Sunday, September 1, 2013

कुरुक्षेत्र - ब्रह्म सरोवर में आस्था की डुबकी


दिल्ली के आसपास एक दिन में कहीं घूमने जाना हो तो कुरुक्षेत्र अच्छा विकल्प हो सकता है। यहां महाभारत काल से जुड़े कई मंदिर और दूसरे दर्शनीय स्थल हैं। आप सुबह जाकर शाम तक लौटकर आ भी सकते हैं। तो एक दिन मैं और बेटा अनादि दिल्ली से कुरुक्षेत्र के लिए चल पड़े। दिल्ली से अंबाला रोड पर हमेशा बसें चलती रहती हैं। हमें पटियाला जाने वाली एसी बस मिल गई। इससे हमलोग पिपली में उतर गए। पिपली से कुरुक्षेत्र का ब्रह्मसरोवर चार किलोमीटर बायीं तरफ है। 

ब्रह्मसरोवर कुरुक्षेत्र का प्रमुख ऐतिहासिक सरोवर है। इसकी लंबाई 3600 फीट और चौड़ाई 1200 फीट है। सरोवर के चारों ओर यात्रियों के विश्राम के लिए बरामदे बने हैं। कम पानी में स्नान के लिए रेलिंग बनी है। महिलाओं के स्नान के लिए कई घाट हैं। जगह जगह शौचालय भी बने हैं।

ब्रह्म सरोवर को सरस्वती फीडर से सदैव पानी मिलता रहता है। सरोवर में 15 फीट गहरा पानी हमेशा रहता है। देश के दो बार कार्यवाहक प्रधानमंत्री रहे गुलजारी लाल नंदा का सक्रिय सहयोग और मार्गदर्शन से ब्रह्म सरोवर का कायाकल्प किया गया।

शिव का प्राचीन सर्वेश्वर मंदिर  - ब्रह्म सरोवर के बीचों बीच शिव का प्रचीन सर्वेश्वर महादेव मंदिर है। इसे बताते हैं कि 17वीं सदी में बाबा श्रवणनाथ ने बनवाया था। सरोवर के बीच में द्रौपदी कूप मंदिर भी है। कहा जाता है कि महाभारत के युद्ध के बाद द्रौपदी ने यहीं अपने खून से सने बाल धोए थे। सरोवर के मध्य में 2008 में रथ पर सवार अर्जुन और श्रीकृष्ण की विशाल प्रतिमा है। चांदनी रात में ब्रह्म सरोवर की आभा देखते ही बनती है।

शिव के कई मंदिर - कुरुक्षेत्र सरोवर के आसपास कई मंदिर हैं। इनमें ज्यादातर मंदिर भगवान शिव के हैं। इनमें से एक दुखभंजन महादेव का भी मंदिर है। ये सभी मंदिर अलग अलग कालखंड में बने हैं। कुरुक्षेत्र आने वाले श्रद्धालु स्नान के बाद इन सभी मंदिरों में दर्शन करते हैं। सरोवर के आसपास सालों भर साधुओं का जमावड़ा लगा रहता है। सरोवर के चौबारे में हिंदू श्रद्धालु कहीं भी डेरा जमा लेते हैं।



यहां कर्ण ने कवच कुंडल दान किया ः यह भी कहा जाता है कि इसी  सरोवर के तट पर कर्ण ने अपने कवच कुंडल ब्राह्रमणों को दान किए थे। ब्रह्म सरोवर से थोड़ी दूरी पर ही सन्नहित सरोवर है। यहां लोग  ग्रहण काल में स्नान के लिए आते हैं। हर अमावस को भी यहां श्रद्धालु स्नान के लिए आते हैं। कहा जाता है यहां युद्धिष्ठिर ने अपने पितरों का पिंडदान भी कुरुक्षेत्र में ही किया था। इसलिए यहां पिंडदान की पंरपरा है। जो लोग फल्गू तट पर पिंडदान के लिए गया नहीं जा पाते वे यहां आते हैं।
पास में है बिड़ला मंदिर -  ब्रह्म सरोवर के द्वार के पास ही बिड़ला मंदिर है। इस मंदिर में श्रीकृष्ण की मनोहारी मूर्तियां हैं। इसका डिजाइन देश के दूसरे लक्ष्मीनारायण बिड़ला मंदिरों के ही जैसा है। मंदिर का परिसर बड़ा मनोरम और हरा भरा है। 
सरोवर के परिसर में सालों भर साधु महात्माओं का वास होता है। हर साल गीता जयंती पर यहां विशाल मेला लगता है। सन्हित सरोवर के ठीक सामने प्राचीन लक्ष्मी नारायण मंदिर और छठी पातशाही का विशाल गुरुद्वारा भी है।

कैसे पहुंचे - दिल्ली से कुरुक्षेत्र की दूरी 156 किलोमीटर है। कुरुक्षेत्र के लिए दिल्ली से बसें 24 घंटे मिलती रहती हैं। दिल्ली अंबाला मार्ग पर चलने वाली रेलगाड़ियों से भी यहां पहुंच सकते हैं। यहां अंबाला की ओर जाने वाली बसों से आप पिपली में उतरें। पिपली से आप सीधा आटो करके पहुंचे ब्रह्म सरोवर। यह कुरुक्षेत्र का मुख्य आकर्षण है। सरोवर को केंद्र बनाकर आप आसपास के प्रमुख स्थलों को घूम सकते हैं। 
- विद्युत प्रकाश मौर्य
( KURUKSHETRA, MAHABHART, BRAHAM SAROVAR ) 



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