Thursday, August 15, 2013

द एंड ऑफ इंडियन रेलवेज - यहां खत्म हो जाती है भारतीय रेल

हुसैनीवाला में हमारी सबसे बड़ी सुखद अनुभूति थी उस रेलवे लाइन को देखना जो पाकिस्तान के शहर लाहौर तक जाती थी। जी हां, हुसैनीवाला से होकर एक समय में रेल लाइन पाकिस्तान के शहर लाहौर तक जाती थी। यह अटारी वाघा बार्डर के अलावा पाकिस्तान की ओर जाने वाला दूसरा प्रमुख रेलवे लिंक था। पर पाकिस्तान के साथ हुए युद्ध के दौरान ये रेल मार्ग बंद कर दिया गया। कभी यहां सतलुज दरिया पर रेल पुल भी हुआ करता था। पर युद्ध के दौरान उसको भी तोड़ दिया गया। अब फिरोजपुर से हुसैनीवाला में ही आकर रेल लाइन खत्म हो जाती है। रेलवे ट्रैक को ब्लॉक कर यहां लिखा गया है- द एंड ऑफ नार्दर्न रेलवे। वैसे यहां से पाकिस्तान का निकटतम बाजार गंडसिंह वाला है। एक और बोर्ड पर भारतीय रेल के खत्म होने की जानकारी लिखी गई है। 

सतलुज दरिया पर था इंप्रेस ब्रिज - हुसैनीवाला में सतलुज दरिया पर रेल पुल हुआ करता था। इस पुल को इंप्रेस ब्रिज कहते थे। इस पुल के लिए नदी में 13 पीलर लगाए गए थे। अब पुल नहीं हैं पर वे पीलर अभी भी मौजूद हैं। यह एक डबलडेकर रेल पुल हुआ करता था। पुल के दोनों तरफ दो टावर का भी निर्माण किया गया था। 

साथी अमित श्रीवास्तव ने बताया कि 1971 के युद्ध के दौरान ये रेलवे लाइन बंद की गई। आप बोर्ड पर देख सकते हैं लिखा है - द एंड ऑफ इंडियन रेलवेज। क्या सचमुच भारतीय रेल खत्म हो जाती है... हम यहां पर पहुंच कर उत्साहित थे। सबने इस साइन बोर्ड के साथ तस्वीरें भी खिंचवाई। इस तस्वीर में हमारे साथ हैं सर्वश्री नवीन श्रीवास्तव, अजय शुक्ला, अमित श्रीवास्तव, धर्मेंद्र प्रताप सिंह और सबसे दाहिने मेैं विद्युत प्रकाश मौर्य। 

1885 में चालू हुई थी ये रेलवे लाइन - हुसैनीवाला में रेलवे स्टेशन हुआ करता था। इसे गेटवे ऑफ लाहौर कहा जा था। यहां से पाकिस्तान के शहर लाहौर, कसूर और पेशावर जाना आसान था। साल 1885 में फिरोजपुर से कसूर के बीच पहली ट्रेन चलाई गई थी। किसी जमाने में फ्रंटियर मेल जो पेशावर से मुंबई तक चलती थी, इसी मार्ग से होकर जाती थी। हुसेैनीवाला रेलवे स्टेशन की छोटी सी इमारत अभी मौजूद है। फिरोजपुर से हुसैनी वाला तक रेलवे लाइन भी सलामत है। हर साल 23 मार्च को शहीदी दिवस के दिन और 13 अप्रैल को वैशाखी के दिन पर इस मार्ग पर स्पेशल डीएमयू ट्रेन चलाई जाती है। इस ट्रेन से लोग वैशाखी के मेले में शामिल होने आते हैं।
ये रेल लाइनें आजादी से पहले पाकिस्तान जाती थीं -
1 - लूनी – मुनाबाओ खोखरापार ( मीटर गेज ) राजस्थान
2 - फिरोजपुर-फजिल्लका - बहावलनगर – समसता ( अनूपगढ़  अमरुका से फोर्ट अब्बास ( पाकिस्तान )
3 - फिरोजपुर – कसूर- रायविंड – लाहौर
4 - अमृतसर-अटारी- वाघा- लाहौर
5 - अमृतसर डेरा बाबा नानक – नारोवाल – सियालकोट

6 - जम्मू से सियालकोट 

भारतीय रेल में प्रकाशित -  इस यात्रा से लौटने के बाद मैंने भारतीय रेलवे की पत्रिका में एक आलेख भी लिखा था जो जून 2000 अंक में  ( पृष्ठ संख्या -24 )  प्रकाशित हुआ था। इसकी शीर्षक ही था - यहां भारतीय रेलवे खत्म हो जाती है। हालांकि रेलवे की पत्रिका में मैं 1993 से ही लिख रहा हूं। पर इस लेख की तो खास अहमित थी। 

मैंने ये आलेख प्रकाशन के लिए रेलवे को डाक से भेज दिया था। कुछ महीने बाद दिल्ली जाने पर रेल भवन में भारतीय रेल के संपादक प्रमोद कुमार यादव जी से मिलने गया। वे मिलते ही बोल पड़े। एक बार मैं भी गया था फिरोजपुर। पर वह आतंकवाद का दौर था। मैं दिन भर रेलवे के गेस्ट हाउस में पड़ा रहा। हुसैनीवाला नहीं जा सका। तुम्हारा आलेख आया हुसैनीवाला पर तो देखकर खुशी हुई और तुरंत छापने का निर्णय किया। 
- विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyutp@gmail.com 
( HUSAINIWALA, STALUJ, RAIL, PUNJAB, THE END OF INDIAN RAILWAYS) 
सफेद लाइन के पार पाकिस्तान है। तो कुछ साथी पाकिस्तान में चले गए हैं। साथ में एक पाक रेंजर भी खड़े हैं। 

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