Thursday, October 31, 2013

नालंदा के खंडहर और देवानंद की जॉनी मेरा नाम


इतिहास की अंगनाई में झांकना हो तो पहुंचे। नालंदा के खंडहर। अब अगर आप राजगीर पहुंचे और तांगे के सफर का मजा नहीं लिया तो क्या बात है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी यहां आने पर तांगे में जरुर सफर करते हैं। नालंदा के खंडहरों में हालांकि अब सिर्फ अवशेष बचे हैं। लेकिन ये कहावत की खंडहर बताते हैं कि इमारत कितनी बुलंदर रही होगी , शायद यहीं से प्रेरणा लेकर बनी होगी। नालंदा के खंडहरों को देखते हुए लोग अपने अतीत को याद करते हैं। बिंबिसार अजातशत्रु को याद करते हैं।

दिलचस्प बात है कि देवानंद की लोकप्रिय फिल्म जॉनी मेरा नाम के एक सुपरहिट गाने की शूटिंग इसी नालंदा के खंडहर में हुई थी। कुछ याद आया नहीं तो हम याद दिलाते हैं। देवानंद और हेमा मालिनी के साथ के उस गीत को याद करें और रुमानी हो जाएं। 


ओ मेरे राजा वादा तो निभाया...राजगीर के कई लोगों को इस गाने की शूटिंग की याद है जब 70 के दशक में फिल्म की पूरी यूनिट यहां कई दिनों तक रुकी थी। देव साहब भी राजगीर के सौंदर्य से बहुत प्रभावित थे। उन्होंने न सिर्फ नालंदा के खंडहर बल्कि विश्व शांति स्तूप की ओर जाते रोपवे ( रज्जू मार्ग) पर भी गाने के आखिरी दृश्य फिल्माए। लेकिन बाद में बड़े निर्माताओं की नजर राजगीर पर नहीं पड़ी। 



अब विश्वधरोहर की सूची में  - 15 जुलाई 2016 को बिहार के ऐतिहासिक नालंदा विश्वविद्यालय के प्राचीन अवशेषों को यूनेस्को के विश्व धरोहर की सूची में शामिल कर लिया गया। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने नामांकन डोजियर तैयार किया था और इसे जनवरी 2015 में विश्व धरोहर समिति के पास भेजा था। 

पुरातात्विक साक्ष्यों के आधार पर माना जाता है कि नालंदा विश्वविद्यालय की स्थापना 450 ईस्वी के आसपास हुई थी.  नालंदा विश्वविद्यालय में उसके उत्कर्ष के दिनों में कई अध्ययन केन्द्र, मठ और समृद्ध पुस्तकालय थे जिसमें सुदूर स्थानों से विभिन्न विषयों की पढ़ायी करने के लिए छात्र आया करते थे। यह प्राचीन विश्वविद्यालय 12वीं शताब्दी में उस समय बंद हो गया जब बख्तियार खिलजी के नेतृत्व में तुर्क सेना ने वर्ष 1193 में इसमें तोड़फोड़ और लूटपाट की और साथ ही इसमें आग लगा दी। गया के महाबोधि मंदिर के बाद यह बिहार में दूसरा विश्व विरासत स्थल है साथ ही यह देश का 33वां विश्व विरासत स्थल है।

नालंदा के खंडहर में देवानंद और हेमा ( फिल्म- जॉनी मेरा नाम)
राजगीर के चप्पे चप्पे में इतना सौन्दर्य है कि यहां बहुत सी फिल्मों की शूटिंग के लिए बढ़ावा दिया जा सकता है। बल्कि यहां एक फिल्म सिटी की स्थापना की जा सकती है। काश बिहार को भी कोई रामोजीराव मिलता और उसकी नजर राजगीर के सौंदर्य पर पड़ती। हम सारी उम्मीदें सरकार से ही क्यों पालते हैं। हांलाकि सरकार नालंदा के पुराने गौरव की स्थापना के लिए प्रयासरत है। नालंदा में बनने वाली अंतराष्ट्रीय यूनीवर्सिटी से नालंदा एक बार फिर शिक्षा का बड़ा केंद्र बनेगा। काशी की तरह यहां से एक बार फिर ज्ञान की रोशनी दूर तक जाएगी ऐसी उम्मीद है।   
नालंदा के खंडहर में हेमामालिनी। ( फिल्म - जानी मेरा नाम ) 

-    - विद्युत प्रकाश मौर्य
 ( WORLD HERITAGE SITE, UNESCO, BIHAR  )

Tuesday, October 29, 2013

अदभुत है राजगीर का विश्व शांति स्तूप

ऐतिहासिक नगरी राजगीर का सबसे नया आकर्षण है विश्व शांति स्तूप. अब राजगीर आने वाला हर सैलानी यहां जरूर पहुंचता है। तो हमलोग भी चल पड़े हैं इसी राह पर ..

