी तालाब - यहां गोपियों ने त्यागे थे प्राण

कान्हा की नगरी द्वारका से थोड़ी दूर पर स्थित है गोपी तालाब तीर्थ। नटवर नागर कृष्ण के प्रेम में गोपियां दीवानी थीं। लेकिन जब कृष्ण नहीं लौटे तो हजारों गोपियों ने कृष्ण प्रेम में तालाब में समाहित होकर प्राण त्याग दिए।

कहा जाता है कि कृष्ण ने गोपियों को इस तालाब की पवित्र मिट्टी से स्नान करवा कर उन्हें पवित्र किया था। बाद में जब गोपियों ने कृष्ण के विरह में इस तालाब में प्राण त्याग दिए थे।

मिट्टी है चंदन समान - कृष्ण ने इस तालाब की मिट्टी को वरदान दिया कि तालाब की मिट्टी चंदन के जैसी हो जाएगी। जो भी इस मिट्टी को अपने शरीर से लेप करेगा उसे शांति मिलेगी और उसके दुख दूर होंगे। सचमुच गोपी तालाब से मिलने वाली मिट्टी चंदन सरीखी है। लोग यहां से मिट्टी लेकर जाते हैं। मंदिरों के आसपास की दुकानों में इस तालाब की मिट्टी बिकती है। इसे गोपी चंदन कहते हैं।


द्वारका और आसपास का भ्रमण वाली ज्यातर बसें श्रद्धालुओं को अपने आधे दिन के सैर सपाटा कार्यक्रम में गोपी तालाब भी लेकर जाते हैं। यहां तालाब के किनारे कई मंदिर बने हैं। इन मंदिरों में कृष्ण और गोपियों को रासलीला की झांकियां सजाई गई हैं। कई मंदिरों में भव्य प्रदर्शनियां भी लगाई गई हैं। 

यहां सभी मंदिर असली और अति प्राचीन होने का दावा करते हैं। इन मंदिरों के पुजारी श्रद्धालुओं को कृष्ण की कथा सुनाकर मंदिर में दान दक्षिणा करने का दबाव बनाते हैं। पर आप इनके चक्कर में नहीं आएं।

गोपी चंदन घर लेकर जाएं - गोपी तालाब में बने ज्यादातर मंदिर निजी मंदिरों की तरह हैं। इसलिए यहां दिया दान सीधे पुजारियों की जेब में जाता है। हां गोपी तालाब से आप यहां की मिट्टी यानी गोपी चंदन लेकर घर जरूर जाएं। गोपी तालाब की मिट्टी तू चंदन करके जान।

गोपी तालाब के आसपास कई गोपी तालाब मंदिर हैं। ये सभी मंदिर निजी हैं और सभी के पुजारी मंदिर के अति प्राचीन होने का दावा करते हैं। गोपी तालाब मंदिर से निकाली जाने वाली मिट्टी को सफेद चंदन कहा जाता है। यहां मिट्टी को श्रद्धालु चंदन सरीखे इस्तेमाल के लिए अपने साथ ले जाते हैं।

-    माधवी रंजना 
 (GOPI TALAB TEMPLE, CHANDAN, DWARKA )