Saturday, September 28, 2013

सर्दियों में बाजरा खाइए, हड्डियों के रोग रहेंगे दूर

सर्दियों में बाजरे की रोटी खाएं, काफी लाभ होगा। वैसे बाजरे का किसी भी रूप में सेवन लाभकारी है। मुरमुरे की तरह आप इसे भूनकर भी खा सकते है। बाजार में बाजरा पफ के नाम से भी यह मिलता है। बाजरा में गेहूं के आटे की तरह ग्लूटन नहीं होता है। जिन लोगों को ग्लूटन से एलर्जी है उनके लिए बाजरा अधिक फायदेमंद है।
बाजरे की रोटी का स्वाद जितना अच्छा हैउससे अधिक उसमें गुण भी हैं। बाजरे की रोटी खाने वाले को हड्डियों में कैल्शियम की कमी से पैदा होने वाला रोग (आस्टियोपोरोसिस) और खून की कमी यानी एनीमिया नहीं होता।
बाजारा में लेसिथिन और मिथियोनिन नामक अमीनो अम्ल होते हैं जो अतिरिक्त वसा को हटा कर कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को कम करते हैं। बाजरे में मौजूद रसायन पाचन की प्रक्रिया को धीमा करते हैं। डायबिटीज़ में यह रक्त में शक्कर की मात्रा को नियन्त्रित करने में सहायक होता है।

गेहूं के मुकाबले ज्यादा ऊर्जा -  बाजरा लीवर से संबंधित रोगों को भी कम करता है। गेहूं और चावल के मुकाबले बाजरे में ऊर्जा कई गुना ज्यादा है। बाजरे में भरपूर कैल्शियम होता है जो हड्डियों के लिए रामबाण औषधि है। आयरन भी बाजरे में इतना अधिक होता है कि खून की कमी से होने वाले रोग नहीं हो सकते।
गर्भवती महिलाओं के लिए लाभकारी
गर्भवती महिलाओं को कैल्शियम की गोलियां खाने के स्थान पर रोज बाजरे की दो रोटी खाना चाहिए। बाजरे का सेवन करने वाली महिलाओं में प्रसव में असामान्य पीड़ा के मामले भी न के बराबर पाए जाते हैं। बाजारा खाने से बच्चों को जन्म से लेकर पांच साल की उम्र तक कैल्शियम और आयरन की कमी से होने वाले रोग नहीं होते थे।
उच्च रक्तचापहृदय की कमजोरीअस्थमा से ग्रस्त लोगों तथा दूध पिलाने वाली माताओं में दूध की कमी में यह टॉनिक का कार्य करता है। यदि बाजरे का नियमित रूप से सेवन किया जाय तो यह कुपोषणक्षरण संबंधी रोग और असमय वृद्ध होने की प्रक्रियाओं को दूर करता है।

बाजरे की रोटी बनाना आसान बाजरे के आटे की छोटी छोटी लोई बनाएं। आटे में थोड़ा नमक और सरसों तेल मिला लें। थोड़ा सा सरसों तेल हाथों में लें। इसे चकला बेलन से सहारे बेलने की कोई जरूरत नहीं हाथों से ही बनाएं। रोटी को टूटने से बचाने के लिए हाथों में सरसों तेल चुपड़ लें। छोटी छोटी रोटियां बनाएं और एक साथ तीन चार रोटियां तवे पर पकाएं।  जब रोटी एक तरफ से अच्छे से सेंक लें तब रोटी को दूसरी तरफ पलट लें।  ये ध्यान रखें कि बाजरे की रोटी मोटी बनाएंगे तो अच्छी बनेगी और टूटेगी नहीं। हां, कुछ नया प्रयोग करना हो तो बाजरा के आटा में उबले हुए आलू भी मिला सकते हैं। बेहतर परिणाम के लिए आटे को 15 मिनट के लिए ढक कर रख दें उसके बाद रोटियां बनाएं।


बाजरे की रोटी में देसी घी चुपड़ कर खा सकते हैं। इसको उरद की दाल और चने के साग के साथ खाया जा सकता है । इसे आप गुड़ के साथ भी खा सकते हैं। क्या आपको पता है कि बाजार इतना गुणकारी होते हुए भी गेहूं की तुलना में सस्ता अनाज है।

वाह भाई बाजरा-
-        11.6 प्रतिशत प्रोटीन, 5 प्रतिशत वसा, 67 प्रतिशत कार्बोहाइड्रेट तथा 2.7 प्रतिशत खनिज लवण पाया जाता है बाजरा में ।

-        40 से 200 सेमी तक वर्षा वाले स्थानों पर बाजरा की खेती की जा सकती है। 

-        51 लाख हैक्टेयर क्षेत्र में प्रतिवर्ष उगाया जाता है राजस्थान में हर साल। यह राजस्थान के शेखावटी इलाके की प्रमुख फसल है।


-        50 फीसदी बाजार देश भर में कुल उत्पादन का राजस्थान में ही उगाया जाता है। 

-        विद्युत प्रकाश मौर्य
(BAJRA BREAD, MILLET )