Friday, August 2, 2013

अमरेश्वर रुप में हैं ममलेश्वर महादेव ((04))

ओंकारेश्वर स्थित ममलेश्वर महादेव का मंदिर। 
ओंकारेश्वर में नर्मदा नदी के इस पार ममलेश्वर महादेव का मंदिर है। ओंकारेश्वर और ममलेश्वर दोनों मंदिरों की गणना एक ही ज्योतिर्लिंग के तौर पर की जाती है। इसलिए यहां आने वाले श्रद्धालु दोनों ही मंदिरों के दर्शन करते हैं। ओंकारेश्वर में शिव प्रणव रूप में विराजते हैं तो दूसरे मंदिर में पार्थिव शिव लिंग है जो अमरेश्वर के रूप में है। ममलेश्वर मंदिर गजानन आश्रम के बगल में स्थित है। पत्थरों से बने इसके गुंबद की वास्तुकला भी काफी सुंदर है।

मंदिरों का समूह - ममलेश्वर महादेव का यह मंदिर पांच    मंजिला है। इसके हर मंजिल पर एक शिवालय बना हुआ है। इस मंदिर प्रांगण में छह मंदिर और भी बने हुए हैं। पत्थर के बेहतरीन नक्काशियों वाला यह मंदिर अब पुरातत्व के अधीन है। इस मंदिर की दीवारों पर शिव महिमा स्तोत्र लिखा गया है। इन शिलालेखों की तारीख 1063 ई बताई जाती है। इससे इस मंदिर की प्राचीनता का पता चलता है। 
पार्थिव पूजन की पंरपरा-  बाद में ममलेश्वर के मंदिर का नवीकरण इंदौर की महारानी अहिल्याबाई द्वारा करवाया गया। उन्होंने यहां पार्थिव पूजन की पंरपरा शुरू  करवाई।
यह मध्य प्रदेश के कलात्मक मंदिरों में प्रमुख स्थान रखता है। बड़ौदा के गायकवाड राज्य की ओर से नियत किए गए बहुत से ब्राह्मण कभी यहां पार्थिव-पूजन करते रहते थे। हालांकि अब उनकी संख्या कम हो गई है। 
ममलेश्वर की  कथा - कहा जाता है कि  एक बार विंध्य पर्वत ने पार्थिव-अर्चना के साथ भगवान शिव की छह माह तक कठिन साधना की। उनकी पूजा से प्रसन्न होकर शिव प्रकट हुए। उन्होंने विंध्य को मनोवांछित वर प्रदान किया। इस मौके पर वहां बहुत से ऋषि-मुनि भी पधारे। उनकी प्रार्थना पर शिवजी ने अपने ओंकारेश्वर नामक लिंग के दो भाग किए। एक का नाम ओंकारेश्वर और दूसरे का ममलेश्वर पड़ा। दोनों का स्थान और मंदिर अलग होते भी उनका स्वरूप एक ही माना गया है।


पहले ओंकारेश्वर दर्शन  फिर ममलेश्वर के दर्शन -   यात्री चाहें तो पहले ममलेश्वर का दर्शन करके तब नर्मदा नदी के पार होकर ओंकारेश्वर के दर्शन के लिए जाएं। परंतु नियम यह है कि पहले ओंकारेश्वर का दर्शन करें और वहां से  लौटते समय ममलेश्वर महादेव दर्शन किया जाए। पुराणों में ममलेश्वर नाम के बदले अमरेश्वर या विमलेश्वर नाम भी मिलता है। 
ओंकारेश्ववर में ओंकारेश्वर और ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग दर्शन करने के बाद आप शहर कई और मंदिरों और नदी घाटों के दर्शन कर सकते हैं। यहां नागर घाट के आसपास कई सुंदर मंदिर बने हुए हैं। दरअसल पूरा ओंकारेश्वर ही आस्था और मंदिरों की नगरी है। 


कहां ठहरें - ओंकारेश्वर में मध्य प्रदेश टूरिज्म के अच्छे होटल रहने के लिए मौजूद हैं। तो रहने के लिए काफी सस्ती धर्मशालाएं भीं हैं। पर यहां ठहरने के लिए सबसे बेहतरीन जगह गजानन आश्रम हो सकती है, जो ममलेश्वर मंदिर के  बगल में ही  है। 

कैसे पहुंचे - ओंकारेश्वर रोड रेलवे स्टेशन से ओंकारेश्वर मंदिर 13 किलोमीटर है। उज्जैन, खंडवा, खरगोन से सीधे बस से भी ओंकारेश्वर पहुंचा जा सकता है। ओंकारेश्वर मंदिर जाने के लिए नर्मदा नदी पर एक झूले का पुल बना है तो दूसरा स्थायी पुल भी है। कई श्रद्धालु नर्मदा में स्नान के बाद नाव में बैठकर मंदिर की ओर जाते हैं।
 --- विद्युत प्रकाश मौर्य- vidyutp@gmail.com

 (OMKARESHWAR, MAMLESHWAR, JYOTIRLINGAM, TEMPLE, SHIVA) 

देश में कहां-कहां हैं 12 ज्योतिर्लिंग
1. सोमनाथ ( गुजरात)
2. श्री मल्लिकार्जुन स्वामी ( करनूल, आंध्र प्रदेश)
3. महाकालेश्वर ( उज्जैन, मध्य प्रदेश )
4. ओंकारेश्वर (खंडवा, मध्य प्रदेश )


5. केदारनाथ (रुद्रप्रयाग, उत्तराखंड )
6. भीमाशंकर (मंचर, पुणे, महाराष्ट्र)
7. काशी विश्वनाथ (वाराणसी, उत्तर प्रदेश)
8. त्र्यंबकेश्वर (नासिक, महाराष्ट्र)
9. वैद्यनाथ (देवघर, झारखंड)
10. नागेश्वर (द्वारका, गुजरात)
11. रामेश्वरम (रामनाथपुरम, तमिलनाडु)
12. घृष्णेश्वर मंदिर (औरंगाबाद, महाराष्ट्र)

No comments:

Post a Comment