Friday, September 13, 2013

शक्तिपीठ है मां भद्रकाली का मंदिर - अर्जुन ने की थी पूजा


कान्हा और शिव की नगरी कुरूक्षेत्र में शक्ति की देवी का भी मंदिर है। शिव मंदिर के दर्शन के बाद हमलोग पहुंचे हैं मां काली के मंदिर में। आस्था की नगरी कुरुक्षेत्र में स्थित है मां भद्रकाली का प्रसिद्ध मंदिर। शक्तिपीठ श्री देवीकूप भद्रकाली मंदिर को सावित्री पीठ, देवी पीठ, कालिका पीठ या आदि पीठ भी कहा जाता है। यह सती के देश भर में फैले 51 शक्ति पीठ में से एक माना जाता है। यहां सालों भर हर रोज बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते रहते हैं। भद्रकाली मंदिर स्थानेश्वर मंदिर से थोड़ी दूर पर ही स्थित है।

मां दुर्गा का रूप -  भद्रकाली मां दुर्गा का ही एक रूप हैं। भद्र काली मतलब अच्छी काली जो तुरंत प्रसन्न हो जाती हैं। मां भद्रकाली का मंत्र –
ओम जयंती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी,
दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तु‍ते।
अर्थ - जयंती, मंगला, काली, भद्रकाली, कपालिनी, दुर्गा, क्षमा, शिवा धात्री और स्वधा- इन नामों से प्रसिद्ध जगदंबे। आपको मेरा नमस्कार है।

सती की एड़ी गिरी थी यहां पर –वामन पुराण व ब्रह्मपुराण आदि ग्रंथों में कुरुक्षेत्र के बारे में कुल चार कूपों का वर्णन आता है। जिसमें चंद्र कूप, विष्णु कूप, रुद्र कूप व देवी कूप हैं। श्रीदेवी कूप भद्रकाली शक्तिपीठ का इतिहास दक्षकुमारी सती से भी जुड़ा हुआ है। शक्ति पीठ देश में वहीं पर बने है जहां पर सती के शरीर के अलग अलग अंश गिरे थे। तो कहा जाता है कि यहां भगवान विष्णु के सुदर्शन चक्र से कटकर सती के दाहिने पांव की एड़ी ( घुटने के नीचे का भाग ) कट कर गिरी थी।

अर्जुन ने की थी पूजा - हरियाणा का यह एकमात्र प्राचीन शक्तिपीठ है। श्रीदेवी कूप भद्रकाली मंदिर कुरुक्षेत्र के देवी कूप में महाभारत के युद्ध से पूर्व अर्जुन ने भगवान श्रीकृष्ण की प्रेरणा से मां भद्रकाली की पूजा की थी। इस दौरान उन्होंने कहा था कि महादेवी मैंने सच्चे मन से पूजा की है। मुझे आपकी कृपा से विजय प्राप्त होगी तो युद्ध के बाद मैं यहां पर घोड़े चढ़ाने आऊंगा। तो युद्ध समाप्ति पर फिर यहां पर आकर अपने रथ के घोड़ों को चढ़ा दिया था। यहां पर श्रीकृष्ण और बलराम का बाल दान करने का संस्कार भी किया गया  था।  


दशहरे पर लगता है मेला - इसे सिद्ध पीठ माना जाता है और यहां दशहरे पर मेला लगता है। मंदिर परिसर में कूप है जिसमें लोगो मनोकामना पूर्ति के लिए मिट्टी के घोड़े चढ़ाते हैं। कहा जाता है कि यही वह जगह है जहां महाभारत के युद्ध से पूर्व अर्जुन ने भगवान श्री कृष्ण के कहने पर दुर्गा स्तोत्र का पाठ किया था। हालांकि भद्रकाली मंदिर के परिसर में साफ सफाई की थोड़ी कमी नजर आती है।


मंदिर के बगल में दंडी स्वामी संत का मठ भी स्थित है। यहां पर हमेशा साधु संतों का जमावड़ा लगा रहता है। रक्षाबंधन के दिन श्रद्धालु अपनी रक्षा का भार माता को सौंप कर रक्षा सूत्र बांधते हैं। लोगों में ऐसी मान्यता है कि इससे उनकी सुरक्षा होती है।

मां भद्रकाली के दर्शन के बाद हमारा अगला और आखिरी पड़ाव होगा श्री कृष्ण संग्रहालय और पैनोरमा विज्ञान केंद्र। जहां हम काफी समय देने वाले हैं तो चलिए आगे चलते हैं।
-   विद्युत प्रकाश मौर्य vidyutp@gmail.com
( BHADRA KALI TEMPLE, SHAKTIPEETH, KURUKSHETRA )


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