राजगीर का प्रमुख आकर्षण है विश्व शांति स्तूप। यह राजगीर की पांच पहाड़ियों में से एक पर बना है। ये शांति स्तूप राजगीर का प्रसिद्ध पर्यटक स्थल और आस्था का केंद्र है। शाक्य मुनि गौतम बुद्ध की 2600वीं जन्म तिथि के मौके पर इस विश्वशांति स्तूप का निर्माण 1978 में कराया गया। तब भारत के प्रधानमंत्री रहे मोरारजी देसाई ने इसका उदघाटन किया था।
कोलकाता की कंपनी मैंकिटोस बर्न ने इस बौद्ध स्तूप का निर्माण किया। इसका डिजाइन वास्तुकार उपेंद्र महारथी ने तैयार किया था। अपने सुंदरता के लिए यह बाकी सब स्तूपों में अलग स्थान रखता है। 

72 फीट ऊंचा स्तूप -  शांति स्तूप का गुंबद 72 फीट ऊंचा है जबकि व्यास 142 फीट और ऊंचाई 125 फीट है। 18 महीने में 10 हजार श्रमिकों ने इस स्तूप को तैयार किया था। तब इसके निर्माण में 18 लाख की लागात आई थी। जापान के बौद्ध संगठनों से सहयोग से बने इस शांति स्तूप के बगल में एक बौद्ध मंदिर भी बना है। स्तूप के चारों तरफ बने प्रदक्षिणा पथ से राजगीर का सुंदर नजारा दिखाई देता है। 

रत्नागिरि पर्वत पर विश्व शांति स्तूप के निर्माण की योजना जापान बौद्ध संघ के अध्यक्ष पूज्य गुरू जी भिक्षु निचिदात्सु फूजी की थी। स्तूप के चारों ओर चार बुद्ध प्रतिमाएं स्थापित हैं, जो अत्यन्त भव्य और आकर्षक हैं।

राजगीर की पावन भूमि में स्थित ये स्तूप पूरे विश्व को शांति का संदेश दे रहा है कि यहां के कण-कण में तथागत बुद्ध की पवित्र आत्मा समाहित है। इस पवित्र तीर्थ में आकर मनुष्य बुद्ध के दया और मैत्री भाव में खो जाता है। 
बिहार में अब चार जगह शांति स्तूप हो गए हैं वैशाली, पाटलिपुत्र, राजगीर और गया। इन चारों शहरों की दूरी भी ज्यादा नहीं है। इन सबको जोड़कर बुद्धिस्ट सर्किट नाम दिया गया है। इन सबको जोड़ने के लिए ट्रेन चलती है बुद्ध पूर्णिमा एक्सप्रेस जो वाराणसी के सारनाथ से चलती है। हालांकि ये वैशाली नहीं जाती।



रोप वे या रज्जू मार्ग विश्व शांति स्तूप तक जाने के लिए डेढ़ किलोमीटर लंबा रज्जू मार्ग है। हां वही रोप वे। राजगीर के रोपवे में हर कुरसी पर सिर्फ एक ही व्यक्ति बैठ सकता हैं। ये खुला हुआ भी इसलिए बच्चों और कमजोर दिल वालों को थोड़ा डर लगता है। मैं दिसंबर 2002 में अपनी पहली राजगीर यात्रा के दौरान जब रोपवे से चला तो रास्ते में बिजली चली गई। तब करीब 20 मिनट हवा में ही लटका रहा।

आपको पता है पूरे देश में रोपवे के निर्माण और संचालन का काम उषा मार्टिन नामक कंपनी देखती है। इस कंपनी का लोहे की रस्सी बनाने में मोनोपोली है।

हरिद्वार में मनसा देवी और चंडी देवी रोपवे भी यही कंपनी चलाती है। हालांकि राजगीर में चेयरलिफ्ट या रोपवे का संचालन बिहार सरकार का पर्यटन विभाग करता है। इसमें एक कुरसीनुमा लिफ्ट पर एक ही आदमी बैठ सकता है। खुला होने के कारण पहाड़ी घाटी से गुजरते वक्त भय और रोमांच दोनों होता है। आजकल चेयर लिफ्ट का आने जाने का किराया 60 रुपये प्रति व्यक्ति है। आप लौटते वक्त तक टिकट संभाल कर रखें। 

पैदल रास्ता भी है -  वैसे आप राजगीर के विश्व शांति स्तूप तक पैदल के मार्ग से ट्रैकिंग करते हुए भी जा सकते हैं। दुनिया भर से बौद्ध श्रद्धालु राजगीर आते हैं शांति स्तूप देखने। विश्व शांति स्तूप की ऊंचाई से राजगीर के नजारे देखना बड़ा ही आनंदकारी है।

राजगीर के बारे में और ज्यादा जानकारी के लिए आप 
बिहार टूरिज्म की वेबसाइट पर भी जा सकते हैं। इसका पता है -  http://bstdc.bih.nic.in/Rajgir.htm

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   ----- vidyutp@gmail.com 
विद्युत प्रकाश मौर्य 

  ( BIHAR, RAJGIR, BUDDHA, NALANDA, ROPE WAY )

Sunday, October 27, 2013

राजगीर -गर्म जल कुंड में स्नान से रोग होते हैं दूर

बिहार की सबसे लोकप्रिय पर्यटन नगरी राजगीर का प्रमुख आकर्षण है गर्म जल कुंड में स्नान करना। चाहे ये स्नान आस्था भाव से हो या फिर सेहत के लिहाज से हर राजगीर आने वाला सैलानी या श्रद्धालु गर्म जल कुंड में स्नान जरूर करता है।

वैसे सर्दियों में जल कुंड में स्नान करने वालों की भीड़ ज्यादा होती है। पर गर्मी में भी लोग यहां जमकर स्नान करते नजर आते हैं। राजगीर का ब्रह्मकुंड बिल्कुल केंद्र में स्थित है। यहां से शांति स्तूप की चढाई थोड़ी दूर पर ही है।


अद्भुत है ब्रह्म कुंड - महाभारत में राजगीर को उष्ण झरनों वाला इलाका यानी तापदा कहा गया है। पौराणिक कहानियों के मुताबिक ब्रह्मा के ताप से इसका पानी गर्म होता है। इसलिए इसे ब्रह्म कुंड नाम से पुकारा जाता है। आज भी राजगीर में विभर पहाड़ के निचले हिस्से पहाड़ों से निकलने वाले कई उष्ण प्रकृति के झरने हैं। इन झरनों में सबसे अधिक गर्म ब्रह्म कुंड है जिसका पानी 45 डिग्री सेल्सियस तक गर्म रहता है। ये झरने बीमारों को आकर्षित करते हैं। माना जाता है कि इनमें स्नान से चर्म रोग समेत कई बीमारियां दूर हो जाती हैं।

ब्रह्मकुंड में उतरने से पहले उपर कतार में कई झरने बने हैं जिनमें शेर के मुखाकृति से पानी आता है। कुंड में उतरने से पहले लोग इसमें स्नान करते हैं। इसका पानी अपेक्षाकृत कम गर्म है। इसमें स्नान के बाद ही कुंड में उतरना चाहिए। भीड़ होने पर आपको कुंड में डुबकी लगाने का ज्यादा वक्त नहीं मिलता।

ब्रह्मकुंड के आसपास पंडों का रैकेट है। वे आपको स्नान के बाद कई तरह के संस्कार कराने की बात करते हैं। तो आप उनसे थो़ड़ा बचकर ही रहें।

अब बना एक नया स्विमिंग पुल-  अब बिहार सरकार ने ब्रह्मकुंड के पास ही एक नया स्विमिंग पुल ( जल विहार) और पार्क बनवा दिया है। इसमें आप ठंडे जल में देर तक स्नान कर सकते हैं। इसमें प्रवेश के लिए 25 रुपये का टिकट है। गर्म पानी के कुंड में स्नान के बाद या पहले लंबे समय तक शीतल जल के तरण ताल में स्नान का मजा ले सकते हैं।

स्विमिंग पुल के पास एक कैफटेरिया भी है। यहां पर आप थोड़ी सी पेटपूजा कर सकते हैं। पहले गर्म फिर शीतल जल में स्नान के बाद चाय की चुस्की लेने की इच्छा होती है। इसके बाद चलते हैं आगे के सफऱ पर। रेलवे स्टेशन से हम तांगे से सबसे पहले गर्म जल कुंड पर ही पहुंचे हैं। तो अब चलते हैं आगे।
  
गुरुनानक देव जी राजगीर अपने लंबे सफर के दौरान गुरू नानक देव जी भी राजगीर आए थे और यहां झरने में स्नान किया था। उनकी याद में ब्रह्म कुंड के पास एक गुरूघर ( गुरूद्वारा ) भी बना है। देश भर से सिख श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं।

-    विद्युत प्रकाश मौर्य
( BIHAR, RAJGIR, BRHAM KUND, BATH, NALANDA )